Ajit Kumar Nath

Ajit Kumar Nath — AstroVgyaan ke sansthapak aur research lead. Inka vishwas hai ki gyan ka asli uddeshya seva hai — isliye inka kaam kabhi bhi vyaktigat consultation ya paid sessions tak simit nahi raha. Vedic Jyotish (Parashari Hora Shastra, Jaimini Sutram, Bhrigu Nandi Nadi), Lal Kitab, Vastu Shastra aur Ank Jyotish (Numerology) par varshon ka swatantra adhyayan aur shodh karke, unhe saral, imandaar aur research-aadharit lekhon ke roop mein sabke liye free upalabdh karana — yahi inka jeevan-uddeshya hai. Research aur collaboration ke liye: astrovgyaan@gmail.com

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Ajit Kumar Nath — Researcher, AstroVgyaan

Ajit Kumar Nath — AstroVgyaan ke sansthapak aur research lead. Inka vishwas hai ki gyan ka asli uddeshya seva hai — isliye inka kaam kabhi bhi vyaktigat consultation ya paid sessions tak simit nahi raha. Vedic Jyotish (Parashari Hora Shastra, Jaimini Sutram, Bhrigu Nandi Nadi), Lal Kitab, Vastu Shastra aur Ank Jyotish (Numerology) par varshon ka swatantra adhyayan aur shodh karke, unhe saral, imandaar aur research-aadharit lekhon ke roop mein sabke liye free upalabdh karana — yahi inka jeevan-uddeshya hai. Research aur collaboration ke liye: astrovgyaan@gmail.com

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7.3 पारिवारिक और मित्र संबंध अंक संगति — मॉड्यूल 7 समापन

“मेरी और मेरी माँ की आपस में कभी नहीं बनती” या “मेरा सबसे अच्छा दोस्त बिल्कुल मेरे उलट स्वभाव का है, फिर भी हमारी दोस्ती इतनी गहरी क्यों है?” — विवाह और व्यापार में जहाँ हम अपना साथी खुद चुनते हैं, वहीं परिवार और दोस्ती के रिश्तों में चुनाव की गुंजाइश बहुत कम होती है। हमें अपने माता-पिता, भाई-बहन नहीं चुनने होते — वे जन्म से साथ होते हैं। दोस्ती में भी अक्सर परिस्थिति, स्कूल, कॉलेज या पड़ोस के कारण रिश्ता बनता है, हिसाब लगाकर नहीं। इसीलिए मॉड्यूल 7 के इस समापन अध्याय में हम अंक संगति को एक अलग नज़रिए से देखेंगे — जहाँ लक्ष्य “सही साथी चुनना” नहीं, बल्कि “पहले से मौजूद रिश्ते को बेहतर समझना” है। पारिवारिक रिश्तों में अंक संगति — चुनाव नहीं, समझ की ज़रूरत माता-पिता, संतान, भाई-बहन — इन रिश्तों में भी वही मूलांक मित्र-सम-शत्रु तालिका लागू होती है जो हमने विवाह-संगति में सीखी, लेकिन इसे पढ़ने का उद्देश्य बदल जाता है। विवाह में शत्रु-भाव दिखने पर विकल्प होता है (आगे बढ़ें या न बढ़ें), लेकिन पारिवारिक रिश्तों में यह विकल्प नहीं होता — इसलिए यहाँ अंक संगति का उपयोग “समझ बढ़ाने” के लिए किया जाता है, “निर्णय लेने” के लिए नहीं। उदाहरण के लिए, यदि माँ का मूलांक 8 (शनि, अनुशासन-प्रधान) है और बेटे का मूलांक 1 (सूर्य, स्वतंत्रता-प्रधान) है, तो पारंपरिक तालिका में यह शत्रु-भाव दिखाती है। व्यवहार में इसका अर्थ यह हो सकता है कि माँ को बेटे का स्वतंत्र रवैया अनुशासनहीनता जैसा लगे, और बेटे को माँ की नियम-प्रियता बंधन जैसी लगे — जबकि दोनों की मूल भावना (परिवार की भलाई) एक ही है, केवल अभिव्यक्ति का तरीका अलग है। इस समझ के साथ टकराव को व्यक्तिगत नाराज़गी की बजाय स्वाभाविक स्वभाव-अंतर के रूप में देखना आसान हो जाता है। भाई-बहनों के बीच अक्सर एक जैसा मूलांक होने पर भी टकराव देखा जाता है — यह अंक ज्योतिष में कोई विरोधाभास नहीं, बल्कि “दर्पण-प्रभाव” है। समान मूलांक वाले भाई-बहन एक-दूसरे में अपनी ही कमज़ोरियाँ देखते हैं, जिसे स्वीकार करना कई बार सबसे कठिन होता है। वहीं मित्र (सम-भाव) अंकों वाले भाई-बहनों में आमतौर पर धीमी लेकिन स्थिर, जीवन-भर चलने वाली समझ विकसित होती है। मित्रता में अंक संगति — विवाह और परिवार से कैसे अलग है दोस्ती की प्रकृति विवाह और पारिवारिक रिश्तों दोनों से अलग है — इसमें न तो जीवन-भर की भावनात्मक-आर्थिक साझेदारी की गहराई होती है (जैसे विवाह में), न ही खून का अनिवार्य बंधन (जैसे परिवार में)। इसीलिए दोस्ती में मित्र अंकों के अलावा शत्रु अंकों वाली जोड़ियाँ भी अक्सर बेहद सफल और आजीवन चलने वाली साबित होती हैं। इसका कारण है — दोस्ती में “विरोधाभास ही आकर्षण” का सिद्धांत ज़्यादा काम करता है। मूलांक 5 (जिज्ञासु, बहुमुखी) और मूलांक 8 (गंभीर, अनुशासित) के बीच पारंपरिक तालिका में सीधा टकराव नहीं दिखता, लेकिन यह जोड़ी भी दिलचस्प है — मूलांक 5 अपने मूलांक 8 वाले दोस्त से स्थिरता सीखता है, और मूलांक 8 अपने मूलांक 5 वाले दोस्त से सहजता और लचीलापन सीखता है। सच्ची दोस्ती में मूलांक-मिलान से ज़्यादा महत्वपूर्ण है — साझा अनुभव, आपसी सम्मान और एक-दूसरे की सीमाओं की स्वीकृति। मित्र अंक वाली दोस्ती में तालमेल तेज़ी से बनता है, जबकि शत्रु-भाव वाली दोस्ती धीरे-धीरे बनती है पर अक्सर ज़्यादा गहरी और एक-दूसरे को बदलने वाली साबित होती है। वर्कड उदाहरण — माँ-बेटी के रिश्ते की अंक संगति उदाहरण: सुनीता का जन्म 15 फरवरी 1965 को हुआ (मूलांक 1+5=6), और उनकी बेटी काव्या का जन्म 9 सितंबर 1998 को हुआ (मूलांक 9)। तालिका के अनुसार मूलांक 6 (शुक्र) और मूलांक 9 (मंगल) आपस में सम-भाव में हैं — न सीधी शत्रुता, न विशेष मित्रता। व्यवहार में इसका अर्थ है कि दोनों के बीच तालमेल तुरंत नहीं बल्कि समय के साथ, एक-दूसरे को बेहतर समझने के साथ मज़बूत होगा। सुनीता (मूलांक 6) घर, रिश्तों और परंपरा को प्राथमिकता देती हैं, जबकि काव्या (मूलांक 9) स्वतंत्रता, बड़े सपने और साहसिक निर्णयों की तरफ झुकाव रखती हैं। किशोरावस्था में यह अंतर टकराव जैसा महसूस हो सकता है — सुनीता को काव्या के फ़ैसले जल्दबाज़ी भरे लग सकते हैं, काव्या को सुनीता की सलाह पुरानी सोच जैसी लग सकती है। लेकिन सम-भाव होने के कारण, जैसे-जैसे काव्या बड़ी होगी, दोनों एक-दूसरे की ताकत को पहचानने लगेंगी — यह वयस्क होने पर अक्सर एक बहुत गहरी, बराबरी की दोस्ती में बदल जाता है, जो सम-भाव अंकों की पहचान है। 👨‍👩‍👧‍👦 परिवार के हर सदस्य की अंक संगति एक साथ जानें विस्तृत कुंडली विश्लेषण से समझें अपने घर के रिश्तों की गहराई अभी रिपोर्ट पाएं → मॉड्यूल 7 का सार — अंक संगति की पूरी यात्रा मॉड्यूल 7 में हमने अंक संगति को तीन अलग-अलग जीवन-क्षेत्रों में लागू करना सीखा। अध्याय 7.1 में हमने नौ ग्रहों की नैसर्गिक मैत्री पर आधारित मित्र-सम-शत्रु तालिका सीखी और उसे विवाह-संगति पर लागू किया — मूलांक और भाग्यांक दोनों की चार-तरफ़ा तुलना विधि के साथ। अध्याय 7.2 में हमने वही सिद्धांत व्यापारिक साझेदारी पर लागू किया — साझेदार चयन में पूरक स्वभाव की भूमिका, और व्यवसाय के नामांक की गणना व महत्व। इस अंतिम अध्याय 7.3 में हमने देखा कि परिवार और मित्रता के रिश्तों में, जहाँ चुनाव की गुंजाइश कम होती है, अंक संगति का उपयोग “सही व्यक्ति चुनने” के लिए नहीं बल्कि “पहले से मौजूद रिश्ते को गहराई से समझने और स्वीकारने” के लिए किया जाता है। मॉड्यूल 7 — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 1. क्या एक ही तालिका विवाह, व्यापार और परिवार तीनों के लिए इस्तेमाल होती है?हाँ, आधार तालिका (नौ ग्रहों की मैत्री) वही रहती है, लेकिन उसे पढ़ने और लागू करने का नज़रिया संदर्भ के अनुसार बदलता है — जैसा इस मॉड्यूल के तीनों अध्यायों में विस्तार से समझाया गया। 2. अगर परिवार में शत्रु-भाव मूलांक निकले तो क्या रिश्ता कभी नहीं सुधरेगा?बिल्कुल नहीं। पारिवारिक रिश्तों में शत्रु-भाव केवल यह बताता है कि स्वभाव-अभिव्यक्ति अलग है, प्रेम की कमी नहीं। समझ और सचेत संवाद से ऐसे रिश्ते भी उतने ही गहरे हो सकते हैं जितने मित्र-भाव वाले। 3. दोस्ती में शत्रु मूलांक होना क्या अच्छा संकेत है या बुरा?न अच्छा, न बुरा — यह अलग-अलग स्वभाव है। जैसा हमने देखा, दोस्ती में विरोधाभासी अंक अक्सर सबसे

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7.2 व्यापारिक साझेदारी अंक ज्योतिष

दो व्यापारी साझेदार बने, दोनों मेहनती, दोनों ईमानदार — फिर भी हर महीने घाटा। जब कारण खोजा गया तो पता चला कि दोनों के मूलांक शत्रु-भाव में थे और कंपनी का नाम भी दोनों में से किसी के अंक से मेल नहीं खाता था। नाम में छोटा-सा सुधार करने के बाद कुछ ही महीनों में साझेदारी में तालमेल और मुनाफ़ा दोनों बेहतर हुए। यह कोई अपवाद नहीं — व्यापार में अंक ज्योतिष का सबसे व्यावहारिक और लोकप्रिय उपयोग यही है। पिछले अध्याय में हमने विवाह-संगति के लिए मूलांक-भाग्यांक की मित्रता देखी थी; इस अध्याय में हम वही सिद्धांत व्यापारिक साझेदारी, साझेदार चयन और व्यवसाय के नामांक पर लागू करेंगे। व्यापार में अंक ज्योतिष क्यों काम आता है व्यापारिक साझेदारी में दो चीज़ें एक साथ जुड़ती हैं — दो (या अधिक) व्यक्तियों के मूलांक-भाग्यांक, और स्वयं व्यवसाय की पहचान यानी उसका नाम, जिसका भी अपना एक नामांक (नाम-अंक) होता है। विवाह-संगति में जहाँ भावनात्मक तालमेल सबसे ज़्यादा मायने रखता है, वहीं व्यापारिक संगति में दो और पहलू जुड़ जाते हैं — निर्णय-क्षमता का तालमेल (कौन कब निर्णय लेगा, किसकी बात मानी जाएगी) और भौतिक-आर्थिक ऊर्जा का तालमेल (धन कैसे बहेगा, विस्तार कैसे होगा)। इसीलिए व्यापार में केवल साझेदारों का आपसी मूलांक-मिलान काफ़ी नहीं — कंपनी/दुकान/फ़र्म के नाम का अंक भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि वह नाम ही बाज़ार में, ग्राहकों के मन में और हर दस्तावेज़ पर दिन-रात प्रयोग होता है। साझेदार चयन — मूलांक अनुसार व्यापारिक अनुकूलता साझेदार चुनते समय पिछले अध्याय की मित्र-सम-शत्रु तालिका वैसी ही लागू होती है, लेकिन व्यापारिक संदर्भ में उसे पढ़ने का नज़रिया थोड़ा अलग होता है। विवाह में समान स्वभाव अक्सर मददगार होता है, जबकि व्यापार में पूरक स्वभाव ज़्यादा फ़ायदेमंद साबित होता है — जैसे एक साझेदार दूरदर्शी-रचनात्मक हो (मूलांक 1, 3, 5) और दूसरा व्यवस्थित-अनुशासित (मूलांक 4, 8), तो दोनों मिलकर संतुलन बनाते हैं। नीचे हर मूलांक का व्यापारिक स्वभाव और उपयुक्त भूमिका दी गई है — कोई भी अंक छोड़े बिना: मूलांक 1: जन्मजात नेता — नए विचार, विस्तार-योजना और अंतिम निर्णय लेने में सबसे आगे। अकेले व्यवसाय शुरू करने या नेतृत्व-भूमिका में सबसे सफल। साझेदारी में मूलांक 2 या 4 जैसे व्यवस्थित सहयोगी के साथ सबसे अच्छा संतुलन बनता है। मूलांक 2: सहयोग, ग्राहक-संबंध और टीम प्रबंधन में कुशल। अकेले जोखिम लेने से बचता है, इसलिए साझेदारी वाला व्यवसाय मूलांक 2 के लिए मूलांक 1 से भी अधिक स्वाभाविक है — यह भीतर से संतुलन और सामंजस्य लाता है। मूलांक 3: रचनात्मकता, मार्केटिंग, संचार और नए बाज़ार खोजने में माहिर। ऐसे व्यवसाय जहाँ प्रस्तुति और नेटवर्किंग ज़रूरी हो (मीडिया, इवेंट, शिक्षा), वहाँ मूलांक 3 का साझेदार होना बड़ा लाभ है। मूलांक 4: संगठन, हिसाब-किताब और दीर्घकालिक योजना में सबसे भरोसेमंद। स्थिर, नियम-आधारित व्यवसाय (निर्माण, विनिर्माण, लेखा) में उत्कृष्ट। जोखिम लेने वाले साझेदार (मूलांक 1, 9) के साथ मिलकर बेहतरीन संतुलन बनाता है। मूलांक 5: बहुमुखी, तेज़ी से बदलाव अपनाने वाला और नए बाज़ारों में जाने का साहस रखने वाला। यात्रा, आयात-निर्यात, तकनीक जैसे गतिशील क्षेत्रों के लिए आदर्श। स्थिरता के लिए मूलांक 4 या 6 के साझेदार से संतुलन मिलता है। मूलांक 6: सौंदर्य, आतिथ्य, ग्राहक-सेवा और विश्वास बनाने में सर्वश्रेष्ठ। ऐसे व्यवसाय जो सीधे ग्राहक के भरोसे पर टिके हों (सैलून, होटल, ज्वेलरी, इंटीरियर) वहाँ मूलांक 6 की समझ अमूल्य है। मूलांक 7: गहन शोध, विशेषज्ञता और गुणवत्ता-नियंत्रण में माहिर। सलाहकार, शोध-आधारित या तकनीकी-विशेषज्ञता वाले व्यवसायों के लिए उपयुक्त, हालाँकि सार्वजनिक बिक्री-भूमिका में कम सहज। मूलांक 8: बड़े पैमाने पर धन-प्रबंधन, दीर्घकालिक निवेश-निर्णय और संगठनात्मक शक्ति में सर्वश्रेष्ठ। बड़े, स्थिर, वित्त-केंद्रित व्यवसायों (रियल एस्टेट, बैंकिंग, बड़ा विनिर्माण) के लिए आदर्श मूलांक। मूलांक 9: साहस, बड़ा दृष्टिकोण और सामाजिक प्रभाव वाले व्यवसायों में अग्रणी। नई दिशा में जोखिम लेने और तेज़ विस्तार में सक्षम, लेकिन बारीक हिसाब-किताब के लिए मूलांक 4 या 8 का सहयोग ज़रूरी। व्यवसाय का नामांक — गणना विधि और महत्व व्यवसाय के नाम का अंक उसी कैल्डियन पद्धति से निकाला जाता है जो हमने मॉड्यूल 4 में व्यक्ति के नामांक के लिए सीखी थी — हर अक्षर का कैल्डियन मूल्य लेकर जोड़ते जाना, जब तक एक अंक (या मास्टर/कम्पाउंड अंक) न मिल जाए। उदाहरण के लिए फ़र्म का नाम “SHARDA TRADERS” लें — कैल्डियन मूल्यों के अनुसार S=3, H=5, A=1, R=2, D=4, A=1, T=4, R=2, A=1, D=4, E=5, R=2, S=3। सबका योग: 3+5+1+2+4+1 = 16 (SHARDA), और 4+2+1+4+5+2+3 = 21 (TRADERS)। कुल योग 16+21 = 37 → 3+7 = 10 → 1+0 = 1। तो “SHARDA TRADERS” का व्यवसाय-नामांक 1 है — नेतृत्व, नई पहचान और तेज़ शुरुआत का अंक। पारंपरिक अंक ज्योतिष में व्यवसाय के लिए कुछ अंकों को विशेष रूप से शुभ माना गया है — मूलांक 1, 3, 5 और 6 नए व्यवसाय के लिए तेज़ वृद्धि और पहचान बनाने में सहायक माने जाते हैं, जबकि मूलांक 4 और 8 ऐसे व्यवसाय के लिए उपयुक्त हैं जो धीमी पर स्थिर, दीर्घकालिक नींव पर टिके हों (जैसे विनिर्माण, रियल एस्टेट)। मूलांक 7 वाला व्यवसाय-नाम शोध, परामर्श और विशेषज्ञता-आधारित सेवाओं के लिए ठीक बैठता है, पर सीधे बड़े पैमाने पर उपभोक्ता-बिक्री के लिए संघर्षपूर्ण हो सकता है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि व्यवसाय का नामांक कम से कम एक प्रमुख साझेदार के मूलांक या भाग्यांक से मित्र-भाव में हो — अगर नामांक और साझेदार का मूलांक शत्रु-भाव में हों, तो यह ठीक वैसी ही स्थिति बनती है जैसी हमारे शुरुआती उदाहरण में दिखी थी। वर्कड उदाहरण — साझेदारी की पूरी अंक-जाँच उदाहरण: रोहित (जन्म 4 जुलाई 1990) और अमन (जन्म 17 नवंबर 1988) मिलकर “AMAN ENTERPRISES” नाम से व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। रोहित का मूलांक 4+0 = 4 है। अमन का मूलांक 1+7 = 8 है। तालिका के अनुसार मूलांक 4 और मूलांक 8 दोनों तरफ से मित्र-भाव में हैं — दोनों ही राहु-शनि परिवार के व्यावहारिक, अनुशासित अंक हैं, जो दीर्घकालिक व्यवसाय के लिए उत्कृष्ट संयोजन है। अब कंपनी के नाम “AMAN ENTERPRISES” का कैल्डियन नामांक निकालते हैं — A=1,M=4,A=1,N=5 (योग 11) और E=5,N=5,T=4,E=5,R=2,P=8,R=2,I=1,S=3,E=5,S=3 (योग 38→11)। कुल योग 11+38 = 49 → 4+9 = 13 → 1+3 = 4। कंपनी का नामांक 4 निकला, जो रोहित के मूलांक 4 से पूर्णतः मेल खाता है और अमन के मूलांक

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7.1 मूलांक-भाग्यांक विवाह संगति

“हमारे मूलांक आपस में मेल खाते हैं या नहीं?” — जब भी कोई रिश्ता तय होने की बात आती है, चाहे वह विवाह हो, प्रेम-संबंध हो या जीवनसाथी चुनने का निर्णय हो, यह सवाल हर किसी के मन में कभी न कभी ज़रूर आता है। मॉड्यूल 6 तक हमने अंक ज्योतिष के हर उपकरण को अकेले-अकेले, यानी एक व्यक्ति के जीवन पर उसके प्रभाव को समझा — मूलांक ने बताया स्वभाव, भाग्यांक ने बताया जीवन-पथ, नामांक ने बताया अभिव्यक्ति, लो शू ग्रिड ने बताया आंतरिक संरचना। अब मॉड्यूल 7 से हम एक नया आयाम खोल रहे हैं — अंक संगति, यानी दो अंकों के बीच का रिश्ता। जब दो अलग-अलग मूलांक या भाग्यांक वाले व्यक्ति एक साथ जीवन बिताने का निर्णय लेते हैं, तो उनके अंकों की आपसी ऊर्जा — मित्रता, समता या शत्रुता — उस रिश्ते की बुनियाद को गहराई से प्रभावित करती है। इस अध्याय में हम मूलांक और भाग्यांक के आधार पर विवाह-संगति को पूरी बारीकी से, नौ के नौ अंकों को कवर करते हुए, समझेंगे। अंक संगति क्या है और यह क्यों काम करती है अंक संगति की जड़ें अंकों के ग्रह-स्वामित्व में हैं। अंक ज्योतिष में हर अंक 1 से 9 तक किसी न किसी ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है — ठीक वैसे ही जैसे ज्योतिष में हर राशि किसी ग्रह की स्वामी होती है। और जिस तरह ज्योतिष में ग्रहों की आपस में नैसर्गिक मैत्री, सम और शत्रुता होती है (सूर्य-चंद्र मित्र हैं, सूर्य-शनि शत्रु हैं), उसी सिद्धांत को अंकों पर लागू करने पर अंक संगति का पूरा शास्त्र खड़ा होता है। जब दो व्यक्तियों के मूलांक ऐसे ग्रहों से जुड़े हों जो आपस में मित्र हैं, तो उनका स्वाभाविक तालमेल बनता है — एक-दूसरे की बात जल्दी समझ आती है, स्वभाव टकराते नहीं। जब मूलांक शत्रु ग्रहों से जुड़े हों, तो रिश्ते में बार-बार टकराव, गलतफ़हमी और धैर्य की परीक्षा होने की संभावना बढ़ जाती है। समान अंकों में एक तीसरी श्रेणी भी है — सम (उदासीन) अंक — जहाँ न विशेष खिंचाव होता है, न विशेष टकराव; रिश्ता समय और समझ के साथ धीरे-धीरे मज़बूत होता है। यहाँ एक बात स्पष्ट समझ लेनी ज़रूरी है — अंक संगति कोई निर्णायक भविष्यवाणी नहीं है कि रिश्ता चलेगा या टूटेगा। यह एक दिशा-सूचक (मार्गदर्शक) उपकरण है, जो बताता है कि दो स्वभावों के बीच स्वाभाविक प्रवाह कितना सहज है और कहाँ सचेत प्रयास की ज़रूरत पड़ेगी। मित्र अंकों वाला जोड़ा भी बिना समझ और प्रतिबद्धता के असफल हो सकता है, और शत्रु अंकों वाला जोड़ा भी परिपक्वता और आपसी सम्मान से सुंदर जीवन बिता सकता है। अंक संगति रिश्ते की “संभावित बनावट” दिखाती है, उसका “अंतिम परिणाम” नहीं। नौ ग्रहों की मैत्री — मित्र, सम और शत्रु अंकों की पूरी तालिका अंक संगति समझने के लिए सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि कौन-सा अंक किस ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है — 1 सूर्य का, 2 चंद्रमा का, 3 गुरु (बृहस्पति) का, 4 राहु का, 5 बुध का, 6 शुक्र का, 7 केतु का, 8 शनि का और 9 मंगल का। इन्हीं नौ ग्रहों की आपसी नैसर्गिक मैत्री से अंकों की मित्रता-शत्रुता तय होती है। नीचे दी गई तालिका में हर मूलांक के लिए उसके मित्र, सम (उदासीन) और शत्रु अंक पूरी तरह दिए गए हैं — एक भी अंक छोड़े बिना: मूलांक स्वामी ग्रह मित्र अंक सम (उदासीन) अंक शत्रु अंक 1 सूर्य 2, 3, 9 5 6, 8 2 चंद्रमा 1, 5 3, 6, 8, 9 कोई नहीं 3 गुरु (बृहस्पति) 1, 2, 9 8 5, 6 4 राहु 5, 6, 8 3 1, 2, 9 5 बुध 1, 6 3, 8, 9 2 6 शुक्र 5, 8 3, 9 1, 2 7 केतु 1, 2, 3 6, 8 5 8 शनि 5, 6 3 1, 2, 9 9 मंगल 1, 2, 3 6, 8 5 इस तालिका को पढ़ने का एक दिलचस्प और गहरा पहलू है, जो अधिकांश अंक ज्योतिष की सामान्य वेबसाइटों पर नहीं मिलता — ग्रह-मैत्री हमेशा दोतरफ़ा (सममित) नहीं होती। जैसे मूलांक 1 (सूर्य) के लिए मूलांक 5 (बुध) “सम” है, लेकिन मूलांक 5 (बुध) के लिए मूलांक 1 (सूर्य) “मित्र” है — क्योंकि पारंपरिक ज्योतिष में सूर्य, बुध को उदासीन दृष्टि से देखता है जबकि बुध, सूर्य को मित्र मानता है। यह कोई गलती नहीं बल्कि नैसर्गिक ग्रह-मैत्री की वास्तविक और सूक्ष्म बनावट है — ग्रहों की मित्रता एक-दूसरे से समान दूरी पर आधारित नहीं, बल्कि जन्म-कुंडली में उनकी सापेक्ष स्थिति (केंद्र-त्रिकोण संबंध) पर आधारित होती है। व्यावहारिक उपयोग के लिए दोनों अंकों की तालिका को साथ देखना बेहतर रहता है — यानी अगर व्यक्ति A के मूलांक से देखने पर B “मित्र” दिख रहा है, तो B के मूलांक से A को भी जाँच लें; अगर दोनों दिशा से मित्रता या कम से कम सम-भाव बनता है, तो संगति मज़बूत मानी जाती है। मूलांक 1 से 9 तक — हर अंक के लिए विवाह संगति का विश्लेषण तालिका को व्यावहारिक रूप से समझने के लिए अब हम एक-एक करके सभी नौ मूलांकों का विवाह-संगति विश्लेषण देखेंगे — कोई भी अंक छोड़े बिना। मूलांक 1 (सूर्य): मूलांक 1 वाले व्यक्ति स्वाभाविक नेता, आत्मविश्वासी और स्वतंत्र स्वभाव के होते हैं। इनके लिए सबसे सहज संगति मूलांक 2 (सहयोगी, समझदार), मूलांक 3 (उत्साही, सकारात्मक) और मूलांक 9 (साहसी, ऊर्जावान) के साथ बनती है — दोनों तरफ नेतृत्व-भाव होने पर भी आपसी सम्मान टकराव को रोकता है। मूलांक 6 और 8 के साथ अहं का टकराव आम है, क्योंकि दोनों ही मज़बूत इच्छाशक्ति वाले अंक हैं। मूलांक 2 (चंद्रमा): भावनात्मक, सहयोगी और शांतिप्रिय स्वभाव के कारण मूलांक 2 की संगति लगभग हर अंक के साथ ठीक बैठती है — इसीलिए चंद्रमा को इस तालिका में कोई शत्रु ग्रह नहीं है। सबसे गहरा जुड़ाव मूलांक 1 और 5 के साथ बनता है। हालाँकि मूलांक 2 का अत्यधिक संवेदनशील स्वभाव मूलांक 1 या 8 जैसे कठोर-निर्णायक साथी के साथ भावनात्मक समझ माँगता है। मूलांक 3 (गुरु): आशावादी, रचनात्मक और सामाजिक मूलांक 3 की सबसे अच्छी संगति मूलांक 1, 2 और 9 के साथ है — तीनों में जीवन के प्रति उत्साह और विस्तार की भावना समान है। मूलांक 5 के साथ

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