Ajit Kumar Nath

Ajit Kumar Nath — AstroVgyaan ke sansthapak aur research lead. Inka vishwas hai ki gyan ka asli uddeshya seva hai — isliye inka kaam kabhi bhi vyaktigat consultation ya paid sessions tak simit nahi raha. Vedic Jyotish (Parashari Hora Shastra, Jaimini Sutram, Bhrigu Nandi Nadi), Lal Kitab, Vastu Shastra aur Ank Jyotish (Numerology) par varshon ka swatantra adhyayan aur shodh karke, unhe saral, imandaar aur research-aadharit lekhon ke roop mein sabke liye free upalabdh karana — yahi inka jeevan-uddeshya hai. Research aur collaboration ke liye: astrovgyaan@gmail.com

Ajit Kumar Nath

Ajit Kumar Nath — Researcher, AstroVgyaan

Ajit Kumar Nath — AstroVgyaan ke sansthapak aur research lead. Inka vishwas hai ki gyan ka asli uddeshya seva hai — isliye inka kaam kabhi bhi vyaktigat consultation ya paid sessions tak simit nahi raha. Vedic Jyotish (Parashari Hora Shastra, Jaimini Sutram, Bhrigu Nandi Nadi), Lal Kitab, Vastu Shastra aur Ank Jyotish (Numerology) par varshon ka swatantra adhyayan aur shodh karke, unhe saral, imandaar aur research-aadharit lekhon ke roop mein sabke liye free upalabdh karana — yahi inka jeevan-uddeshya hai. Research aur collaboration ke liye: astrovgyaan@gmail.com

रसोई में फ्रिज एवं डाइनिंग टेबल - वास्तु व्यवस्था
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किचन, फ्रिज एवं डाइनिंग टेबल वास्तु — सही दिशा एवं आम गलतियाँ | वास्तु कोर्स मॉड्यूल 9, अध्याय 4

फ्रिज किचन में कहीं भी रख दिया, कभी सोचा कि इसकी भी कोई दिशा होती है? मॉड्यूल 4 के अध्याय 4.7 में हमने रसोई की आग्नेय दिशा, चूल्हे व सिंक की सही स्थिति विस्तार से पढ़ी थी। आधुनिक रसोई में फ्रिज, माइक्रोवेव और डाइनिंग टेबल जैसे तत्व भी जुड़ गए हैं, जिनका शास्त्रों में सीधा उल्लेख नहीं मिलता। इस अध्याय में हम इन्हीं आधुनिक उपकरणों व डाइनिंग-व्यवस्था पर व्यावहारिक वास्तु-सिद्धांत लागू करेंगे। फ्रिज की सही दिशा फ्रिज एक विद्युत उपकरण है, इसलिए इसे रसोई के आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में रखना सबसे उपयुक्त माना जाता है — यही कोण बिजली व अग्नि-तत्व से जुड़े सभी उपकरणों के लिए शुभ है। जगह न मिले तो दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दीवार के पास भी रखा जा सकता है। ध्यान रहे, फ्रिज कभी ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में न रखें — यह दिशा शांत जल-तत्व की है, और भारी विद्युत उपकरण वहाँ ऊर्जा-असंतुलन उत्पन्न करता है। फ्रिज सीधे मुख्य द्वार के सामने न हो — घर में प्रवेश करते ही फ्रिज दिखना ऊर्जा-प्रवाह में रुकावट माना जाता है। फ्रिज चूल्हे के ठीक सामने या बगल में न रखें — अग्नि (चूल्हा) और शीत (फ्रिज) तत्व की सीधी टक्कर ऊर्जा-द्वंद्व पैदा करती है; बीच में कम-से-कम थोड़ी दूरी रखें। दीवार से थोड़ा हटाकर रखें — हवा का प्रवाह बना रहे, जिससे फ्रिज की कार्यक्षमता भी बेहतर रहती है। फ्रिज हमेशा साफ व व्यवस्थित रखें, अंदर बासी या खराब सामान जमा न होने दें — यह समृद्धि व स्वास्थ्य दोनों से जुड़ा माना जाता है। डाइनिंग टेबल की सही दिशा एवं स्थिति डाइनिंग टेबल को रसोई या भोजन-कक्ष के उत्तर या पश्चिम भाग में रखना उपयुक्त माना जाता है। भोजन करते समय मुख पूर्व दिशा की ओर हो तो सर्वोत्तम — यह दिशा स्वास्थ्य व सकारात्मकता से जुड़ी मानी जाती है; उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजन करना भी शुभ है। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से बचें, क्योंकि इसे यम की दिशा माना जाता है। टेबल का आकार वर्गाकार या आयताकार हो तो बेहतर — अनियमित आकार वाली टेबल से बचें। टेबल के ठीक ऊपर कोई भारी शोपीस या झूमर न लटकाएं। माइक्रोवेव, मिक्सर एवं अन्य विद्युत उपकरण माइक्रोवेव, मिक्सर-ग्राइंडर, टोस्टर जैसे विद्युत उपकरण भी फ्रिज की तरह आग्नेय कोण में रखना उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि यह कोण अग्नि-विद्युत तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। इन्हें एक साथ, व्यवस्थित तरीके से रखें — बिखरे हुए उपकरण रसोई में अव्यवस्था व मानसिक तनाव का कारण बनते हैं। 🍽️ रसोई-भोजन से जुड़ी वास्तु शंका है? अपने घर के अनुसार व्यक्तिगत वास्तु परामर्श पाएं। कुंडली रिपोर्ट पाएं → आम गलतियाँ — जहाँ ज़्यादातर लोग अटकते हैं ओपन-किचन में डाइनिंग टेबल किचन-काउंटर के बहुत पास होना — आधुनिक फ्लैट में यह आम है; न बदल सकें तो टेबल की दिशा (उत्तर/पश्चिम) प्राथमिकता से तय करें। फ्रिज को किराए के घर में जहाँ जगह मिली वहीं रख देना — कम-से-कम मुख्य द्वार के ठीक सामने व चूल्हे से सटाकर रखने से बचें, बाकी समायोजन संभव है। बर्तन धोने का सिंक और फ्रिज दोनों को उत्तर-पूर्व में इकट्ठा रखना — सिंक ईशान में ठीक है, पर फ्रिज वहाँ से हटाकर आग्नेय में रखें। डाइनिंग टेबल के नीचे कबाड़ या जूते-चप्पल जमा करना — भोजन-स्थान के नीचे अव्यवस्था अन्न के प्रति अनादर मानी जाती है। सामान्य प्रश्न (FAQ) 1. फ्रिज आग्नेय कोण में न रख पाएं तो क्या दूसरा विकल्प है?दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दीवार के पास रखा जा सकता है। केवल ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में रखने से बचें। 2. फ्रिज का दरवाज़ा किस दिशा में खुलना चाहिए?फ्रिज का दरवाज़ा खोलते समय मुख पूर्व दिशा की ओर हो, यह अधिकांश वास्तु-सलाहकार सुझाते हैं — यानी फ्रिज को इस तरह रखें कि दरवाज़ा खोलते समय आप पूर्व की ओर हों। 3. डाइनिंग टेबल गोल हो या चौकोर, क्या फर्क पड़ता है?वर्गाकार, आयताकार या गोल — तीनों शुभ माने जाते हैं। केवल नुकीले कोनों वाली अनियमित आकार की टेबल से बचने की सलाह दी जाती है। 4. क्या टीवी देखते हुए डाइनिंग टेबल पर खाना खाना वास्तु-दोष है?प्रत्यक्ष वास्तु-दोष नहीं, पर पारंपरिक मान्यता है कि शांत मन से भोजन करना पाचन व ऊर्जा-ग्रहण के लिए बेहतर होता है — इसलिए भोजन के समय टीवी-मोबाइल कम रखने की सलाह दी जाती है। 5. छोटे फ्लैट में अलग डाइनिंग एरिया न हो तो क्या करें?किचन काउंटर पर ही भोजन कर सकते हैं, बस मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखने का प्रयास करें और वह जगह हमेशा साफ-सुथरी रखें। ← पिछला अध्याय: स्टडी रूम वास्तु | कोर्स सूची | अगला अध्याय: अलमारी/वॉर्डरोब एवं तिजोरी वास्तु →

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बच्चों का स्टडी रूम - पढ़ाई की मेज वास्तु
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स्टडी रूम एवं बच्चों के कमरे का वास्तु — टेबल दिशा, बुकशेल्फ़ एवं एकाग्रता उपाय | वास्तु कोर्स मॉड्यूल 9, अध्याय 3

बच्चा घंटों टेबल पर बैठता है, पर पढ़ाई में मन नहीं लगता? कई बार वजह मेहनत की कमी नहीं, बल्कि स्टडी टेबल की दिशा और स्थिति होती है। मॉड्यूल 4 के अध्याय 4.7 में हमने पढ़ा था कि अलग स्टडी रूम न हो तो शयनकक्ष के उत्तर-पूर्व या पश्चिम भाग में अध्ययन-कोना बनाया जा सकता है। इस अध्याय में हम उसी सिद्धांत को आगे बढ़ाकर स्टडी टेबल की दिशा, बुकशेल्फ़, लैपटॉप-कंप्यूटर की स्थिति और बच्चों की एकाग्रता से जुड़ी सबसे आम उलझनों पर गहराई से बात करेंगे। पढ़ते समय मुख किस दिशा में हो? स्टडी टेबल इस तरह रखें कि पढ़ते समय बच्चे का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो। पूर्व दिशा सूर्य की उगती किरणों और नई ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि उत्तर दिशा बुध ग्रह से जुड़ी होकर बुद्धि व तर्कशक्ति बढ़ाने वाली मानी जाती है। परीक्षा के दिनों में भी यही दिशा बनाए रखना लाभकारी माना जाता है। स्टडी टेबल की सही स्थिति टेबल के पीछे ठोस दीवार का सहारा हो — इससे आत्मविश्वास व एकाग्रता बनी रहती है; पीठ के पीछे खुला दरवाज़ा या खिड़की होने से ध्यान भटकता है। टेबल सीधे दरवाज़े की सीध में न हो — बार-बार आने-जाने की हलचल दिखने से पढ़ाई में मन नहीं लगता। बीम के नीचे टेबल न रखें — सिर के ठीक ऊपर छत की बीम मानसिक दबाव का कारण मानी जाती है। टेबल दीवार से बिल्कुल सटी न हो — दीवार और टेबल के बीच थोड़ा अंतर रखें, यह स्मरण-शक्ति के लिए शुभ माना जाता है। टेबल के सामने दर्पण न लगाएं — सामने दर्पण होने से ध्यान बार-बार भटकता है और मानसिक ऊर्जा बंटती है। बुकशेल्फ़ एवं किताबों की व्यवस्था बुकशेल्फ़ कमरे के मध्य में नहीं, बल्कि दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दीवार पर लगाएं, और इसका मुख पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व की ओर रखें। बुकशेल्फ़ को कभी भी स्टडी टेबल के ठीक ऊपर न लगाएं — सिर के ऊपर भारी वस्तु का दबाव मानसिक अशांति का प्रतीक माना जाता है। किताबों व नोटबुक को टेबल पर व्यवस्थित रखें, पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके — बिखरी हुई किताबें एकाग्रता भंग करती हैं। लैपटॉप, कंप्यूटर एवं डिजिटल पढ़ाई की व्यवस्था आजकल ऑनलाइन क्लास व डिजिटल पढ़ाई आम है। लैपटॉप या कंप्यूटर को टेबल के दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) कोने में रखना बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह कोण अग्नि-तत्व और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जुड़ा है। स्क्रीन का प्रकाश सीधे आंखों पर न पड़े, इसका ध्यान रखें, और पढ़ाई पूरी होने पर उपकरण बंद करके ही सोने जाएं — रात भर ऑन डिवाइस रखने से मानसिक विश्राम बाधित होता है। 📚 बच्चे की पढ़ाई में एकाग्रता कम है? कुंडली में बुध व गुरु की स्थिति जानकर सही मार्गदर्शन पाएं। कुंडली रिपोर्ट पाएं → पढ़ाई में मन न लगे तो क्या करें — सरल उपाय यह हर माता-पिता की आम चिंता है। कुछ पारंपरिक व व्यावहारिक उपाय जो बिना तोड़-फोड़ के अपनाए जा सकते हैं: टेबल पर नीले रंग का स्टैंड या नोटबुक रखना मानसिक शक्ति व एकाग्रता से जुड़ा माना जाता है। टेबल पर एक छोटी फिटकरी रखकर सप्ताह में एक बार बदलना — पारंपरिक मान्यता है कि यह नकारात्मक ऊर्जा सोखती है। उत्तर-पूर्व कोने में तुलसी या छोटा हरा पौधा रखना — सुबह की धूप के साथ यह मस्तिष्क को सक्रिय रखने में सहायक माना जाता है। कमरे की नियमित सफाई व व्यवस्था — बिखरा सामान मानसिक अशांति बढ़ाता है, स्वच्छ व सुव्यवस्थित टेबल एकाग्रता बढ़ाती है। सरस्वती या गणेश प्रतिमा उत्तर-पूर्व दिशा में — विद्या-वृद्धि हेतु शुभ मानी जाती है (विस्तार अध्याय 4.7 में)। हॉस्टल या PG में रहने वाले छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए घर से दूर हॉस्टल या PG में रहने वाले छात्र फर्नीचर या कमरे की संरचना नहीं बदल सकते — पर कुछ छोटे उपाय फिर भी कारगर हैं: टेबल व बिस्तर को हमेशा साफ-सुथरा रखें, संभव हो तो पढ़ते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें, कमरे में प्राकृतिक रोशनी व हवा का ध्यान रखें, और टूटा हुआ दर्पण या कांटेदार पौधे कमरे में न रखें। ये सरल आदतें भी पढ़ाई के माहौल को काफी हद तक बेहतर बनाती हैं। सामान्य प्रश्न (FAQ) 1. एक ही कमरे में सोने और पढ़ने की दिशा अलग-अलग हो तो क्या करें?यह सामान्य स्थिति है। बेड की दिशा मॉड्यूल 9 के अध्याय 9.2 के अनुसार रखें, और स्टडी टेबल को कमरे के अलग हिस्से में पूर्व/उत्तर-मुखी रखें — दोनों एक साथ संभव हैं। 2. पूर्व या उत्तर दिशा उपलब्ध न हो तो क्या करें?ऐसी स्थिति में पश्चिम दिशा दूसरा विकल्प है। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पढ़ने से बचने की कोशिश करें। 3. स्टडी टेबल पर कौन-सी वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए?टूटी पेंसिल-पेन, पुराने अधूरे कागज़, खाने-पीने का जूठा सामान और अनावश्यक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट टेबल पर जमा न होने दें — ये एकाग्रता भंग करते हैं। 4. क्या रात में देर तक पढ़ने के लिए दिशा बदलनी चाहिए?नहीं, दिन हो या रात, पढ़ने की दिशा (पूर्व/उत्तर) एक समान रखें। रात में टेबल-लैंप का प्रकाश पर्याप्त व सीधा आंखों पर न पड़े, यह ध्यान रखें। 5. दो बच्चे एक ही स्टडी रूम शेयर करें तो टेबल कैसे रखें?दोनों टेबल को इस तरह व्यवस्थित करें कि दोनों बच्चों का मुख पढ़ते समय पूर्व या उत्तर की ओर रहे, और दोनों टेबल के बीच पर्याप्त जगह हो ताकि एक-दूसरे की गतिविधि से ध्यान न भटके। ← पिछला अध्याय: बेडरूम वास्तु | कोर्स सूची | अगला अध्याय: किचन, फ्रिज एवं डाइनिंग टेबल वास्तु →

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आधुनिक शयनकक्ष — बेडरूम वास्तु का उदाहरण
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बेडरूम (शयनकक्ष) वास्तु — बेड, दर्पण, रंग एवं आम गलतियाँ | वास्तु कोर्स मॉड्यूल 9, अध्याय 2

क्या आपका बिस्तर गलत दिशा में है, और आपको पता ही नहीं? पिछले अध्याय में हमने फ्लैट-चयन और कमरों की सामान्य व्यवस्था देखी। अब हम शयनकक्ष (बेडरूम) में गहराई से उतरते हैं — क्योंकि यही वह कमरा है जहाँ हम दिन का सबसे ज़्यादा समय बिताते हैं, और जहाँ छोटी-छोटी गलतियाँ नींद, सेहत व रिश्तों पर सीधा असर डालती हैं। मास्टर बेडरूम की दिशा (नैऋत्य कोण) और सोते समय सिर की दिशा जैसे मूल सिद्धांत हम मॉड्यूल 4 के अध्याय 4.7 “कमरों की सही दिशा” में विस्तार से पढ़ चुके हैं — यहाँ उन्हें दोहराने की बजाय हम सीधे बेड-प्लेसमेंट, दर्पण-टीवी, रंग और उन व्यावहारिक उलझनों पर बात करेंगे जो फ्लैट में रहने वाले लोगों को सबसे ज़्यादा परेशान करती हैं। बेड (पलंग) का सही प्लेसमेंट — कहाँ बिल्कुल न रखें दिशा सही होने के बावजूद अगर बेड की स्थिति गलत हो तो लाभ अधूरा रह जाता है। फ्लैट में बेड लगाते समय इन नियमों का पालन करें: बीम के नीचे बेड न रखें — सीधे सिर या छाती के ऊपर छत की बीम (beam) होना दबाव व अशांति का प्रतीक माना जाता है; बीम न हटा सकें तो बेड को खिसका दें। बेड की पीठ शौचालय की दीवार से सटी न हो — शौचालय की नमी व नकारात्मक ऊर्जा दीवार के माध्यम से बेडरूम में प्रवेश करती मानी जाती है। बेड सीधे दरवाज़े की सीध में न हो — दरवाज़ा खुलते ही पैर या सिर दिखना ऊर्जा का सीधा टकराव माना जाता है; बेड को कोण बनाकर या थोड़ा हटाकर रखें। बेड के पीछे ठोस दीवार का सहारा हो — खिड़की से सटाकर बेड लगाने पर सहारा (support) की कमी महसूस होती है, नींद उथली रहती है। बेड और दीवार के बीच चलने की जगह हो — बेड को दीवार से बिल्कुल सटाकर न रखें, कम-से-कम दोनों ओर आवागमन की जगह छोड़ें। दर्पण, टीवी एवं ड्रेसिंग टेबल की स्थिति आधुनिक बेडरूम में दर्पण, टीवी और ड्रेसिंग टेबल लगभग हर घर में होते हैं, पर इनकी दिशा पर शायद ही ध्यान दिया जाता है: दर्पण कभी भी बेड के सामने न लगाएं — सोते समय दर्पण में प्रतिबिंब दिखना ऊर्जा-दोगुनीकरण (energy doubling) का कारण माना जाता है, जिससे रिश्तों में तनाव व नींद में खलल की शिकायत जुड़ी बताई जाती है। संभव हो तो दर्पण को अलमारी के पल्ले के भीतर या साइड की दीवार पर लगाएं। टीवी को बेड के ठीक सामने रखने से बचें — इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र (EMF) नींद की गुणवत्ता प्रभावित करता है; न हटा सकें तो रात में कवर या पर्दे से ढकें। ड्रेसिंग टेबल का दर्पण भी बेड को सीधे प्रतिबिंबित न करे — ज़रूरत पड़ने पर छोटा फोल्डिंग पर्दा या कवर लगाया जा सकता है। शयनकक्ष के लिए शुभ रंग रंग सीधे मन-मस्तिष्क की शांति और नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। हल्के, मृदु रंग — जैसे हल्का गुलाबी, आसमानी नीला, हल्का हरा, क्रीम या हल्का पीला — शयनकक्ष के लिए उपयुक्त माने जाते हैं क्योंकि ये शांति व स्थिरता का भाव देते हैं। गहरे लाल, काले या चटख रंगों से बचें — ये ऊर्जा को अत्यधिक सक्रिय (overstimulating) बना देते हैं, जो विश्राम के स्थान के लिए उपयुक्त नहीं। छत को हमेशा दीवारों से हल्के रंग का रखें। 🛏️ आपके शयनकक्ष का वास्तु कैसा है? अपनी कुंडली के अनुसार व्यक्तिगत वास्तु एवं ग्रह-दशा विश्लेषण पाएं। कुंडली रिपोर्ट पाएं → आम गलतियाँ — जहाँ ज़्यादातर लोग अटकते हैं बेडरूम में मंदिर/पूजा स्थान बनाना — शयनकक्ष में पूर्ण पूजा-घर बनाने से बचें (कारण मॉड्यूल 4 के अध्याय 4.7 में बताया गया है); अत्यंत आवश्यक होने पर ईशान कोण में बिस्तर से पर्याप्त दूरी पर ही रखें। बेड के नीचे सामान/कबाड़ जमा करना — बेड के नीचे भारी या टूटा-फूटा सामान रखने से ऊर्जा-प्रवाह अवरुद्ध होता है; हल्की, नियमित उपयोग की वस्तुएं ही रखें। बेडरूम में अत्यधिक क्लटर (अव्यवस्था) — बिखरे कपड़े, कागज़ात, अधूरा सामान मानसिक अशांति बढ़ाता है; नियमित सफाई व व्यवस्था बनाए रखें। सूखे/मुरझाए पौधे या कांटेदार पौधे रखना — बेडरूम में कैक्टस जैसे कांटेदार पौधों से बचें; ताज़ा हरियाली या कृत्रिम सजावट बेहतर विकल्प है। सामान्य प्रश्न (FAQ) 1. फ्लैट में नैऋत्य कोण न मिले तो मास्टर बेडरूम कहाँ बनाएं?यदि विकल्प सीमित हो, तो पश्चिम दिशा दूसरा उपयुक्त विकल्प है। ईशान कोण या ब्रह्मस्थान में शयनकक्ष कभी न बनाएं — यह नियम अध्याय 4.7 में विस्तार से बताया गया है। 2. क्या बेडरूम में पौधे रखना ठीक है?हल्की, कांटे-रहित हरियाली (जैसे मनी प्लांट, स्नेक प्लांट) दिन में रखी जा सकती है, पर रात में कमरे से बाहर रखना बेहतर माना जाता है क्योंकि रात में अधिकांश पौधे ऑक्सीजन के बजाय कार्बन-डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। 3. अटैच्ड टॉयलेट वाले बेडरूम में क्या उपाय करें?टॉयलेट का दरवाज़ा हमेशा बंद रखें, अंदर हल्के रंग की टाइल्स व अच्छी वेंटिलेशन रखें, और बेड को टॉयलेट की साझा दीवार से हटाकर लगाएं। 4. डबल बेड में दो अलग गद्दों (mattress) के बीच गैप हो तो दोष लगता है?हाँ, पारंपरिक मान्यता है कि जोड़े के बीच गद्दों में गैप रिश्ते में दूरी का प्रतीक बन सकता है। एक ही बड़ा गद्दा या गैप-रहित जुड़वां गद्दे उपयोग करना बेहतर माना जाता है। 5. बच्चों व अतिथि कक्ष के बेड की दिशा भी मास्टर बेडरूम जैसी ही रखें?नहीं, यह भूमिका अनुसार अलग होती है — विस्तृत नियम अध्याय 4.7 में दिए गए हैं। पर बेड-प्लेसमेंट, दर्पण व रंग के ये नियम सभी शयनकक्षों पर समान रूप से लागू होते हैं। ← पिछला अध्याय: फ्लैट/अपार्टमेंट वास्तु | कोर्स सूची | अगला अध्याय: स्टडी रूम एवं बच्चों के कमरे का वास्तु →

बेडरूम (शयनकक्ष) वास्तु — बेड, दर्पण, रंग एवं आम गलतियाँ | वास्तु कोर्स मॉड्यूल 9, अध्याय 2 Read Post »

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