Ank Shastra Course

Free Numerology (Ank Shastra) course — Mulank, Bhagyank, Chaldean/Pythagorean name numerology, Lo Shu Grid, compatibility, aur practical applications.

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8.3 घर/फ्लैट नंबर की अंक ज्योतिष

एक ही सोसाइटी में, एक ही बिल्डिंग में, एक जैसे ले-आउट वाले दो फ्लैट — फिर भी एक परिवार वहां बरसों सुख-शांति से रहता है और दूसरा परिवार कुछ ही महीनों में बार-बार झगड़े, बीमारी या आर्थिक तंगी की शिकायत करने लगता है। वास्तु शास्त्र में हम दिशा और भवन-रचना की बात करते हैं, लेकिन अंक ज्योतिष एक और परत जोड़ता है — वह अंक जो हर दिन आपके दरवाज़े पर, आपकी चिट्ठियों पर और आपके पते में लिखा दिखता है। मोबाइल और वाहन के बाद अब बारी है उस जगह की, जहां आप सबसे ज़्यादा समय बिताते हैं — आपका घर या फ्लैट। घर/फ्लैट नंबर का अंक कैसे निकालें घर या फ्लैट नंबर की गणना विधि बेहद सरल है, लेकिन कुछ बारीकियां ध्यान रखने योग्य हैं। केवल अंकों वाला पता: अगर घर नंबर सिर्फ अंकों में है, जैसे 42, तो सीधे जोड़ें: 4+2=6। घर का अंक 6 हुआ। अक्षर सहित पता: अगर पता “12बी” जैसा है, यानी अंक के साथ अक्षर भी जुड़ा है, तो अक्षर को कैल्डियन मूल्य देकर जोड़ में शामिल करें। उदाहरण के लिए अक्षर B का मूल्य 2 है, तो “12बी” का जोड़ होगा 1+2+2=5। फ्लैट नंबर में मंज़िल शामिल न करें: जैसे “301” में अगर 3 मंज़िल संख्या है तो पूरे फ्लैट नंबर को ही एक इकाई मानकर जोड़ें — 3+0+1=4। मंज़िल को अलग से जोड़ने की ज़रूरत नहीं, जब तक कि वह नंबर प्लेट पर स्वतंत्र रूप से अंकित न हो। उदाहरण से समझें — मान लीजिए फ्लैट नंबर है “आदित्य टावर, बी-1204″। यहां अक्षर B का मूल्य 2 है, और शेष अंक 1+2+0+4=7 हैं। पूरा जोड़: 2+7=9। इस फ्लैट का अंक 9 हुआ। ध्यान दें कि बिल्डिंग या सोसाइटी का नाम गणना में शामिल नहीं किया जाता — केवल घर/फ्लैट नंबर ही गिना जाता है, क्योंकि वही नंबर हर पत्राचार और आधिकारिक दस्तावेज़ में उपयोग होता है। मूलांक 1 से 9 तक — घर/फ्लैट नंबर पर प्रभाव हर घर अंक अपने निवासियों के जीवन पर अलग तरह की छाप छोड़ता है। नीचे सभी नौ मूलांकों का घर के संदर्भ में विश्लेषण दिया गया है। घर अंक 1 (स्वामी सूर्य): नेतृत्व, स्वतंत्रता और नई शुरुआत का घर। यह उन लोगों के लिए उत्तम है जो अपने दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं, नया व्यवसाय शुरू कर रहे हैं या करियर में ऊंचाई चाहते हैं। यहां रहने वाले सदस्य आत्मनिर्भर और महत्वाकांक्षी बनते हैं। घर अंक 2 (स्वामी चंद्रमा): भावनात्मक जुड़ाव, संवेदनशीलता और घरेलू सुख का घर। पारिवारिक रिश्तों में मिठास और सामंजस्य के लिए बेहद अनुकूल, विशेषकर उन परिवारों के लिए जो साथ में समय बिताना पसंद करते हैं। घर अंक 3 (स्वामी गुरु): ज्ञान, विस्तार और सौभाग्य का घर। बच्चों की शिक्षा, रचनात्मक कार्यों और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए शुभ माना जाता है — गुरु का यह अंक घर में समृद्धि और सम्मान लाता है। घर अंक 4 (स्वामी राहु): परिवर्तन और अस्थिरता का घर। यहां रहने वालों को अनुशासन और नियमितता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है, क्योंकि राहु का यह अंक अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव ला सकता है। घर अंक 5 (स्वामी बुध): गतिशीलता, संचार और व्यापार का घर। बार-बार यात्रा करने वालों, व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े लोगों और सामाजिक रूप से सक्रिय परिवारों के लिए अनुकूल। घर अंक 6 (स्वामी शुक्र): सुख, सौंदर्य और पारिवारिक स्थायित्व का घर। विवाह, गृहस्थी और आराम से भरे जीवन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है — शुक्र का यह अंक घर को आकर्षक और सुखद बनाता है। घर अंक 7 (स्वामी केतु): आध्यात्मिकता, चिंतन और एकांत का घर। ध्यान-साधना, अध्ययन और आंतरिक शांति चाहने वालों के लिए उपयुक्त, हालांकि यह अंक बहुत सामाजिक या शोरगुल भरे जीवन के लिए आदर्श नहीं माना जाता। घर अंक 8 (स्वामी शनि): अनुशासन, धैर्य और कड़ी मेहनत का घर। भौतिक उपलब्धि और दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए अच्छा फल देता है, लेकिन शुरुआती वर्षों में संघर्ष और मेहनत मांगता है — शनि का फल समय के साथ मिलता है। घर अंक 9 (स्वामी मंगल): साहस, सेवा-भाव और परोपकार का घर। ऊर्जावान, महत्वाकांक्षी और समाजसेवा में रुचि रखने वाले परिवारों के लिए शुभ, पर मंगल की उग्र ऊर्जा के कारण घर में शांत वातावरण बनाए रखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। घर के अंक को पूरे परिवार के मूलांक-भाग्यांक से मिलाना वाहन नंबर की तरह ही घर के अंक का सच्चा प्रभाव तभी समझ आता है जब उसे घर के सदस्यों के मूलांक-भाग्यांक से मिलाकर देखा जाए। यहां चुनौती वाहन से थोड़ी अलग है — एक घर में कई सदस्य रहते हैं, इसलिए मिलान भी सामूहिक रूप से करना पड़ता है। मूलांक स्वामी ग्रह मित्र अंक सम (उदासीन) अंक शत्रु अंक 1 सूर्य 2, 3, 9 5 6, 8 2 चंद्रमा 1, 5 3, 6, 8, 9 कोई नहीं 3 गुरु 1, 2, 9 8 5, 6 4 राहु 5, 6, 8 3 1, 2, 9 5 बुध 1, 6 3, 8, 9 2 6 शुक्र 5, 8 3, 9 1, 2 7 केतु 1, 2, 3 6, 8 5 8 शनि 5, 6 3 1, 2, 9 9 मंगल 1, 2, 3 6, 8 5 सामूहिक मिलान का नियम: घर का सबसे शुभ अंक वह माना जाता है जो घर के मुखिया (आमतौर पर परिवार में सबसे अधिक निर्णय लेने वाला या आर्थिक ज़िम्मेदारी उठाने वाला सदस्य) के मूलांक-भाग्यांक से मित्र या सम भाव रखे, और साथ ही अन्य सदस्यों में से अधिकतम के लिए भी शत्रु न हो। पूरी तरह सब सदस्यों के लिए एक जैसा अनुकूल अंक मिलना मुश्किल है, इसलिए मुखिया के मूलांक को प्राथमिकता देना व्यावहारिक तरीका माना जाता है। उदाहरण से समझें — मान लीजिए परिवार के मुखिया राजेश का जन्म 25-11-1978 को हुआ है। दिन 25 से मूलांक: 2+5=7। पूरी जन्मतिथि से भाग्यांक: 2+5+1+1+1+9+7+8=34, फिर 3+4=7। राजेश का मूलांक और भाग्यांक दोनों 7 हुए। तालिका देखने पर अंक 7 (केतु) के मित्र 1, 2, 3 हैं। अगर राजेश को दो फ्लैट में से चुनना हो — एक का अंक 3 और दूसरे का अंक 5 — तो अंक 3 वाला फ्लैट स्पष्ट रूप से बेहतर रहेगा, क्योंकि यह राजेश के मूलांक और भाग्यांक दोनों का मित्र अंक है, जबकि अंक

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8.2 वाहन नंबर की अंक ज्योतिष

क्या आपने कभी गौर किया है कि एक ही मॉडल की दो गाड़ियों में से एक बार-बार गैराज पहुंचती है और दूसरी बरसों बिना किसी झंझट के चलती रहती है? कारण सिर्फ इंजन या ड्राइविंग स्टाइल में नहीं, बल्कि कई बार उस नंबर प्लेट के कंपन में भी छिपा होता है जो हर दिन आपके साथ सड़क पर उतरती है। मॉड्यूल 7 में हमने देखा कि अंकों की मित्रता-शत्रुता इंसानी रिश्तों को कैसे प्रभावित करती है — अब उसी सिद्धांत को हम एक ऐसी वस्तु पर लागू करेंगे जिसके साथ आप रोज़ाना घंटों बिताते हैं यानी आपका वाहन। वाहन नंबर का अंक कैसे निकालें वाहन नंबर की अंक ज्योतिष में गणना विधि मोबाइल नंबर वाली विधि से थोड़ी अलग है, क्योंकि पंजीकरण नंबर में अक्षर और अंक दोनों होते हैं। सबसे पहले पूरी विधि समझते हैं। पहला तरीका (सरल विधि): नंबर प्लेट पर लिखे सभी अंकों को जोड़कर एक अंक तक घटाएं। अक्षर और राज्य कोड को इस विधि में छोड़ दिया जाता है। दूसरा तरीका (संपूर्ण विधि): अक्षरों को भी कैल्डियन पद्धति की तालिका से अंक मूल्य देकर जोड़ में शामिल किया जाता है — यह विधि ज़्यादा सटीक मानी जाती है क्योंकि RTO कोड के अक्षर भी नंबर की ऊर्जा में हिस्सा लेते हैं। उदाहरण से समझें — मान लीजिए वाहन नंबर है “MH12AB4567”. सरल विधि में सिर्फ अंक जोड़े जाएंगे: 1+2+4+5+6+7 = 25, फिर 2+5 = 7। इस वाहन का मूल अंक 7 हुआ। अब संपूर्ण विधि से देखें — यहां अक्षरों M, H, A, B को भी कैल्डियन मूल्य मिलेगा: M=4, H=5, A=1, B=2। पूरा जोड़ होगा 4+5+1+2+1+2+4+5+6+7 = 37, फिर 3+7 = 10, फिर 1+0 = 1। यानी संपूर्ण विधि से इसी नंबर का मूल अंक 1 निकलता है — जो सरल विधि के अंक 7 से बिलकुल अलग है। यही कारण है कि गंभीर विश्लेषण के लिए संपूर्ण विधि को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि रोज़मर्रा के त्वरित अनुमान के लिए सरल विधि पर्याप्त मानी जाती है। मूलांक 1 से 9 तक — वाहन नंबर पर प्रभाव वाहन का मूल अंक निकलने के बाद यह जानना ज़रूरी है कि हर अंक वाहन के संदर्भ में क्या ऊर्जा लेकर आता है। नीचे सभी नौ मूलांकों का विश्लेषण दिया गया है। मूल अंक 1 (स्वामी सूर्य): नेतृत्व, गति और आत्मविश्वास का अंक। यह वाहन तेज़ रफ्तार पसंद करने वालों, नई गाड़ी खरीदने वालों और उन लोगों के लिए अच्छा माना जाता है जो अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं। सावधानी यह है कि सूर्य की तेज़ ऊर्जा कभी-कभी अति आत्मविश्वास और तेज़ ड्राइविंग की प्रवृत्ति भी बढ़ा सकती है। मूल अंक 2 (स्वामी चंद्रमा): शांति, संतुलन और भावनात्मक जुड़ाव का अंक। पारिवारिक गाड़ियों और रोज़मर्रा के आराम से चलने वाले सफर के लिए उत्तम माना जाता है। इस अंक वाला वाहन यात्रा को सहज और तनावमुक्त बनाता है। मूल अंक 3 (स्वामी गुरु): विस्तार, ज्ञान और सौभाग्य का अंक। लंबी यात्राओं, व्यावसायिक उपयोग और नई शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। गुरु का यह अंक वाहन को समृद्धि और यश से जोड़ता है। मूल अंक 4 (स्वामी राहु): अस्थिरता और अप्रत्याशित घटनाओं का अंक। इस अंक वाले वाहन में अतिरिक्त सतर्कता ज़रूरी मानी जाती है — नियमित सर्विसिंग और बीमा अद्यतन रखना विशेष रूप से लाभदायक रहता है। मूल अंक 5 (स्वामी बुध): गति, संचार और व्यापार का अंक। सेल्स, डिलीवरी और लगातार आने-जाने वाले पेशों के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है, क्योंकि बुध चंचलता और तीव्रता दोनों देता है। मूल अंक 6 (स्वामी शुक्र): सुख, विलासिता और सौंदर्य का अंक। लक्ज़री गाड़ियों, पारिवारिक उपयोग और आरामदायक सफर के लिए बेहद शुभ। शुक्र का यह अंक वाहन को स्थायित्व और सौंदर्य दोनों देता है। मूल अंक 7 (स्वामी केतु): अंतर्मुखता और आध्यात्मिकता का अंक। एकांत में गाड़ी चलाने वाले, गहन विचारशील स्वभाव के लोगों के लिए उपयुक्त माना जाता है, हालांकि यह अंक तेज़ रफ्तार वाली भीड़भाड़ की ड्राइविंग के लिए आदर्श नहीं है। मूल अंक 8 (स्वामी शनि): अनुशासन, धैर्य और कड़ी मेहनत का अंक। इसे मिश्रित परिणाम देने वाला माना जाता है — भारी और व्यावसायिक वाहनों (ट्रक, बस, कमर्शियल गाड़ियां) के लिए यह अंक अच्छा फल देता है, लेकिन इसकी ऊर्जा को संभालने के लिए संयम और सतर्क ड्राइविंग आवश्यक है। मूल अंक 9 (स्वामी मंगल): साहस, ऊर्जा और शक्ति का अंक। स्पोर्ट्स गाड़ियों, बाइक और तेज़ रफ्तार वाहनों के लिए यह अंक जोश भरता है, पर मंगल की उग्र ऊर्जा के कारण गति पर नियंत्रण रखना विशेष रूप से ज़रूरी हो जाता है। अपने मूलांक-भाग्यांक से वाहन नंबर मिलाना वाहन नंबर का असली प्रभाव तभी सामने आता है जब उसे आपके व्यक्तिगत मूलांक और भाग्यांक के साथ मिलाकर देखा जाए। मॉड्यूल 7 में दी गई ग्रह-मैत्री तालिका यहां भी उतनी ही कारगर है, क्योंकि वाहन भी आपके दैनिक जीवन का उतना ही करीबी साथी है जितना कोई रिश्ता। मूलांक स्वामी ग्रह मित्र अंक सम (उदासीन) अंक शत्रु अंक 1 सूर्य 2, 3, 9 5 6, 8 2 चंद्रमा 1, 5 3, 6, 8, 9 कोई नहीं 3 गुरु 1, 2, 9 8 5, 6 4 राहु 5, 6, 8 3 1, 2, 9 5 बुध 1, 6 3, 8, 9 2 6 शुक्र 5, 8 3, 9 1, 2 7 केतु 1, 2, 3 6, 8 5 8 शनि 5, 6 3 1, 2, 9 9 मंगल 1, 2, 3 6, 8 5 मिलान का नियम सरल है: वाहन का मूल अंक आपके मूलांक और भाग्यांक — दोनों में से किसी के भी शत्रु सूची में नहीं आना चाहिए। अगर वाहन अंक दोनों का मित्र या सम है, तो यह सर्वोत्तम संयोग माना जाता है। अगर एक से मित्र और दूसरे से सम है, तो यह भी स्वीकार्य संयोग है। केवल तभी सतर्क रहना चाहिए जब वाहन अंक मूलांक या भाग्यांक — किसी एक से भी सीधा शत्रु भाव रखता हो। उदाहरण से समझें — मान लीजिए विकास का जन्म 17-09-1990 को हुआ है। दिन 17 से मूलांक: 1+7=8। पूरी जन्मतिथि से भाग्यांक: 1+7+0+9+1+9+9+0=36, फिर 3+6=9। विकास का मूलांक 8 और भाग्यांक 9 हुआ। अब तालिका देखें — अंक 8 (शनि) के मित्र 5, 6 हैं, और अंक 9

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8.1 लकी मोबाइल नंबर कैसे चुनें

दिन में औसतन 150 से ज़्यादा बार हम अपना फ़ोन उठाते हैं — यानी हमारी ज़िंदगी का कोई भी अंक ऐसा नहीं जो मोबाइल नंबर जितनी बार हमारी नज़रों के सामने आता हो। मॉड्यूल 7 तक हमने रिश्तों की अंक संगति सीखी; अब मॉड्यूल 8 — व्यावहारिक अंक शास्त्र — से हम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अंक ज्योतिष के उपयोग की तरफ़ बढ़ रहे हैं। पहला और सबसे लोकप्रिय सवाल यही है — “क्या मेरा मोबाइल नंबर शुभ है?” इस अध्याय में हम मोबाइल नंबर की अंक-गणना, हर अंक का प्रभाव, बार-बार आने वाले अंकों का असर, अशुभ मानी जाने वाली जोड़ियाँ और अपने मूलांक-भाग्यांक से नंबर मिलाने की पूरी विधि सीखेंगे। मोबाइल नंबर का मूल अंक (कोर वाइब्रेशन) कैसे निकालें मोबाइल नंबर की अंक-गणना बहुत सीधी है — दस अंकों वाले नंबर (देश-कोड को छोड़कर) के सभी अंकों को जोड़ते जाना, जब तक एक अंक न बचे। उदाहरण के लिए नंबर 9876543210 लें — सभी अंकों का योग: 9+8+7+6+5+4+3+2+1+0 = 45, फिर 4+5 = 9। तो इस नंबर का मूल अंक (कोर वाइब्रेशन) 9 है। ध्यान दें कि यह गणना जन्मतिथि के मूलांक-भाग्यांक से अलग है — यहाँ पूरे 10 अंकों का सीधा योग लिया जाता है, दिन/महीना/साल जैसा कोई विभाजन नहीं होता। यही मूल अंक तय करता है कि आपका फ़ोन नंबर किस ग्रह की ऊर्जा से सबसे ज़्यादा जुड़ा है। मूल अंक 1 से 9 तक — मोबाइल नंबर पर प्रभाव हर मूल अंक फ़ोन के ज़रिए होने वाले संचार, संबंध और अवसरों की प्रकृति को अलग रंग देता है। नीचे सभी नौ अंकों का प्रभाव दिया गया है — कोई भी अंक छोड़े बिना: मूल अंक 1 (सूर्य): नेतृत्व, नई शुरुआत और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला नंबर। करियर में आगे बढ़ने और नई पहचान बनाने के इच्छुक लोगों के लिए अनुकूल। मूल अंक 2 (चंद्रमा): भावनात्मक जुड़ाव, सहयोग और संवेदनशीलता बढ़ाने वाला नंबर। रिश्तों और टीम-वर्क से जुड़े काम करने वालों के लिए अच्छा, पर अत्यधिक भावुकता की प्रवृत्ति भी ला सकता है। मूल अंक 3 (गुरु): संचार, रचनात्मकता और सामाजिक विस्तार का नंबर। मार्केटिंग, शिक्षा, मीडिया या सार्वजनिक संपर्क वाले पेशे के लिए बहुत शुभ। मूल अंक 4 (राहु): स्थिरता और अनुशासन का नंबर, पर राहु की अस्थिर प्रकृति के कारण अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव भी ला सकता है। सामान्य उपयोग के लिए ठीक, पर संवेदनशील निर्णयों के लिए सतर्कता बरतें। मूल अंक 5 (बुध): संचार-प्रधान पेशों (सेल्स, कस्टमर सर्विस, मीडिया) के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाने वाला नंबर, क्योंकि बुध सीधे संचार का ग्रह है। तेज़ी से नए संपर्क और अवसर बनाने में मदद करता है। मूल अंक 6 (शुक्र): रिश्तों, आतिथ्य और सौंदर्य-संबंधी व्यवसायों के लिए शुभ। पारिवारिक और सामाजिक जीवन में सामंजस्य बढ़ाने वाला। मूल अंक 7 (केतु): गहराई, शोध और आध्यात्मिक झुकाव का नंबर, पर सार्वजनिक संपर्क और नेटवर्किंग में यह उतना सहज नहीं — सलाहकार, शोधकर्ता या तकनीकी विशेषज्ञ के लिए उपयुक्त। मूल अंक 8 (शनि): धन-प्रबंधन, दीर्घकालिक व्यवसाय और अनुशासित निर्णयों के लिए शुभ माना जाता है, विशेषकर व्यापारिक उपयोग के फ़ोन नंबर के लिए। मूल अंक 9 (मंगल): साहस, नेतृत्व और तेज़ निर्णय-क्षमता का नंबर। बड़े लक्ष्यों की तरफ़ तेज़ी से बढ़ने वालों के लिए ऊर्जावान, पर उतावलेपन से सावधान रहना ज़रूरी। बार-बार आने वाले अंकों का प्रभाव मोबाइल नंबर में जब कोई अंक दो या अधिक बार लगातार आता है, तो उस अंक की ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है — यह सकारात्मक भी हो सकता है और अत्यधिक होने पर असंतुलन भी पैदा कर सकता है। नीचे सभी नौ अंकों के लिए दोहरे (XX) और तिहरे-या-अधिक (XXX+) रूप का प्रभाव दिया गया है — कोई भी अंक छोड़े बिना: अंक दोहरा (XX) प्रभाव तिहरा-या-अधिक (XXX+) प्रभाव 1 संवाद-कुशल, स्थिर रिश्ते बनाने वाले, पर दबदबा जमाने की प्रवृत्ति बड़ी सफलता, पर ज़िद्दी और नियंत्रण-प्रिय स्वभाव 2 भावनात्मक, सहज-सरल पर कभी-कभी भोलेपन से मुश्किल में पड़ना ठंडे-गर्व दिखने वाले पर भीतर से नाज़ुक, अपनी राय पर अड़े रहने वाले 3 पेशेवर सफलता, रचनात्मक और लोकप्रिय, पर दिवास्वप्न देखने की आदत खेल-कूद और सक्रियता से जीवन में आनंद पाने वाले 4 अनुशासित, संगठित पर भौतिकवाद हावी होने की संभावना अथक परिश्रमी, बदलाव स्वीकारने में धीमे 5 स्वतंत्रता-प्रिय, दृढ़-इच्छाशक्ति, पर नियंत्रित किए जाने से चिढ़ आकर्षक व्यक्तित्व, जोखिम लेने की प्रवृत्ति, योजना बनाने में कमज़ोर 6 रचनात्मक, प्रतिभाशाली, पारिवारिक जुड़ाव कभी-कभी बोझिल परिवार से अत्यधिक जुड़ाव, कभी-कभी खुद को त्याग-भावना में देखना 7 विश्लेषणात्मक, अंतर्मुखी, सलाह स्वीकार करने में हिचक गहरी बुद्धि, पर आत्म-त्याग और अकेलेपन की प्रवृत्ति 8 सहकर्मियों की सराहना करने वाले, करियर में सफलता गतिशील, सफल, पर भौतिक मूल्यों का हावी होना रिश्तों को प्रभावित कर सकता है 9 रचनात्मक-बौद्धिक, भावनात्मक रूप से अतिसंवेदनशील निडर, न्याय-प्रिय, पर आसानी से प्रभावित होने की प्रवृत्ति व्यावहारिक सुझाव यह है कि किसी एक अंक की अत्यधिक पुनरावृत्ति (जैसे 8888 या 9999) भले ही याद रखने में आसान लगे, पर ऊर्जा को संतुलित बनाए रखने के लिए विविध अंकों वाला नंबर अक्सर बेहतर रहता है — विशेषकर यदि वह आपके मूलांक-भाग्यांक से मित्र-भाव में भी हो। अशुभ मानी जाने वाली अंक-जोड़ियाँ पूरे नंबर के मूल अंक के अलावा, कुछ लगातार दो-अंकों वाली जोड़ियों को भी परंपरागत रूप से अशुभ माना जाता है — चाहे वे नंबर में कहीं भी आएं। सबसे ज़्यादा बताई जाने वाली जोड़ियाँ हैं 18/81 (रिश्तों में तनाव से जोड़ी जाने वाली), 14/41 (कानूनी या सरकारी अड़चनों से जोड़ी जाने वाली), और 27/72 (स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से जोड़ी जाने वाली)। इन जोड़ियों का प्रभाव व्यक्ति के मूलांक-भाग्यांक पर भी निर्भर करता है — यानी हर किसी के लिए ये समान रूप से अशुभ नहीं होतीं, पर नया नंबर चुनते समय इनसे बचना सामान्यतः बेहतर माना जाता है, खासकर जब अन्य विकल्प भी उपलब्ध हों। अपने मूलांक-भाग्यांक से मोबाइल नंबर मिलाना सबसे प्रभावी तरीका यह है कि मोबाइल नंबर का मूल अंक केवल अपने-आप में शुभ न देखा जाए, बल्कि मॉड्यूल 7 में सीखी मित्र-सम-शत्रु तालिका के अनुसार अपने मूलांक और भाग्यांक से भी मिलाया जाए। नियम सीधा है — यदि मोबाइल नंबर का मूल अंक आपके मूलांक या भाग्यांक में से किसी से भी शत्रु-भाव में नहीं है, तो वह नंबर आपके लिए शुभ माना जाता है। मित्र-भाव में हो तो

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