

आज 29 जून 2026 है — ज्येष्ठ पूर्णिमा का वह पावन दिन, जिसे पूरे भारत में पवित्र स्नान पूर्णिमा, देव स्नान पूर्णिमा या स्नान यात्रा के नाम से जाना जाता है। पुरी के श्री जगन्नाथ धाम में आज लाखों भक्तों की आँखें उस क्षण की प्रतीक्षा में हैं, जब महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और माँ सुभद्रा स्नान बेदी पर विराजमान होकर 108 कलशों के पवित्र जल से अभिषिक्त होंगे।
यह पर्व सिर्फ एक स्नान उत्सव नहीं है — यह भगवान के जन्मदिन का उत्सव है, शुद्धि का उत्सव है, और भक्त एवं भगवान के बीच उस दिव्य संबंध का उत्सव है जो जगन्नाथ संस्कृति की रीढ़ है। इस लेख में हम जानेंगे — इस पर्व की पूरी कथा, ज्योतिषीय महत्व, शास्त्र वचन, घर में पूजा विधि और वे रहस्य जो इसे साल के सबसे विशेष तिथियों में से एक बनाते हैं।
⏰ पवित्र स्नान पूर्णिमा 2026 — शुभ मुहूर्त
| तिथि | 29 जून 2026, सोमवार |
| पूर्णिमा आरंभ | 29 जून, रात्रि 3:06 बजे |
| पूर्णिमा समाप्ति | 30 जून, प्रातः 5:26 बजे |
| सूर्योदय | प्रातः 5:48 बजे |
| चंद्रोदय | संध्या 7:02 बजे |
| स्नान का शुभ समय | ब्रह्म मुहूर्त 4:10–5:00 बजे तक |
पवित्र स्नान पूर्णिमा क्या है — मूल परिचय
ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को देव स्नान पूर्णिमा कहते हैं। यह वह तिथि है जब ओडिशा के पुरी धाम में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन — इन सभी विग्रहों को गर्भगृह से बाहर निकालकर स्नान बेदी (स्नान मंच) पर विराजित किया जाता है।
स्कंद पुराण के अनुसार, यह भगवान जगन्नाथ का जन्मदिन है। राजा इंद्रद्युम्न ने जब पहली बार जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियाँ स्थापित कीं, तब पहली बार इस महाभिषेक का आयोजन किया गया था। तब से यह परंपरा अनवरत चली आ रही है।
यह पर्व साल में एकमात्र वह अवसर है जब भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को खुले आकाश के नीचे दर्शन देते हैं। मान्यता है कि इस दिन महाप्रभु का एक दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं।
स्नान यात्रा — पाहंडी से स्नान बेदी तक की दिव्य यात्रा
पवित्र स्नान पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल पुरी मंदिर में एक अद्भुत दृश्य उपस्थित होता है — पाहंडी जुलूस। इसमें पुजारी और सेवक बारी-बारी से विग्रहों को धीरे-धीरे झुलाते हुए — मानो वे स्वयं चल रहे हों — रत्न सिंहासन से स्नान बेदी तक लाते हैं। इस पूरी यात्रा में ढोल, नगाड़े, शंख और भजन-कीर्तन का नाद गूंजता रहता है।
स्नान बेदी पर विराजित होने के बाद अभिषेक शुरू होता है। मंदिर के उत्तरी कुएं से 108 कलशों में पवित्र जल खींचा जाता है। यह जल सामान्य नहीं होता — इसमें चंदन, हल्दी, सुगंधित पुष्प और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ मिलाई जाती हैं। वेद मंत्रों के उच्चारण के बीच यह 108 कलश एक-एक करके भगवान पर अर्पित किए जाते हैं।
108 का रहस्य — ज्योतिष और वेद का अद्भुत संगम
अभिषेक में 108 कलश क्यों? यह संख्या यूँ ही नहीं चुनी गई। वैदिक ज्योतिष और खगोल विद्या में 108 एक दिव्य संख्या है:
- 12 राशियाँ × 9 ग्रह = 108 — यानी समस्त सृष्टि का प्रतीक
- पृथ्वी से सूर्य की दूरी सूर्य के व्यास की लगभग 108 गुना है
- पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी चंद्रमा के व्यास की लगभग 108 गुना है
- माला में 108 दाने होते हैं — यह एक पूर्ण जप-चक्र का प्रतीक है
- विष्णु सहस्रनाम में 108 नाम समूहों में विभाजित हैं
इसलिए 108 कलशों से भगवान को स्नान कराने का अर्थ है — समस्त ब्रह्मांड की ओर से, समस्त लोकों की ओर से, भगवान को नमन और अभिषेक अर्पण करना।
हाती बेश — गजानन के रूप में दर्शन
स्नान के उपरांत एक अत्यंत दुर्लभ और विशेष दर्शन होता है — हाती बेश (गज बेश)। अभिषेक के पश्चात भगवान जगन्नाथ और बलभद्र को हाथी का मुकुट और आभूषण पहनाए जाते हैं, जो उन्हें भगवान गणेश का स्वरूप देता है। इस दिव्य रूप के दर्शन वर्ष में सिर्फ एक बार होते हैं।
धर्मशास्त्र कहता है कि गजानन (हाथी) विघ्न-विनाशक हैं, और जगन्नाथ इस रूप में अपने भक्तों की समस्त बाधाएं दूर करने का संकल्प लेते हैं।
अनासरा — देवों का 15 दिन का एकांत
स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के लिए एकांत में चले जाते हैं। इस काल को अनासरा कहते हैं। मान्यता है कि इतने बड़े अभिषेक के बाद भगवान को बुखार आ जाता है — ठीक वैसे ही जैसे कोई इंसान अत्यधिक जल में भीगने के बाद अस्वस्थ हो जाता है।
इस काल में राज वैद्य द्वारा आयुर्वेदिक पंचन के माध्यम से भगवान का उपचार होता है। भक्तों के लिए मंदिर में प्रवेश बंद रहता है, और तीन विशेष पट्टचित्र चित्र (अनासर पट्टी) प्रदर्शित किए जाते हैं। अनासरा काल में जो भक्त पुरी आते हैं, वे अलारनाथ मंदिर में दर्शन करते हैं।
और अनासरा के ठीक बाद आता है रथ यात्रा का महापर्व। स्नान पूर्णिमा दरअसल रथ यात्रा का शुभ प्रस्तावना है।
शास्त्र क्या कहता है — स्कंद पुराण का वचन
श्लोक (स्कंद पुराण — उत्कल खंड):
“ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे पूर्णिमायां तु सर्वदा।
स्नानयात्रा महोत्सवः जगन्नाथस्य कीर्त्यते॥
यः पश्यति महाप्रभुं स्नान बेद्यां सुशोभितम्।
स मुच्यते सर्वपापैः जन्मकोटि समुद्भवैः॥”
अर्थ: ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को सदा जगन्नाथ की स्नान यात्रा का महोत्सव होता है। जो व्यक्ति स्नान बेदी पर सुशोभित महाप्रभु के दर्शन करता है, वह करोड़ों जन्मों के पापों से मुक्त हो जाता है।
स्रोत: स्कंद पुराण, उत्कल खंड
श्लोक (विष्णु पुराण):
“पूर्णिमायां स्नानं कृत्वा विष्णुं संपूज्य भक्तितः।
सर्वान् कामान् अवाप्नोति मोक्षं च परमं व्रजेत्॥”
अर्थ: पूर्णिमा को स्नान करके भक्तिभाव से विष्णु का पूजन करने पर मनुष्य समस्त मनोकामनाएं प्राप्त करता है और अंततः मोक्ष को प्राप्त होता है।
स्रोत: विष्णु पुराण
ज्येष्ठ पूर्णिमा का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र में हर पूर्णिमा का अपना विशेष स्वभाव होता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व इसलिए अतिरिक्त है:
सूर्य मिथुन राशि में: ज्येष्ठ माह में सूर्य मिथुन राशि में होता है — ज्ञान, संचार और विद्या की राशि। इस काल में किए गए आध्यात्मिक कार्य और जप दीर्घकाल तक फलदायी होते हैं।
पूर्णिमा का चंद्रमा: पूर्ण चंद्रमा मन की चरम अवस्था का प्रतीक है। जल तत्व का सबसे अधिक प्रभाव होता है — इसीलिए इस दिन गंगा स्नान, नदी स्नान या पवित्र जल से स्नान का विशेष महत्व है।
चंद्र-जल संबंध: वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा और जल का गहरा संबंध है। ज्येष्ठ पूर्णिमा को जब चंद्रमा पूर्ण होता है, तो जल-तत्व की शुद्धि क्षमता अपने चरम पर होती है। यही कारण है कि इस दिन स्नान को इतना महत्व दिया गया है।
🔭 ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिन क्या करें?
- विष्णु मंत्र जप: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” — कम से कम 108 बार
- चंद्रमा का अर्घ्य: रात को उगते चंद्र को जल अर्पण
- जल-दान: किसी जरूरतमंद को शीतल जल या शरबत
- चंद्र ग्रह शांति: यदि कुंडली में चंद्र कमजोर है, तो इस पूर्णिमा पर चंद्र मंत्र विशेष फलदायी
घर में ज्येष्ठ पूर्णिमा — पूजा विधि
प्रातःकाल की पूजा
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें (आज लगभग 4:10 बजे)
- पवित्र स्नान: नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल, तुलसी पत्र और तिल मिलाएं। मन में संकल्प लें।
- घर की सफाई: घर को शुद्ध करें, पूजा स्थल को गंगाजल से साफ करें।
- भगवान विष्णु/जगन्नाथ की पूजा: तुलसी पत्र, पीले फूल, पंचामृत, नैवेद्य चढ़ाएं।
- दीप और धूप जलाएं, विष्णु सहस्रनाम या जगन्नाथ अष्टकम का पाठ करें।
संध्याकाल की पूजा — चंद्र दर्शन
आज चंद्रोदय 7:02 बजे होगा। उगते चंद्र को अर्घ्य दें — ताँबे के लोटे में जल, दूध, अक्षत और कुमकुम मिलाकर अर्पण करें। चंद्र मंत्र बोलें:
“ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः”
चंद्र मंत्र — मन की शांति, स्मरण शक्ति और भावनात्मक स्थिरता के लिए
पूजा सामग्री सूची
| सामग्री | उद्देश्य |
|---|---|
| गंगाजल | शुद्धि और पवित्रता |
| तुलसी पत्र | विष्णु को अत्यंत प्रिय |
| पीले फूल (गेंदा) | विष्णु और बृहस्पति का रंग |
| पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) | अभिषेक |
| चंदन | शीतलता और सुगंध |
| खीर या सफेद मिठाई | चंद्रमा का प्रसाद |
| दीपक (घी का) | प्रकाश और जागृति |
| सफेद वस्त्र | पवित्रता का प्रतीक |
वट पूर्णिमा व्रत — सुहागन स्त्रियों का व्रत
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट पूर्णिमा व्रत भी मनाया जाता है — विशेषकर महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर भारत में। यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए करती हैं।
इस व्रत में वट (बरगद) वृक्ष की पूजा होती है। सावित्री ने इसी वट वृक्ष के नीचे बैठकर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लिए थे। इसलिए इस दिन सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना और वट वृक्ष की परिक्रमा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
आपकी कुंडली और यह पूर्णिमा
यदि आप जानना चाहते हैं कि यह पूर्णिमा आप पर क्या प्रभाव डालती है, तो कुछ बातें ध्यान में रखें:
चंद्रमा की स्थिति जाँचें: आपकी कुंडली में चंद्रमा किस भाव में है? यदि पूर्णिमा का चंद्र आपके लग्न, चतुर्थ, नवम या दशम भाव में आता है, तो यह पूर्णिमा विशेष शुभ है। अपनी निःशुल्क कुंडली यहाँ बनाएं →
चंद्र महादशा: यदि इस समय आपकी चंद्र महादशा चल रही है, तो इस पूर्णिमा पर चंद्र मंत्र जप और स्नान-दान विशेष लाभकारी होगा।
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आम भ्रांतियाँ — सच्ची बात
| ❌ भ्रांति | ✅ सच |
|---|---|
| “पुरी जाए बिना फल नहीं मिलता” | घर में भी पूर्ण श्रद्धा से स्नान, पूजा और दान करने पर समान फल मिलता है। |
| “यह सिर्फ ओडिशा का त्योहार है” | स्कंद पुराण में ज्येष्ठ पूर्णिमा को समस्त हिंदुओं के लिए पवित्र माना गया है। |
| “अनासरा में दर्शन नहीं होते” | अलारनाथ मंदिर और पट्टचित्र दर्शन से भक्ति जारी रहती है। |
| “व्रत रखना अनिवार्य है” | स्नान, दान और पूजा ही मुख्य विधान हैं। व्रत वैकल्पिक है। |
इस पूर्णिमा की ऊर्जा का सदुपयोग — व्यावहारिक सुझाव
- माफ करें और माफी माँगें: पूर्णिमा भावनाओं की चरम अवस्था है। पुरानी गाँठें खोलने का यह सबसे अच्छा समय है।
- जल का दान करें: आज किसी को पानी पिलाएं, प्याऊ पर दान दें — यह चंद्र का श्रेष्ठ दान है।
- संकल्प लें: ज्येष्ठ पूर्णिमा नई शुरुआत का प्रतीक है। आज एक सकारात्मक संकल्प लें।
- ध्यान करें: पूर्णिमा रात्रि में खुले आसमान के नीचे 15-20 मिनट का ध्यान करें।
- श्वेत वस्त्र पहनें: चंद्रमा का रंग सफेद है — आज सफेद या हल्के रंग के वस्त्र शुभ हैं।
स्नान पूर्णिमा से रथ यात्रा तक — जगन्नाथ महोत्सव की कड़ी
- स्नान पूर्णिमा (आज, 29 जून): भगवान का महाभिषेक — जन्मदिन उत्सव
- अनासरा (15 दिन): भगवान का एकांत विश्राम और आयुर्वेदिक उपचार
- नेत्रोत्सव: रथ यात्रा से 1 दिन पहले भगवान की आँखें पुनः बनाई जाती हैं
- रथ यात्रा (जुलाई 2026): भारत का सबसे बड़ा रथ उत्सव — लाखों भक्तों की भागीदारी
अजित कुमार नाथ की कलम से
“स्नान पूर्णिमा हमें सिखाती है कि शुद्धि बाहर से नहीं, भीतर से होती है। जगन्नाथ का 108 कलशों से स्नान यह संदेश है कि हम भी अपने मन को — सारे संसार की ओर से, समस्त 12 राशियों और 9 ग्रहों की ऊर्जा को समेटकर — शुद्ध करने का संकल्प लें। यह पर्व भगवान का नहीं, हमारे स्वयं के पुनर्जन्म का उत्सव है।”
— अजित कुमार नाथ | वैदिक ज्योतिष विशेषज्ञ, AstroVgyaan | 25+ वर्षों का अनुभव
निष्कर्ष — पवित्र बनें, शुद्ध बनें
पवित्र स्नान पूर्णिमा 2026 का यह दिन — 29 जून, ज्येष्ठ पूर्णिमा — एक ऐसा क्षण है जब ब्रह्मांड की शक्तियाँ आपके पक्ष में होती हैं। भगवान जगन्नाथ का महाभिषेक, चंद्रमा की पूर्णता, और शास्त्रों का वरदान — यह त्रिवेणी संगम आपके जीवन में पवित्रता, शांति और नई शुरुआत लेकर आती है।
आज स्नान करें, दान करें, भजन करें — और मन में एक संकल्प लें कि आज से कुछ बेहतर करूंगा। बस यही इस पर्व की असली पूजा है।
जय जगन्नाथ! 🙏
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लेखक: अजित कुमार नाथ | वैदिक ज्योतिष विशेषज्ञ, AstroVgyaan | 25+ वर्षों का अनुभव

Ajit Kumar Nath — AstroVgyaan ke sansthapak aur research lead. Inka vishwas hai ki gyan ka asli uddeshya seva hai — isliye inka kaam kabhi bhi vyaktigat consultation ya paid sessions tak simit nahi raha. Vedic Jyotish (Parashari Hora Shastra, Jaimini Sutram, Bhrigu Nandi Nadi), Lal Kitab, Vastu Shastra aur Ank Jyotish (Numerology) par varshon ka swatantra adhyayan aur shodh karke, unhe saral, imandaar aur research-aadharit lekhon ke roop mein sabke liye free upalabdh karana — yahi inka jeevan-uddeshya hai. Research aur collaboration ke liye: astrovgyaan@gmail.com






