
14 जुलाई 2026 से गुरु (बृहस्पति) अस्त हो रहे हैं — और इस बार कुछ ऐसा हो रहा है जो 12 साल में एक बार होता है: गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में रहते हुए अस्त होंगे। इसका आप पर क्या असर होगा, कौन से काम रोक देने चाहिए और क्या बिना झिझक कर सकते हैं — पूरी जानकारी इस लेख में।
गुरु अस्त 2026 — मुख्य तिथियाँ
- गुरु अस्त शुरू: 14 जुलाई 2026
- गुरु उदित (अस्त समाप्त): 12–13 अगस्त 2026 (लगभग 28 दिन)
- आखिरी विवाह मुहूर्त: 11–12 जुलाई 2026 (रोहिणी–मृगशिरा)
- चातुर्मास शुरू: 25 जुलाई 2026 — देवशयनी एकादशी
- शुभ कार्य वापस शुरू: देवउठनी एकादशी (नवंबर 2026) के बाद
गुरु अस्त होता क्या है?
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत नज़दीक आ जाता है, तो उसका तारा आकाश में दिखना बंद हो जाता है — इसे तारा अस्त या मौढ्य कहते हैं। ज्योतिष में अस्त ग्रह की शक्ति क्षीण मानी जाती है। गुरु शुभ कार्यों के कारक हैं — विवाह, उपनयन, गृह प्रवेश — इसलिए गुरु के अस्त रहते ये कार्य वर्जित माने जाते हैं।
इस बार खास क्या है — उच्च गुरु का अस्त
2 जून 2026 को गुरु ने अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश किया था। अब वही उच्च गुरु अस्त हो रहा है। शास्त्र कहते हैं कि उच्च ग्रह का अस्त होना उसकी शुभता को पूरी तरह खत्म नहीं करता, लेकिन मुहूर्त के नियम फिर भी लागू रहते हैं — यानी व्यक्तिगत रूप से गुरु की कृपा बनी रहेगी, पर नए शुभ संस्कारों के लिए रुकना होगा।
क्या न करें (14 जुलाई – 12 अगस्त)
- विवाह और सगाई
- उपनयन (जनेऊ संस्कार)
- गृह प्रवेश
- मुंडन संस्कार
- विद्यारंभ
- बड़े प्रॉपर्टी सौदे या नया व्यापार शुभारंभ
क्या कर सकते हैं
- नामकरण और अन्नप्राशन (सामान्यतः अनुमति है)
- रोज़मर्रा के काम, नौकरी जॉइन करना
- पूजा-पाठ, जप, दान — इनका फल और बढ़ जाता है
- यात्रा (सामान्य नियम से)
डबल लॉक: गुरु अस्त + चातुर्मास
इस बार गुरु अस्त खत्म होने से पहले ही 25 जुलाई से चातुर्मास शुरू हो जाएगा — देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु योग-निद्रा में रहते हैं और विवाह जैसे संस्कार नहीं होते। मतलब: 12 जुलाई के बाद सीधा नवंबर में ही अगला विवाह मुहूर्त मिलेगा। अगर कोई शुभ कार्य सोचना है, तो यही 2 दिन बचे हैं।
गुरु को प्रसन्न रखने के उपाय (अस्त काल में)
गुरु अस्त काल में गुरु की आराधना का महत्व और बढ़ जाता है। गुरुवार का व्रत रखें, पीली वस्तुएं (चना दाल, हल्दी, पीला वस्त्र, गुड़) का दान करें, और “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जप करें — 108 बार प्रतिदिन उत्तम है। गुरुजन, शिक्षक और ब्राह्मणों का सम्मान इस काल का सबसे सरल उपाय है। केले के वृक्ष में जल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। मेरे वर्षों के अनुभव में मैंने देखा है कि जो लोग अस्त काल में जल्दबाज़ी में शुभ कार्य कर लेते हैं, उन्हें बाद में उसका असर झेलना पड़ता है — इसलिए धैर्य रखना ही सबसे बड़ा उपाय है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या गुरु अस्त में खरीदे हुए घर में शिफ्ट हो सकते हैं?
गृह प्रवेश का मुहूर्त वर्जित है। मजबूरी हो तो सामान्य रूप से घर में प्रवेश कर सकते हैं और विधि-वत गृह प्रवेश पूजा गुरु उदित होने के बाद शुभ मुहूर्त पर करा सकते हैं — यह व्यावहारिक मार्ग शास्त्रों में मान्य है।
क्या अस्त गुरु महादशा वालों को ज़्यादा असर करेगा?
जिनकी गुरु महादशा या अंतर्दशा चल रही है उन्हें इस काल में बड़े निर्णय (नया व्यापार, बड़ी खरीद) टालने चाहिए और गुरु के उपाय नियमित रखने चाहिए। घबराने की बात नहीं — अस्त काल के बाद उच्च गुरु की पूरी कृपा लौटेगी। व्यक्तिगत विश्लेषण के लिए अपनी कुंडली दिखाएं।
क्या सगाई की रस्म भी गुरु अस्त में रुक जाती है?
हां, सगाई भी विवाह-संबंधी शुभ कार्य मानी जाती है इसलिए इसे भी 14 जुलाई से 12 अगस्त के बीच टालना उचित है। अगर पारिवारिक दबाव हो तो सादगी से रिंग सेरेमनी की जगह केवल मौखिक सहमति रखें और औपचारिक सगाई गुरु उदित होने के बाद करें।
गुरु अस्त और चातुर्मास एक साथ क्यों आ रहे हैं इस बार?
यह पंचांग की गणना पर निर्भर करता है — गुरु की गति और सूर्य की स्थिति के हिसाब से हर साल तिथियां बदलती हैं। इस साल संयोग से दोनों काल लगभग साथ-साथ पड़ रहे हैं, इसलिए शुभ कार्यों के लिए खिड़की सामान्य से भी छोटी हो गई है।
क्या नौकरी के लिए इंटरव्यू देना गुरु अस्त में ठीक है?
हां, रोज़मर्रा के कामकाज, नौकरी के लिए आवेदन और इंटरव्यू देने पर कोई रोक नहीं है। यह वर्जना सिर्फ विवाह, गृह प्रवेश जैसे संस्कारिक शुभ कार्यों पर लागू होती है, सामान्य जीवन-यापन पर नहीं।
सारांश
- गुरु 14 जुलाई से 12–13 अगस्त 2026 तक अस्त रहेंगे — इस बार उच्च राशि कर्क में रहते हुए, जो 12 साल में एक बार होता है।
- विवाह, उपनयन, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ संस्कार इस अवधि में वर्जित माने जाते हैं।
- 25 जुलाई से चातुर्मास भी शुरू हो जाएगा, इसलिए अगला विवाह मुहूर्त सीधा नवंबर में मिलेगा।
- रोज़मर्रा के काम, पूजा-पाठ, दान और यात्रा पर कोई रोक नहीं है।
- गुरुवार व्रत, पीली वस्तुओं का दान और “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र जप इस काल के प्रमुख उपाय हैं।
मेरे वर्षों के अनुभव में मैंने यही सीखा है कि गुरु अस्त काल घबराने का नहीं, बल्कि धैर्य और आत्म-चिंतन का समय है — जो शुभ कार्य टल रहा है, वह गुरु उदित होते ही और बेहतर मुहूर्त में संपन्न होगा।
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Ajit Kumar Nath — AstroVgyaan ke sansthapak aur research lead. Inka vishwas hai ki gyan ka asli uddeshya seva hai — isliye inka kaam kabhi bhi vyaktigat consultation ya paid sessions tak simit nahi raha. Vedic Jyotish (Parashari Hora Shastra, Jaimini Sutram, Bhrigu Nandi Nadi), Lal Kitab, Vastu Shastra aur Ank Jyotish (Numerology) par varshon ka swatantra adhyayan aur shodh karke, unhe saral, imandaar aur research-aadharit lekhon ke roop mein sabke liye free upalabdh karana — yahi inka jeevan-uddeshya hai. Research aur collaboration ke liye: astrovgyaan@gmail.com






