Ajit Kumar Nath

Ajit Kumar Nath — AstroVgyaan ke sansthapak aur research lead. Inka vishwas hai ki gyan ka asli uddeshya seva hai — isliye inka kaam kabhi bhi vyaktigat consultation ya paid sessions tak simit nahi raha. Vedic Jyotish (Parashari Hora Shastra, Jaimini Sutram, Bhrigu Nandi Nadi), Lal Kitab, Vastu Shastra aur Ank Jyotish (Numerology) par varshon ka swatantra adhyayan aur shodh karke, unhe saral, imandaar aur research-aadharit lekhon ke roop mein sabke liye free upalabdh karana — yahi inka jeevan-uddeshya hai. Research aur collaboration ke liye: astrovgyaan@gmail.com

Ajit Kumar Nath

Ajit Kumar Nath — Researcher, AstroVgyaan

Ajit Kumar Nath — AstroVgyaan ke sansthapak aur research lead. Inka vishwas hai ki gyan ka asli uddeshya seva hai — isliye inka kaam kabhi bhi vyaktigat consultation ya paid sessions tak simit nahi raha. Vedic Jyotish (Parashari Hora Shastra, Jaimini Sutram, Bhrigu Nandi Nadi), Lal Kitab, Vastu Shastra aur Ank Jyotish (Numerology) par varshon ka swatantra adhyayan aur shodh karke, unhe saral, imandaar aur research-aadharit lekhon ke roop mein sabke liye free upalabdh karana — yahi inka jeevan-uddeshya hai. Research aur collaboration ke liye: astrovgyaan@gmail.com

Swasthya aur Jeevan

बहरापन और कान की समस्या किसे ज़्यादा होती है? कुंडली में कारण

बहरापन या कान की सुनने की शक्ति कमज़ोर क्यों होती है? — ज्योतिष शास्त्र में श्रवण शक्ति का स्वाभाविक कारक बुध और बृहस्पति को माना गया है, जबकि तीसरा भाव दाहिने कान का और ग्यारहवां भाव बाएं कान का प्रतिनिधित्व करता है। जब इन भावों या इनके स्वामियों को शनि-राहु जैसे पाप ग्रह पीड़ित करते हैं, तो कुंडली में कान से जुड़ी समस्याओं की प्रवृत्ति बनती हुई पारंपरिक रूप से मानी जाती है। ज़्यादातर जगहों पर इस विषय पर सिर्फ इतना बताकर बात खत्म कर दी जाती है कि “राहु-शनि कान को प्रभावित करते हैं”। पर असली विश्लेषण इससे कहीं गहरा है — किन भाव-स्वामियों का संबंध जन्मजात बहरेपन की ओर इशारा करता है, उम्र के साथ आने वाली सुनने की कमज़ोरी के पीछे कौन-सी ग्रह-दशा ज़िम्मेदार मानी जाती है, कौन सी आदतें कान की शक्ति को और कमज़ोर करती हैं, और कौन सी जांच समय रहते करानी चाहिए — यह सब हम इस लेख में विस्तार से समझेंगे। मेरे वर्षों के स्वतंत्र अध्ययन में मैंने बार-बार यह देखा है कि जिन कुंडलियों में बुध किसी भी तरह से राहु या केतु के साथ युति में हो और साथ ही तीसरे या ग्यारहवें भाव पर शनि की दृष्टि भी पड़ रही हो, वहां सुनने से जुड़ी शिकायतें बाकी लोगों की तुलना में कहीं जल्दी और अधिक गंभीर रूप में सामने आती हैं। यह मात्र एक संयोग नहीं, बल्कि दर्जनों कुंडलियों के अवलोकन के बाद उभरा एक स्पष्ट पैटर्न है। ध्यान रहे — यह जानकारी ज्योतिष शास्त्र की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। यह आस्था और परंपरा का विषय है, मेडिकल इलाज नहीं। कान से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए हमेशा योग्य कान-नाक-गला (ई.एन.टी.) विशेषज्ञ से जांच और सलाह लें। प्रवृत्ति किसे ज़्यादा होती है जिनकी कुंडली में बुध तीसरे या ग्यारहवें भाव में नीच राशि (मीन) में बैठा हो या पाप ग्रहों (शनि, राहु, केतु) से पीड़ित हो — जन्म से ही कमज़ोर श्रवण शक्ति की प्रवृत्ति मानी जाती है। जिनकी कुंडली में तीसरे भाव का स्वामी छठे, आठवें या बारहवें भाव (त्रिक भाव) में कमज़ोर होकर बैठा हो — दाहिने कान से जुड़ी समस्याओं का संकेत परंपरागत रूप से माना जाता है। जिनकी कुंडली में ग्यारहवें भाव का स्वामी दुर्बल हो या पाप-युक्त हो — बाएं कान की सुनने की शक्ति प्रभावित होने की प्रवृत्ति बनती है। जिनकी कुंडली में शनि और राहु की युति तीसरे, पांचवें, नौवें या ग्यारहवें भाव में से किसी पर भी असर डाल रही हो — उम्र बढ़ने के साथ धीरे-धीरे सुनने की शक्ति कम होने की प्रवृत्ति ज़्यादा देखी जाती है। जिनकी कुंडली में चंद्रमा, मंगल और बुध तीनों राहु-केतु अक्ष पर होकर तीसरे-ग्यारहवें भाव को प्रभावित कर रहे हों — अचानक या असामान्य कारणों से सुनने की क्षमता प्रभावित होने का योग परंपरागत रूप से बताया गया है। जिनकी कुंडली में बृहस्पति बारहवें भाव में बैठकर पीड़ित हो — कान के भीतरी हिस्से (आंतरिक कर्ण) से जुड़ी नाज़ुक समस्याओं की प्रवृत्ति मानी जाती है। जिन्हें पहले से समस्या है, उनके लिए ग्रह-कारण जो लोग पहले से बहरेपन या सुनने की गंभीर कमज़ोरी से जूझ रहे हैं, उनकी कुंडली में सामान्यतः बुध का राहु या शनि से सीधा संबंध (युति, दृष्टि या राशि-परिवर्तन) पाया जाता है — बुध संचार और तंत्रिका-तंत्र का कारक है, और राहु-शनि का प्रभाव इस संचार-शक्ति में बाधा व धीमापन ला देता है। साथ ही अगर बृहस्पति भी कमज़ोर हो, तो कान की भीतरी संरचना और संतुलन दोनों प्रभावित होने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। समाधान: सिर्फ कारण जानना काफी नहीं है। बुध की शांति के लिए बुधवार का व्रत, हरी वस्तुओं (हरी मूंग, हरा वस्त्र) का दान और विष्णु सहस्रनाम का नियमित पाठ पारंपरिक रूप से सुझाया जाता है। बृहस्पति बल बढ़ाने के लिए गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करना, केले के पेड़ की पूजा और “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जाप बताया गया है। अगर शनि-राहु की पीड़ा प्रमुख हो, तो शनिवार हनुमान चालीसा का पाठ और काले तिल के दान का भी परंपरागत महत्व है। कोई भी रत्न (जैसे पन्ना) धारण करने से पहले अनुभवी ज्योतिषी को कुंडली दिखाकर सलाह लेना बेहतर रहता है। जो लोग मुझसे यह सवाल पूछते हैं उनमें सबसे आम असमंजस यही होता है कि वे सिर्फ उम्र या आनुवंशिकता को ज़िम्मेदार मानकर बैठ जाते हैं, जबकि ग्रह-स्थिति यह तय करने में भी भूमिका निभाती मानी जाती है कि यह समस्या किस उम्र में शुरू होगी और कितनी तेज़ी से बढ़ेगी — इसीलिए समय रहते सतर्क होना ज़्यादा फायदेमंद रहता है। 👂 अपनी कुंडली में बुध और तीसरे भाव की स्थिति जानें कान और संचार से जुड़े ग्रहों का विस्तृत विश्लेषण अपनी कुंडली रिपोर्ट में पाएं कुंडली रिपोर्ट पाएं → कौन सी आदतें सुधारनी चाहिए तेज़ आवाज़ में हेडफ़ोन या इयरफ़ोन का लगातार इस्तेमाल बंद करें — यह बुध और तंत्रिका-तंत्र दोनों पर दबाव डालता है। कान को नुकीली चीज़ों (जैसे इयरबड, पिन) से खुद साफ करने की आदत छोड़ें — इससे कान का पर्दा क्षतिग्रस्त हो सकता है। तेज़ शोर वाले माहौल (फैक्ट्री, लाउडस्पीकर के पास) में लगातार रहने से बचें, या कान की सुरक्षा का इस्तेमाल करें। धूम्रपान और अत्यधिक शराब से दूरी बनाएं — यह कान की रक्त-आपूर्ति को प्रभावित करता है। तनाव और नींद की कमी को नियंत्रित करें — बुध मानसिक स्पष्टता का भी कारक है, अनिद्रा और तनाव कान की समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। कान में लगातार सीटी या भिनभिनाहट जैसी आवाज़ (टिनिटस) महसूस हो तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। शरीर की कौन सी जांच और सतर्कता ज़रूरी है साल में कम से कम एक बार श्रवण-क्षमता (ऑडियोमेट्री) जांच करवाएं, खासकर 40 वर्ष की उम्र के बाद। कान में मैल जमा होने पर खुद न निकालें, किसी कान-नाक-गला विशेषज्ञ से ही सफाई करवाएं। बच्चों में बार-बार कान में दर्द या डिस्चार्ज होने पर तुरंत जांच करवाएं — समय पर इलाज न होने पर स्थायी असर पड़ सकता है। अगर अचानक एक कान से सुनना कम हो जाए, तो इसे तुरंत जांच वाली स्थिति मानकर बिना देर किए डॉक्टर से मिलें — समय पर इलाज से रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है। मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीज़ नियमित रूप से कान की

बहरापन और कान की समस्या किसे ज़्यादा होती है? कुंडली में कारण Read Post »

Jyotish Blogs

कम उम्र में बाल सफेद होना किसे ज़्यादा होता है? कुंडली में कारण

कम उम्र में बाल सफेद होना किसे ज़्यादा होता है? शनि-चंद्रमा-सूर्य की भूमिका, आदत-सुधार और कब डॉक्टर से मिलें — कुंडली विश्लेषण सहित।

कम उम्र में बाल सफेद होना किसे ज़्यादा होता है? कुंडली में कारण Read Post »

Jyotish Blogs

मुंहासे (एक्ने) किसे ज़्यादा होते हैं? कुंडली में कारण

मुंहासे (एक्ने) किसे ज़्यादा होते हैं? मंगल-शुक्र-राहु की भूमिका, आदत-सुधार और कब त्वचा-विशेषज्ञ से मिलें — कुंडली विश्लेषण सहित।

मुंहासे (एक्ने) किसे ज़्यादा होते हैं? कुंडली में कारण Read Post »

💬 Jyotish Prashan Poochein
© 2026 AstroVgyaan — A Unit of Ajit Enterprises. Sarv Adhikar Surakshit (All Rights Reserved). Content bina anumati copy/republish karna mana hai. Copyright Policy padhein.
Privacy PolicyTerms & ConditionsDisclaimerRefund PolicyCopyright PolicyContact Us