Ajit Kumar Nath

Ajit Kumar Nath — AstroVgyaan ke sansthapak aur research lead. Inka vishwas hai ki gyan ka asli uddeshya seva hai — isliye inka kaam kabhi bhi vyaktigat consultation ya paid sessions tak simit nahi raha. Vedic Jyotish (Parashari Hora Shastra, Jaimini Sutram, Bhrigu Nandi Nadi), Lal Kitab, Vastu Shastra aur Ank Jyotish (Numerology) par varshon ka swatantra adhyayan aur shodh karke, unhe saral, imandaar aur research-aadharit lekhon ke roop mein sabke liye free upalabdh karana — yahi inka jeevan-uddeshya hai. Research aur collaboration ke liye: astrovgyaan@gmail.com

Ajit Kumar Nath

Ajit Kumar Nath — Researcher, AstroVgyaan

Ajit Kumar Nath — AstroVgyaan ke sansthapak aur research lead. Inka vishwas hai ki gyan ka asli uddeshya seva hai — isliye inka kaam kabhi bhi vyaktigat consultation ya paid sessions tak simit nahi raha. Vedic Jyotish (Parashari Hora Shastra, Jaimini Sutram, Bhrigu Nandi Nadi), Lal Kitab, Vastu Shastra aur Ank Jyotish (Numerology) par varshon ka swatantra adhyayan aur shodh karke, unhe saral, imandaar aur research-aadharit lekhon ke roop mein sabke liye free upalabdh karana — yahi inka jeevan-uddeshya hai. Research aur collaboration ke liye: astrovgyaan@gmail.com

डॉक्टर मरीज़ को इलाज की सलाह देते हुए
Swasthya aur Jeevan

ऑपरेशन/सर्जरी के लिए मुहूर्त — कब देखें, कब बिल्कुल न देखें, शल्य ज्योतिष का पूरा सच

“डॉक्टर ने ऑपरेशन की तारीख दी है, पर पंडित जी कह रहे हैं मुहूर्त ठीक नहीं है — अब क्या करें?” — यह सवाल हमारे पास अक्सर आता है, और सीधा जवाब यह है: अगर ऑपरेशन इमरजेंसी है, तो मुहूर्त कभी मत देखिए — डॉक्टर की तारीख ही सही मुहूर्त है। लेकिन अगर सर्जरी प्लान्ड/इलेक्टिव है (जैसे घुटने का ऑपरेशन, कॉस्मेटिक सर्जरी, या कोई ऐसी प्रोसीजर जिसकी तारीख कुछ हफ्तों के दायरे में खिसक सकती है), तो शल्य-मुहूर्त शास्त्र के कुछ पारंपरिक नियम ज़रूर हैं जो मानसिक शांति के लिए अपनाए जा सकते हैं — डॉक्टर की मेडिकल सलाह से टकराए बिना। इस लेख में शल्य मुहूर्त के शास्त्रीय नियम, कब बचना चाहिए, और सबसे ज़रूरी — कब मुहूर्त की बात ही नहीं करनी चाहिए — सब कुछ विस्तार से। यह लेख पूरी तरह पारंपरिक मुहूर्त शास्त्र पर आधारित है — यह चिकित्सा सलाह नहीं है। सर्जरी की तारीख, ज़रूरत और तरीका तय करने का अधिकार और ज़िम्मेदारी पूरी तरह आपके डॉक्टर की है। हमारे पास हर हफ्ते कई परिवार यही सवाल लेकर आते हैं — घर में किसी की सर्जरी तय हुई है, और डर है कि कहीं “गलत समय” पर ऑपरेशन करा के कुछ अशुभ न हो जाए। यह डर स्वाभाविक है, लेकिन इसे सही जानकारी और सही प्राथमिकता के साथ संभालना ज़रूरी है — ताकि डर की वजह से ज़रूरी इलाज में देरी न हो। पहले जान लें — इमरजेंसी में मुहूर्त मत देखें यह इस पूरे लेख की सबसे ज़रूरी बात है, इसलिए सबसे पहले: एक्सीडेंट, अपेंडिक्स फटना, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, इंटरनल ब्लीडिंग, या कोई भी जानलेवा स्थिति में मुहूर्त देखने का कोई सवाल ही नहीं उठता। शास्त्र खुद कहता है — “आपत्काले नियमो नास्ति” (आपातकाल में कोई नियम लागू नहीं होता)। हर पुराना ज्योतिषी और वैद्य भी यही कहता आया है कि जान बचाना पहली प्राथमिकता है, मुहूर्त दूसरी। यह सलाह सिर्फ उन प्लान्ड, इलेक्टिव सर्जरी के लिए है जिनकी तारीख डॉक्टर की मंज़ूरी से कुछ दिन आगे-पीछे हो सकती है। शल्य मुहूर्त शास्त्र क्या कहता है पारंपरिक मुहूर्त ग्रंथों में शल्य-कर्म (सर्जरी) के लिए कुछ तिथि, वार और नक्षत्र विशेष रूप से शुभ माने गए हैं: शुभ तिथियां: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, द्वादशी (और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी) शुभ वार: रविवार, मंगलवार, गुरुवार, शनिवार शुभ नक्षत्र: अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, अभिजीत, श्रवण इन नक्षत्रों को शुभ मानने के पीछे तर्क है — अश्विनी नक्षत्र के देवता अश्विनी कुमार स्वयं आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं, इसलिए चिकित्सा-कर्म के लिए इसे सर्वोत्तम माना गया। हस्त और चित्रा नक्षत्र “हाथ” और “कौशल” से जुड़े हैं, इसलिए सर्जन के हाथ की सफाई और कुशलता से इन्हें जोड़ा गया। किन दिनों और स्थितियों से बचने की सलाह दी जाती है जिस तरह शुभ समय बताए गए हैं, उसी तरह कुछ स्थितियों से बचने की परंपरागत सलाह भी है — अगर इलेक्टिव सर्जरी है और तारीख में लचीलापन है: रिक्ता तिथियां: चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी — इन्हें नए/महत्वपूर्ण कार्यों के लिए सामान्यतः वर्जित माना जाता है अमावस्या और भरणी, कृत्तिका, आश्लेषा, ज्येष्ठा, मूल जैसे उग्र/तीक्ष्ण स्वभाव के नक्षत्र: पारंपरिक रूप से टाले जाते हैं भद्रा काल: पंचांग में भद्रा की अवधि किसी भी शुभ कार्य के लिए वर्जित मानी जाती है राहु काल: दिन के इस हिस्से में नया कार्य शुरू करने से बचने की सामान्य सलाह दी जाती है मरीज़ की जन्म राशि से चंद्रमा जब अष्टम राशि में गोचर करे (चंद्राष्टम): इस समय को भी अनुकूल नहीं माना जाता ध्यान रहे — ये सभी पूरी तरह पारंपरिक मान्यताएं हैं, और असली दुनिया में डॉक्टर की उपलब्धता, अस्पताल का शेड्यूल, बीमारी की गंभीरता, और मेडिकल टीम की सलाह — ये सब मुहूर्त से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं। मुहूर्त सिर्फ एक अतिरिक्त, वैकल्पिक परत है, निर्णायक कारक नहीं। अनकहा पहलू — जो सबसे ज़्यादा नुकसान करता है जो बात शायद ही कोई खुलकर कहता है, वो यह है: मुहूर्त की चिंता कई बार सर्जरी को टालने का एक “सामाजिक रूप से स्वीकार्य बहाना” बन जाती है — खासकर तब जब मरीज़ या परिवार खुद डरा हुआ हो और सर्जरी को टालने का कोई कारण ढूंढ रहा हो। “अभी मुहूर्त ठीक नहीं है” कहना “मुझे डर लग रहा है” कहने से आसान लगता है। यही देरी कई बार बीमारी को बढ़ा देती है — खासकर कैंसर, हृदय रोग, या पथरी जैसी स्थितियों में जहां समय पर ऑपरेशन ही सबसे बड़ा फैसला होता है। दूसरा अनकहा पहलू — कुछ लोग मुहूर्त की आड़ में डॉक्टर बदलने, दूसरी राय लेने, या इलाज से जुड़े असली सवाल पूछने से बचते हैं। जबकि सच यह है कि सर्जरी को लेकर घबराहट पूरी तरह स्वाभाविक है, और उसका सही तरीका है डॉक्टर से खुलकर बात करना, प्रक्रिया समझना, ज़रूरत पड़े तो सेकंड ओपिनियन लेना — न कि मुहूर्त के पीछे छिपना। हमने कई परिवारों को देखा है जो पूरी तरह ठीक मेडिकल सलाह मिलने के बावजूद सिर्फ “सही मुहूर्त” के इंतज़ार में हफ्तों निकाल देते हैं। अगर डॉक्टर कह रहे हैं कि देरी खतरनाक है, तो कोई भी परंपरा, कोई भी मुहूर्त उस सलाह से बड़ा नहीं है — यह हमारी ईमानदार राय है, न कि सिर्फ औपचारिकता। 🩺 इलाज पहले, मुहूर्त साथ में — कभी बदले हुए क्रम में नहीं सर्जरी को लेकर आर्थिक चिंता है? आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज की पात्रता जांचें — pmjay.gov.in पर विवरण देखें। सर्जरी से पहले डर और घबराहट के लिए iCall मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन (9152987821) से भी बात कर सकते हैं। निःशुल्क कुंडली रिपोर्ट पाएं → कानून और नैतिकता — कोई भी ज्योतिषी सर्जरी न रोक सकता है, न टाल सकता है Drugs and Magic Remedies (Objectionable Advertisements) Act, 1954 के तहत, किसी भी टोटके, मंत्र या उपाय के ज़रिए किसी गंभीर बीमारी को ठीक करने या चिकित्सा प्रक्रिया को टालने का दावा करना गैरकानूनी है। कोई भी ज़िम्मेदार ज्योतिषी यह नहीं कहेगा कि “मुहूर्त ठीक नहीं है इसलिए ऑपरेशन मत कराओ” — यह सलाह न सिर्फ अवैज्ञानिक है, बल्कि जानलेवा भी हो सकती है। मुहूर्त सिर्फ एक सांस्कृतिक-मानसिक सुकून का माध्यम है, चिकित्सा निर्णय का विकल्प नहीं। परिवार के लिए व्यावहारिक सलाह सबसे पहले डॉक्टर से सर्जरी की मेडिकल

ऑपरेशन/सर्जरी के लिए मुहूर्त — कब देखें, कब बिल्कुल न देखें, शल्य ज्योतिष का पूरा सच Read Post »

रंगोली और जलता हुआ दीया दिवाली सजावट
Vrat-Tyohar

दिवाली 2026 — धनतेरस से भाई दूज तक पूरी तारीखें, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और राशि अनुसार उपाय

“दिवाली 2026 में कब है, और लक्ष्मी पूजा का सही मुहूर्त क्या है?” — हर साल यही सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल होता है। सीधा जवाब: दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है, और लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:29 बजे से रात 8:29 बजे तक (प्रदोष काल) रहेगा। इस लेख में धनतेरस से भाई दूज तक की पूरी 5 दिन की तारीखें, सही मुहूर्त, पूजा विधि, और राशि अनुसार उपाय — सब कुछ एक जगह मिलेगा। ध्यान रहे: तिथि और मुहूर्त पंचांग भेद तथा आपके शहर के सूर्यास्त-समय के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। स्थानीय पंचांग से एक बार पुष्टि ज़रूर कर लें। 2026 में दिवाली के आसपास कोई ग्रहण नहीं है, इसलिए किसी भी मुहूर्त पर सूतक काल का असर नहीं पड़ेगा। दिवाली सिर्फ रोशनी और पटाखों का त्योहार नहीं है — यह अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है। हर साल हमारे पास पाठक इन्हीं सटीक तारीखों और मुहूर्त के लिए पूछते हैं, इसलिए हमने एक जगह पूरी, सत्यापित जानकारी तैयार की है ताकि आपकी पूजा की तैयारी सही दिशा में हो। दिवाली 2026 की पूरी 5 दिन की तारीखें दिवाली सिर्फ एक दिन का नहीं, बल्कि 5 दिनों का त्योहार है — हर दिन का अपना अलग महत्व है: धनतेरस — शुक्रवार, 6 नवंबर: सोना-चांदी, बर्तन खरीदना; धन्वंतरि और कुबेर पूजा नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) — शनिवार, 7 नवंबर: सुबह उबटन स्नान; छोटे दीये जलाकर नरकासुर पर कृष्ण की विजय का स्मरण लक्ष्मी पूजा (मुख्य दिवाली) — रविवार, 8 नवंबर: मुख्य पूजा रात्रि — लक्ष्मी-गणेश पूजन, दीये, आतिशबाज़ी गोवर्धन पूजा — सोमवार, 9 नवंबर: गोवर्धन पर्वत की पूजा; अन्नकूट भोग अर्पण भाई दूज — बुधवार, 11 नवंबर: भाई-बहन का प्रेम पर्व — बहनें भाई की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं ध्यान दें — इस साल भाई दूज, दिवाली के ठीक अगले दिन नहीं बल्कि दो दिन बाद (11 नवंबर, बुधवार) पड़ रहा है, क्योंकि द्वितीया तिथि इस साल इसी दिन लग रही है। कुछ परिवार स्थानीय परंपरा अनुसार इसे एक दिन पहले भी मना सकते हैं — अपने शहर के पंचांग से पुष्टि कर लें। लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त 8 नवंबर 2026 को कार्तिक अमावस्या की रात लक्ष्मी पूजा के लिए दो प्रमुख मुहूर्त माने जाते हैं: प्रदोष काल मुहूर्त (सबसे ज़्यादा प्रचलित): शाम लगभग 6:29 बजे से रात 8:29 बजे तक — ज़्यादातर घरेलू पूजा इसी समय होती है निशिता काल मुहूर्त (मध्यरात्रि): व्यापारी वर्ग जो चोपड़ा पूजन (नए बही-खातों की पूजा) करते हैं, वे अक्सर इस समय को प्राथमिकता देते हैं दोनों मुहूर्त शास्त्रसम्मत और मान्य हैं — अपने परिवार की परंपरा अनुसार चुनें, और सटीक मिनट-वार समय के लिए अपने शहर का पंचांग देखें क्योंकि यह सूर्यास्त-समय के अनुसार थोड़ा बदलता है धनतेरस — सोना, बर्तन और धन्वंतरि पूजा का महत्व धनतेरस (6 नवंबर) से दिवाली की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि (आयुर्वेद के देवता) समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए यह दिन स्वास्थ्य और समृद्धि दोनों से जुड़ा है। सोना-चांदी, नए बर्तन या कोई भी धातु की वस्तु खरीदना शुभ माना जाता है — यह घर में स्थायी समृद्धि लाने का प्रतीक है। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर यमराज के नाम का “यम दीपक” भी रखा जाता है, जो अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना का प्रतीक है। नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी, जिसे “छोटी दिवाली” या “रूप चौदस” भी कहा जाता है, भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध और 16,000 बंदी स्त्रियों की मुक्ति के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। इस दिन सूर्योदय से पहले उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है, जिसे “अभ्यंग स्नान” कहते हैं — यह शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। घर के हर कोने में छोटे दीये जलाए जाते हैं ताकि कोई भी अंधेरा कोना नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित न करे। लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि घर की सफाई: सूर्यास्त से पहले पूरा घर साफ कर लें — कहा जाता है कि लक्ष्मी अस्वच्छ, अंधेरे घर में प्रवेश नहीं करतीं वेदी सजाना: लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति/तस्वीर साथ में रखें — गणेश जी को पहले पूजकर बाधाएं दूर की जाती हैं दीये जलाना: पूरे घर में, खासकर द्वार और खिड़कियों पर दीये जलाएं ताकि लक्ष्मी को घर तक का रास्ता दिखे अर्पण: कुमकुम, चावल, फूल, मिठाई अर्पित करें; वेदी के पास सिक्के या थोड़ी नकदी रखें जो धन का प्रतीक है मंत्र जाप: “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें, फिर पूरे परिवार के साथ आरती करें दीये जलते रहें: जहां संभव हो, रात भर दीये जलते रहने दें — अखंड ज्योति को लक्ष्मी की स्थायी उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है 🪔 इस दिवाली अपनी राशि अनुसार जानें सही उपाय अपनी निःशुल्क कुंडली रिपोर्ट बनवाएं और जानें आपके ग्रहों के अनुसार इस दिवाली धन-समृद्धि के लिए कौन सी पूजा और उपाय सबसे फलदायी रहेंगे। निःशुल्क कुंडली रिपोर्ट पाएं → गोवर्धन पूजा और अन्नकूट 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा मनाई जाती है — यह भगवान कृष्ण द्वारा इंद्र के प्रकोप से गांववासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से जुड़ी है। इस दिन गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीकात्मक रूप बनाया जाता है और अन्नकूट — यानी अनेक प्रकार की सब्ज़ियों और व्यंजनों का भोग — भगवान को अर्पित किया जाता है। यह दिन प्रकृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी प्रतीक है। भाई दूज — भाई-बहन के प्रेम का पर्व 11 नवंबर को भाई दूज मनाया जाएगा — यह रक्षाबंधन जैसा ही भाई-बहन के स्नेह का पर्व है, लेकिन इसकी परंपरा अलग है। बहनें भाई को तिलक लगाकर आरती करती हैं और उनकी लंबी उम्र व सुखी जीवन की कामना करती हैं, बदले में भाई उपहार देते हैं। मान्यता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे, इसलिए इसे “यम द्वितीया” भी कहा जाता है। राशि अनुसार दिवाली पूजा और उपाय दिवाली धन-समृद्धि का पर्व है, और हर राशि के लिए धन-योग मजबूत करने के अलग उपाय बताए जाते हैं: मेष: लाल वस्त्र पहनकर पूजा करें, हनुमान चालीसा का पाठ

दिवाली 2026 — धनतेरस से भाई दूज तक पूरी तारीखें, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और राशि अनुसार उपाय Read Post »

दुर्गा माँ की सजी हुई मूर्ति नवरात्रि पूजा
Vrat-Tyohar

शारदीय नवरात्रि 2026 — तारीखें, घटस्थापना मुहूर्त, नवदुर्गा और राशि अनुसार पूजा गाइड

“नवरात्रि 2026 में घटस्थापना कब है, और कौन सा दिन कौन सी देवी का है?” — हर साल शारदीय नवरात्रि नज़दीक आते ही ये सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जाता है। तो सीधा जवाब: शारदीय नवरात्रि 2026 में रविवार, 11 अक्टूबर से घटस्थापना के साथ शुरू होगी और सोमवार, 19 अक्टूबर को महानवमी पर समाप्त होगी, अगले दिन मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) मनाया जाएगा। इस लेख में पूरी 9 दिन की तारीख-वार सूची, घटस्थापना मुहूर्त, नवदुर्गा के सभी 9 स्वरूप, रंग, और राशि अनुसार पूजा मार्गदर्शन — सब कुछ एक जगह मिलेगा। ध्यान रहे: तिथि और मुहूर्त पंचांग भेद तथा आपके शहर के सूर्योदय-समय के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। स्थानीय पंचांग या मंदिर से एक बार पुष्टि ज़रूर कर लें। नवरात्रि सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि 9 दिनों की एक पूरी साधना-यात्रा है — शक्ति के अलग-अलग रूपों से जुड़ने का, अपने भीतर की ऊर्जा को पहचानने का समय। हर साल हमारे पास सैकड़ों पाठक इन्हीं तारीखों, मुहूर्त और राशि-अनुसार मार्गदर्शन के लिए पूछते हैं — इसलिए इस बार हमने एक जगह पर पूरी, सटीक जानकारी इकट्ठा की है, ताकि आपको इधर-उधर भटकना न पड़े। नवरात्रि 2026 की तारीखें — घटस्थापना से विजयादशमी तक शारदीय नवरात्रि हर साल अश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। 2026 में पूरे 9 दिनों का कैलेंडर इस तरह है: दिन 1 — रविवार, 11 अक्टूबर: घटस्थापना (प्रतिपदा) + शैलपुत्री पूजा दिन 2 — सोमवार, 12 अक्टूबर: ब्रह्मचारिणी पूजा दिन 3 — मंगलवार, 13 अक्टूबर: चंद्रघंटा पूजा दिन 4 — बुधवार, 14 अक्टूबर: कूष्मांडा पूजा दिन 5 — गुरुवार, 15 अक्टूबर: स्कंदमाता पूजा दिन 6 — शुक्रवार, 16 अक्टूबर: कात्यायनी पूजा (दुर्गा पूजा षष्ठी भी इसी दिन से शुरू) दिन 7 — शनिवार, 17 अक्टूबर: कालरात्रि पूजा (महासप्तमी) दिन 8 — रविवार, 18 अक्टूबर: महागौरी पूजा (महाअष्टमी, संधि पूजा) दिन 9 — सोमवार, 19 अक्टूबर: सिद्धिदात्री पूजा (महानवमी, कन्या पूजन, हवन) विजयादशमी/दशहरा — मंगलवार, 20 अक्टूबर: मूर्ति विसर्जन, रावण दहन जो लोग दुर्गा पूजा (बंगाल शैली) मनाते हैं, उनके लिए मुख्य उत्सव 16 से 21 अक्टूबर के बीच षष्ठी से दशमी तक केंद्रित रहता है — यानी नवरात्रि के बीच के दिनों में। बाकी पूरे भारत में सभी 9 दिन घट-स्थापना से लेकर नवमी तक समान रूप से मनाए जाते हैं। घटस्थापना मुहूर्त और विधि घटस्थापना (कलश-स्थापना) नवरात्रि का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कर्म है — इसी क्षण से देवी की शक्ति घर में आमंत्रित मानी जाती है। 2026 में प्रतिपदा तिथि 11 अक्टूबर की सुबह से लगेगी, इसलिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं: प्रातः मुहूर्त: सुबह लगभग 6:22 बजे से 10:18 बजे तक (चौघड़िया अनुसार शुभ समय) अभिजित मुहूर्त: लगभग 11:46 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक — यह सबसे शुभ मानी जाने वाली दूसरी विंडो है अगर सुबह किसी वजह से मुहूर्त छूट जाए, तो अभिजित मुहूर्त में घटस्थापना पूरी तरह मान्य है सरल विधि: पूजा स्थान साफ करें, मिट्टी के पात्र में जौ बोएं, उसके ऊपर मिट्टी या तांबे का कलश जल भरकर रखें, कलश में आम के पत्ते और नारियल रखें, कलावा बांधें, स्वस्तिक बनाएं, अखंड ज्योति जलाएं और देवी दुर्गा का आवाहन करें। पूरे 9 दिन जौ को पानी देते रहें और अखंड ज्योति जलती रहनी चाहिए (जहां संभव हो)। नवदुर्गा — 9 दिन, 9 स्वरूप, 9 रंग नवदुर्गा नाम श्लोक प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥ देवी दुर्गा के 9 स्वरूप शक्ति की अलग-अलग अवस्थाओं का प्रतीक हैं — बाल्यावस्था से लेकर पूर्ण सिद्धि तक। हर दिन का एक रंग भी होता है, जो उस दिन की ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है: दिन 1 — शैलपुत्री (रंग: नारंगी): हिमालय-पुत्री, मूलाधार चक्र की देवी — स्थिरता और नई शुरुआत का प्रतीक दिन 2 — ब्रह्मचारिणी (रंग: सफेद): तप और संयम की देवी — आत्म-अनुशासन और धैर्य सिखाती हैं दिन 3 — चंद्रघंटा (रंग: लाल): साहस और शौर्य की देवी — भय को दूर करने वाली दिन 4 — कूष्मांडा (रंग: रॉयल ब्लू): सृष्टि की रचनाकार — सूर्य के भीतर निवास करने वाली ऊर्जा-स्रोत दिन 5 — स्कंदमाता (रंग: पीला): कार्तिकेय की माता — मातृत्व और पोषण की शक्ति दिन 6 — कात्यायनी (रंग: हरा): योद्धा स्वरूप — अन्याय के विरुद्ध शक्ति दिन 7 — कालरात्रि (रंग: ग्रे): सबसे उग्र रूप — नकारात्मकता और अंधकार का नाश करने वाली दिन 8 — महागौरी (रंग: बैंगनी): शांति और शुद्धता — इसी दिन कन्या पूजन भी कई घरों में होता है दिन 9 — सिद्धिदात्री (रंग: मोर-हरा/पीकॉक ग्रीन): सभी सिद्धियां देने वाली — पूर्णता का प्रतीक ये रंग-योजना सोशल मीडिया के दौर में बहुत लोकप्रिय हुई है, खासकर महिलाओं में रोज़ अलग रंग के कपड़े पहनने का चलन — लेकिन याद रखें, असली महत्व रंग से ज़्यादा उस दिन की देवी के गुणों को अपनाने में है। तीन शक्तियां — दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती पारंपरिक रूप से 9 दिनों को तीन-तीन के तीन समूहों में बांटा जाता है, जिसमें हर समूह एक अलग देवी-शक्ति को समर्पित होता है: पहले 3 दिन (दुर्गा): शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा — इन दिनों नकारात्मकता, आलस्य और आंतरिक शत्रुओं (काम, क्रोध, लोभ) को नष्ट करने की साधना होती है बीच के 3 दिन (लक्ष्मी): कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी — इन दिनों समृद्धि, धन और भौतिक स्थिरता के लिए आराधना की जाती है अंतिम 3 दिन (सरस्वती): कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री — इन दिनों ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक जागृति की कामना की जाती है यही वजह है कि नवरात्रि को सिर्फ “देवी पूजा” नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन-यात्रा माना जाता है — पहले भीतर की नकारात्मकता हटाओ, फिर समृद्धि कमाओ, और अंत में ज्ञान से उसे संतुलित करो। 🔱 अपनी राशि के अनुसार जानें — इस नवरात्रि क्या साधना करें अपनी निःशुल्क कुंडली रिपोर्ट बनवाएं और जानें कि आपके ग्रहों के अनुसार इस वर्ष कौन सी साधना और उपाय सबसे फलदायी रहेंगे। निःशुल्क कुंडली रिपोर्ट पाएं → राशि अनुसार नवरात्रि पूजा मार्गदर्शन हर राशि की ऊर्जा अलग होती है, इसलिए नवरात्रि में साधना का फोकस भी राशि अनुसार थोड़ा अलग रखा जा सकता है: मेष: कात्यायनी देवी की पूजा करें, साहस और नेतृत्व-शक्ति बढ़ेगी — लाल रंग शुभ वृषभ:

शारदीय नवरात्रि 2026 — तारीखें, घटस्थापना मुहूर्त, नवदुर्गा और राशि अनुसार पूजा गाइड Read Post »

💬 Jyotish Prashan Poochein
© 2026 AstroVgyaan — A Unit of Ajit Enterprises. Sarv Adhikar Surakshit (All Rights Reserved). Content bina anumati copy/republish karna mana hai. Copyright Policy padhein.
Privacy PolicyTerms & ConditionsDisclaimerRefund PolicyCopyright PolicyContact Us