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Jyotish Course

अध्याय २.७ — शनि (Saturn) — कर्म और न्याय का ग्रह | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम

शनि कर्म का कारक है — साढ़ेसाती का सच, उच्च-नीच स्थिति, बारह भावों में फल, उन्नीस वर्षों की महादशा और नीलम रत्न का विश्लेषण।

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अध्याय २.५ — गुरु (Jupiter) — ज्ञान और विस्तार का ग्रह | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम

गुरु देवताओं के आचार्य — हंस योग, गजकेसरी योग, विशेष दृष्टि, बारह भावों में फल, सोलह वर्षों की महादशा और पुखराज रत्न।

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अध्याय २.४ — बुध (Mercury) — बुद्धि और संचार का ग्रह | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम

बुध वाणी, व्यापार और विश्लेषण का ग्रह — भद्र महापुरुष योग, बारह भावों में फल, सत्रह वर्षों की महादशा और पन्ना रत्न का विश्लेषण।

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