दिवाली 2026 — धनतेरस से भाई दूज तक पूरी तारीखें, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और राशि अनुसार उपाय

“दिवाली 2026 में कब है, और लक्ष्मी पूजा का सही मुहूर्त क्या है?” — हर साल यही सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल होता है। सीधा जवाब: दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है, और लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:29 बजे से रात 8:29 बजे तक (प्रदोष काल) रहेगा। इस लेख में धनतेरस से भाई दूज तक की पूरी 5 दिन की तारीखें, सही मुहूर्त, पूजा विधि, और राशि अनुसार उपाय — सब कुछ एक जगह मिलेगा।

ध्यान रहे: तिथि और मुहूर्त पंचांग भेद तथा आपके शहर के सूर्यास्त-समय के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। स्थानीय पंचांग से एक बार पुष्टि ज़रूर कर लें। 2026 में दिवाली के आसपास कोई ग्रहण नहीं है, इसलिए किसी भी मुहूर्त पर सूतक काल का असर नहीं पड़ेगा।

दिवाली सिर्फ रोशनी और पटाखों का त्योहार नहीं है — यह अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है। हर साल हमारे पास पाठक इन्हीं सटीक तारीखों और मुहूर्त के लिए पूछते हैं, इसलिए हमने एक जगह पूरी, सत्यापित जानकारी तैयार की है ताकि आपकी पूजा की तैयारी सही दिशा में हो।

रंगोली और जलता हुआ दीया दिवाली सजावट

दिवाली 2026 की पूरी 5 दिन की तारीखें

दिवाली सिर्फ एक दिन का नहीं, बल्कि 5 दिनों का त्योहार है — हर दिन का अपना अलग महत्व है:

  • धनतेरस — शुक्रवार, 6 नवंबर: सोना-चांदी, बर्तन खरीदना; धन्वंतरि और कुबेर पूजा
  • नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) — शनिवार, 7 नवंबर: सुबह उबटन स्नान; छोटे दीये जलाकर नरकासुर पर कृष्ण की विजय का स्मरण
  • लक्ष्मी पूजा (मुख्य दिवाली) — रविवार, 8 नवंबर: मुख्य पूजा रात्रि — लक्ष्मी-गणेश पूजन, दीये, आतिशबाज़ी
  • गोवर्धन पूजा — सोमवार, 9 नवंबर: गोवर्धन पर्वत की पूजा; अन्नकूट भोग अर्पण
  • भाई दूज — बुधवार, 11 नवंबर: भाई-बहन का प्रेम पर्व — बहनें भाई की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं

ध्यान दें — इस साल भाई दूज, दिवाली के ठीक अगले दिन नहीं बल्कि दो दिन बाद (11 नवंबर, बुधवार) पड़ रहा है, क्योंकि द्वितीया तिथि इस साल इसी दिन लग रही है। कुछ परिवार स्थानीय परंपरा अनुसार इसे एक दिन पहले भी मना सकते हैं — अपने शहर के पंचांग से पुष्टि कर लें।

लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त

8 नवंबर 2026 को कार्तिक अमावस्या की रात लक्ष्मी पूजा के लिए दो प्रमुख मुहूर्त माने जाते हैं:

  • प्रदोष काल मुहूर्त (सबसे ज़्यादा प्रचलित): शाम लगभग 6:29 बजे से रात 8:29 बजे तक — ज़्यादातर घरेलू पूजा इसी समय होती है
  • निशिता काल मुहूर्त (मध्यरात्रि): व्यापारी वर्ग जो चोपड़ा पूजन (नए बही-खातों की पूजा) करते हैं, वे अक्सर इस समय को प्राथमिकता देते हैं
  • दोनों मुहूर्त शास्त्रसम्मत और मान्य हैं — अपने परिवार की परंपरा अनुसार चुनें, और सटीक मिनट-वार समय के लिए अपने शहर का पंचांग देखें क्योंकि यह सूर्यास्त-समय के अनुसार थोड़ा बदलता है
साड़ी पहने महिलाएं दिवाली पर दीये जलाती हुईं
दिवाली की शाम दीये जलाकर घर को रोशन करती परंपरा

धनतेरस — सोना, बर्तन और धन्वंतरि पूजा का महत्व

धनतेरस (6 नवंबर) से दिवाली की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि (आयुर्वेद के देवता) समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए यह दिन स्वास्थ्य और समृद्धि दोनों से जुड़ा है। सोना-चांदी, नए बर्तन या कोई भी धातु की वस्तु खरीदना शुभ माना जाता है — यह घर में स्थायी समृद्धि लाने का प्रतीक है। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर यमराज के नाम का “यम दीपक” भी रखा जाता है, जो अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना का प्रतीक है।

नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)

7 नवंबर को नरक चतुर्दशी, जिसे “छोटी दिवाली” या “रूप चौदस” भी कहा जाता है, भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध और 16,000 बंदी स्त्रियों की मुक्ति के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। इस दिन सूर्योदय से पहले उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है, जिसे “अभ्यंग स्नान” कहते हैं — यह शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। घर के हर कोने में छोटे दीये जलाए जाते हैं ताकि कोई भी अंधेरा कोना नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित न करे।

लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि

  • घर की सफाई: सूर्यास्त से पहले पूरा घर साफ कर लें — कहा जाता है कि लक्ष्मी अस्वच्छ, अंधेरे घर में प्रवेश नहीं करतीं
  • वेदी सजाना: लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति/तस्वीर साथ में रखें — गणेश जी को पहले पूजकर बाधाएं दूर की जाती हैं
  • दीये जलाना: पूरे घर में, खासकर द्वार और खिड़कियों पर दीये जलाएं ताकि लक्ष्मी को घर तक का रास्ता दिखे
  • अर्पण: कुमकुम, चावल, फूल, मिठाई अर्पित करें; वेदी के पास सिक्के या थोड़ी नकदी रखें जो धन का प्रतीक है
  • मंत्र जाप: “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें, फिर पूरे परिवार के साथ आरती करें
  • दीये जलते रहें: जहां संभव हो, रात भर दीये जलते रहने दें — अखंड ज्योति को लक्ष्मी की स्थायी उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है
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गोवर्धन पूजा और अन्नकूट

9 नवंबर को गोवर्धन पूजा मनाई जाती है — यह भगवान कृष्ण द्वारा इंद्र के प्रकोप से गांववासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से जुड़ी है। इस दिन गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीकात्मक रूप बनाया जाता है और अन्नकूट — यानी अनेक प्रकार की सब्ज़ियों और व्यंजनों का भोग — भगवान को अर्पित किया जाता है। यह दिन प्रकृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी प्रतीक है।

भाई दूज — भाई-बहन के प्रेम का पर्व

11 नवंबर को भाई दूज मनाया जाएगा — यह रक्षाबंधन जैसा ही भाई-बहन के स्नेह का पर्व है, लेकिन इसकी परंपरा अलग है। बहनें भाई को तिलक लगाकर आरती करती हैं और उनकी लंबी उम्र व सुखी जीवन की कामना करती हैं, बदले में भाई उपहार देते हैं। मान्यता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे, इसलिए इसे “यम द्वितीया” भी कहा जाता है।

लक्ष्मी पूजा थाली में दीया जलाती महिला
लक्ष्मी पूजा की थाली सजाकर दीया प्रज्वलित करने की परंपरा

राशि अनुसार दिवाली पूजा और उपाय

दिवाली धन-समृद्धि का पर्व है, और हर राशि के लिए धन-योग मजबूत करने के अलग उपाय बताए जाते हैं:

  • मेष: लाल वस्त्र पहनकर पूजा करें, हनुमान चालीसा का पाठ लाभकारी — तांबे के दीये जलाएं
  • वृषभ: लक्ष्मी पूजा में सफेद मिठाई और चांदी के सिक्के का प्रयोग शुभ — घर में सफेद फूल सजाएं
  • मिथुन: हरे वस्त्र में पूजा करें, गणेश पूजन विशेष रूप से फलदायी
  • कर्क: चांदी के बर्तन में जल भरकर पूजा करें — चंद्रमा से जुड़ी वस्तुएं शुभ मानी जाती हैं
  • सिंह: सूर्य को जल अर्पण के बाद पूजा शुरू करें, सोने के आभूषण धारण करना शुभ
  • कन्या: हरी इलायची और मिश्री का भोग अर्पित करें — बुध ग्रह को मजबूत करता है
  • तुला: इत्र और सफेद फूलों से पूजा सजाएं — शुक्र ग्रह की कृपा के लिए शुभ
  • वृश्चिक: लाल चंदन का तिलक लगाकर पूजा करें — मंगल ग्रह मजबूत होगा
  • धनु: पीले वस्त्र और केसर मिश्रित मिठाई का भोग शुभ
  • मकर: तिल के तेल का दीपक जलाएं — शनि ग्रह से जुड़ी वस्तुएं शुभ मानी जाती हैं
  • कुंभ: नीले या बैंगनी वस्त्र पहनकर पूजा करें, दान-पुण्य विशेष फलदायी
  • मीन: पीले वस्त्र में पूजा करें, गुरु ग्रह से जुड़ी वस्तुओं का दान शुभ

ये सुझाव सामान्य राशि-स्वभाव पर आधारित हैं — आपकी व्यक्तिगत कुंडली में चंद्र राशि, लग्न और वर्तमान दशा के अनुसार अधिक सटीक और व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिल सकता है।

दीये, पटाखे और सजगता — सुरक्षित दिवाली मनाने की बातें

दिवाली की खुशियों के साथ कुछ ज़रूरी सावधानियां भी याद रखनी चाहिए — ये न ज्योतिष का विषय हैं, न परंपरा के खिलाफ, बल्कि सामान्य समझदारी है जो अक्सर उत्सव के जोश में भुला दी जाती है:

  • दीये और मोमबत्तियां हमेशा किसी स्थिर, गैर-ज्वलनशील सतह पर रखें — पर्दों, कागज़ की सजावट या सूखे फूलों के पास कभी नहीं
  • पटाखे जलाते समय पानी की बाल्टी पास रखें, बच्चों की निगरानी करें, और सोसाइटी/इलाके के तय समय-सीमा का ध्यान रखें
  • बुज़ुर्गों, अस्थमा या सांस की समस्या वाले लोगों और पालतू जानवरों का ध्यान रखें — धुएं और तेज़ आवाज़ से उन्हें दूर रखना बेहतर है
  • दीयों में तेल की जगह पानी न डालें और जलते दीये को कभी अकेला न छोड़ें, खासकर छोटे बच्चों वाले घरों में
  • पर्यावरण के प्रति सजग रहकर कम प्रदूषण वाले पटाखों या सिर्फ दीये-रोशनी से उत्सव मनाना भी उतना ही शुभ है — परंपरा भावना में है, मात्रा में नहीं

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. दिवाली 2026 में किस दिन है?
रविवार, 8 नवंबर 2026 को — कार्तिक अमावस्या की रात लक्ष्मी पूजा के साथ।

2. लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ समय क्या है?
शाम 6:29 बजे से रात 8:29 बजे तक (प्रदोष काल) — ज़्यादातर घरों में यही समय पसंद किया जाता है।

3. धनतेरस और छोटी दिवाली में क्या अंतर है?
धनतेरस (6 नवंबर) सोना-बर्तन खरीदने और धन्वंतरि पूजा का दिन है; छोटी दिवाली/नरक चतुर्दशी (7 नवंबर) नरकासुर पर कृष्ण की विजय और अभ्यंग स्नान का दिन है।

4. भाई दूज दिवाली के अगले दिन क्यों नहीं है?
इस साल द्वितीया तिथि 11 नवंबर को लग रही है, इसलिए भाई दूज गोवर्धन पूजा के 2 दिन बाद मनाया जाएगा। स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

5. क्या दिवाली 2026 के आसपास कोई ग्रहण है?
नहीं। 2026 के दोनों सूर्य ग्रहण (17 फरवरी, 12 अगस्त) और दोनों चंद्र ग्रहण (3 मार्च, 28 अगस्त) दिवाली से महीनों दूर हैं — किसी भी मुहूर्त पर सूतक का असर नहीं पड़ेगा।

6. लक्ष्मी पूजा में कौन सा मंत्र जपना चाहिए?
“ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” — इसे 108 बार जपना पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है, साथ में गणेश मंत्र से पूजा शुरू करना बाधाएं दूर करता है।

सारांश

  • दिवाली 2026: धनतेरस 6 नवंबर से भाई दूज 11 नवंबर तक — मुख्य लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर को
  • लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 6:29-8:29 बजे (प्रदोष काल) या मध्यरात्रि निशिता काल
  • 2026 में दिवाली के आसपास कोई ग्रहण नहीं — सभी मुहूर्त बिना किसी रुकावट के मान्य
  • लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि: सफाई, वेदी-सजावट, दीये, अर्पण, मंत्र जाप और आरती के क्रम में करें
  • राशि अनुसार वस्त्र-रंग और उपाय चुनकर पूजा को अधिक व्यक्तिगत और फलदायी बनाया जा सकता है
  • उत्सव के साथ दीये और पटाखों में सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही ज़रूरी है

निष्कर्ष

दिवाली सिर्फ एक रात की पूजा नहीं, बल्कि 5 दिनों की एक पूरी यात्रा है — धन्वंतरि की स्वास्थ्य-कामना से शुरू होकर, नरकासुर पर विजय, लक्ष्मी-गणेश की कृपा, गोवर्धन की कृतज्ञता, और भाई-बहन के प्रेम तक। हमारी कोशिश यही रहती है कि आपको सही तारीख, सही मुहूर्त और सही जानकारी एक ही जगह मिल जाए। इस दिवाली अपने घर को रोशन करें, अपनों के साथ समय बिताएं, और अगर व्यक्तिगत मार्गदर्शन चाहिए तो हमारी निःशुल्क कुंडली रिपोर्ट ज़रूर देखें।

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Ajit Kumar Nath
Lekhak: Ajit Kumar Nath

Ajit Kumar Nath — AstroVgyaan ke sansthapak aur research lead. Inka vishwas hai ki gyan ka asli uddeshya seva hai — isliye inka kaam kabhi bhi vyaktigat consultation ya paid sessions tak simit nahi raha. Vedic Jyotish (Parashari Hora Shastra, Jaimini Sutram, Bhrigu Nandi Nadi), Lal Kitab, Vastu Shastra aur Ank Jyotish (Numerology) par varshon ka swatantra adhyayan aur shodh karke, unhe saral, imandaar aur research-aadharit lekhon ke roop mein sabke liye free upalabdh karana — yahi inka jeevan-uddeshya hai. Research aur collaboration ke liye: astrovgyaan@gmail.com

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