ज्योतिष ब्लॉग

मूलांक 1 नेतृत्व और सफलता
Ank Shastra Course

10.1 मूलांक 1 के साथ सभी भाग्यांक संयोजन + रतन टाटा केस स्टडी

क्या दो लोगों का मूलांक एक जैसा हो, फिर भी उनकी ज़िंदगी बिल्कुल अलग दिशा में क्यों चलती है? जवाब है — भाग्यांक। मूलांक आपके जन्म की तारीख के अंक से बनता है और यह बताता है कि आप अंदर से कैसे हैं, आपका मूल स्वभाव क्या है। भाग्यांक पूरी जन्मतारीख (दिन+महीना+वर्ष) से बनता है और यह बताता है कि जीवन आपको किस रास्ते पर ले जाएगा, कौनसी परिस्थितियाँ, कौनसे सबक आपके सामने आएंगे। एक ही मूलांक वाले दो व्यक्तियों का भाग्यांक अलग हो सकता है, और यही अंतर उनकी पूरी जीवन-यात्रा को अलग बना देता है। इस अध्याय से हम कोर्स के एक नए, गहरे मॉड्यूल में प्रवेश कर रहे हैं — जहाँ हम हर मूलांक को उसके सभी नौ संभावित भाग्यांक के साथ जोड़कर बारीकी से समझेंगे, और साथ में एक वास्तविक, सार्वजनिक रूप से जानी-मानी शख्सियत का केस स्टडी भी देखेंगे ताकि सिद्धांत सिर्फ किताबी न रहे, ज़िंदगी में उतरता हुआ दिखे। इस अध्याय की शुरुआत मूलांक 1 से हो रही है — अंक ज्योतिष का सबसे तेजस्वी, सबसे नेतृत्व-प्रधान अंक। मूलांक 1 का स्वामी सूर्य है, और सूर्य नवग्रहों का राजा माना जाता है। जिनका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 1 होता है। यह अंक आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, मौलिकता और स्वतंत्र सोच का प्रतीक है। मूलांक 1 वाले व्यक्ति स्वाभाविक रूप से आगे बढ़कर नेतृत्व संभालते हैं, नए रास्ते बनाते हैं, और किसी के पीछे चलने के बजाय खुद रास्ता तय करना पसंद करते हैं। लेकिन हर शक्ति के साथ एक चुनौती भी आती है — मूलांक 1 का सबसे बड़ा जोखिम है अहंकार, जिद्द और अकेले चलने की आदत, जो कभी-कभी टीम भावना और रिश्तों में दरार डाल सकती है। अब सवाल यह है — जब यह तेजस्वी मूलांक 1 अलग-अलग भाग्यांक के साथ मिलता है, तो हर बार एक नया मिश्रण बनता है। कहीं यह मिश्रण आग में घी डालने जैसा होता है, कहीं यह संतुलन लाता है, और कहीं यह आंतरिक संघर्ष पैदा करता है। नीचे मूलांक 1 के सभी नौ संभावित संयोजन विस्तार से दिए गए हैं। मूलांक 1 के साथ सभी 9 भाग्यांक संयोजन — गहन विश्लेषण यहाँ हर संयोजन के आगे यह भी बताया गया है कि वह ग्रह-संबंध की दृष्टि से मित्र है, सम (उदासीन) है या शत्रु — यह जानकारी मॉड्यूल 7 में दी गई मूलांक-स्वामी ग्रह तालिका पर आधारित है। मूलांक 1 – भाग्यांक 1 (स्व-अंक, दोहरी सूर्य ऊर्जा) जब मूलांक और भाग्यांक दोनों 1 हों, तो सूर्य की ऊर्जा दोगुनी हो जाती है। ऐसे व्यक्ति में नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास चरम पर होता है — ये जन्मजात नेता होते हैं, जो किसी की छाया में काम करना पसंद नहीं करते। उद्यमिता, स्टार्टअप, स्वतंत्र व्यवसाय इनके लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र हैं। लेकिन खतरा भी दोगुना है — अहंकार और जिद्द इतनी बढ़ सकती है कि रिश्ते और साझेदारियाँ टूट जाएँ। इस संयोजन वालों को सबसे बड़ा सबक यही सीखना है कि सुनना भी नेतृत्व का हिस्सा है, सिर्फ बोलना नहीं। मूलांक 1 – भाग्यांक 2 (मित्र संबंध, सूर्य-चंद्रमा) सूर्य और चंद्रमा का यह मेल नेतृत्व क्षमता और भावनात्मक संवेदनशीलता का सुंदर संतुलन बनाता है। ऐसा व्यक्ति कठोर निर्णय भी ले सकता है और लोगों की भावनाएँ भी समझ सकता है — यह दुर्लभ संयोजन है। राजनीति, जनसंपर्क, सामाजिक नेतृत्व, टीम प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में यह संयोजन बेहद कारगर सिद्ध होता है। चुनौती यह रहती है कि चंद्रमा के प्रभाव से मनोदशा (मूड) में उतार-चढ़ाव आ सकता है, जिसे संतुलित करना सीखना ज़रूरी है। मूलांक 1 – भाग्यांक 3 (मित्र संबंध, सूर्य-गुरु) इसे लगभग राजयोग जैसा संयोजन माना जाता है। सूर्य का नेतृत्व और गुरु का ज्ञान, नैतिकता व विस्तार-भाव मिलकर एक ऐसा व्यक्तित्व बनाते हैं जो न सिर्फ आगे बढ़ता है बल्कि दूसरों को भी सही राह दिखाता है। शिक्षा, कानून, परामर्श, बड़े संस्थानों का संचालन — इन क्षेत्रों में यह संयोजन असाधारण सफलता देता है। गुरु का प्रभाव मूलांक 1 की जिद्द को नरम करता है और विनम्रता बढ़ाता है, जिससे नेतृत्व और भी प्रभावशाली बनता है। मूलांक 1 – भाग्यांक 4 (चुनौतीपूर्ण संबंध, सूर्य-राहु) राहु की अस्थिर, अप्रत्याशित प्रकृति सूर्य की स्थिर राजसी ऊर्जा से टकराती है। इस संयोजन में महत्वाकांक्षा असीमित हो जाती है — व्यक्ति बहुत तेज़ी से ऊपर उठना चाहता है, और अक्सर उठ भी जाता है, खासकर तकनीक, नवाचार, डिजिटल क्षेत्रों में। लेकिन राहु का स्वभाव है अचानक उतार-चढ़ाव लाना, इसलिए जितनी तेज़ी से सफलता आती है, उतनी ही तेज़ी से चुनौती भी आ सकती है। इस संयोजन वालों के लिए धैर्य और शॉर्टकट से बचना सबसे ज़रूरी सबक है। मूलांक 1 – भाग्यांक 5 (सम संबंध, सूर्य-बुध) बुद्धि और नेतृत्व का यह मेल संचार, व्यापार, मीडिया और वाणिज्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट परिणाम देता है। तार्किक सोच तेज़ होती है, निर्णय क्षमता पैनी होती है, और व्यक्ति एक साथ कई विषयों को समझने में सक्षम होता है। कमी यह रहती है कि बुध का चंचल स्वभाव कई बार एक साथ बहुत सारी योजनाएँ शुरू करवा देता है, जिससे फोकस बिखर सकता है। एक समय में एक लक्ष्य पर टिके रहना इस संयोजन की सबसे बड़ी सीख है। मूलांक 1 – भाग्यांक 6 (शत्रु संबंध, सूर्य-शुक्र) यह संयोजन दिखने में बेहद आकर्षक होता है — नेतृत्व क्षमता में शुक्र की कलात्मकता, सौंदर्यबोध और वैभव जुड़ जाता है। बाहर से यह व्यक्ति भव्य और प्रभावशाली दिखता है, लेकिन भीतर एक सूक्ष्म द्वंद्व चलता रहता है — सूर्य का अनुशासन और संयम, शुक्र की भोग-विलास व आराम की चाहत से टकराता है। रिश्तों और साझेदारियों में घर्षण की संभावना रहती है। यह ज़रूरी नहीं कि शत्रु-ग्रह संयोजन असफलता लाए — आगे केस स्टडी में हम देखेंगे कि यही संयोजन कैसे असाधारण सफलता में बदल सकता है, बशर्ते आंतरिक संघर्ष को अनुशासन से साधा जाए। मूलांक 1 – भाग्यांक 7 (तटस्थ, सूर्य-केतु) यह एक अनोखा संयोजन है जहाँ सूर्य की भौतिक महत्वाकांक्षा, केतु के आध्यात्मिक वैराग्य से मिलती है। ऐसे व्यक्ति के भीतर गहरी सोच, अनुसंधान की प्रवृत्ति और रहस्यमय विषयों की तरफ स्वाभाविक रुझान होता है। सांसारिक सफलता इनके लिए ज़रूरी नहीं होती, कभी-कभी देर से आती है या इसमें रुचि

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8.5 पर्सनल ईयर नंबर — पूरी गाइड

कभी सोचा है कि कुछ साल आपके लिए नई शुरुआतों से भरे रहते हैं, तो कुछ साल सिर्फ मेहनत और धैर्य मांगते हैं, और कुछ साल में सब कुछ अचानक सिमटने और समाप्त होने लगता है? यह सिर्फ इत्तेफाक नहीं है। अंक ज्योतिष में हर व्यक्ति के जीवन का एक 9 वर्षीय चक्र चलता है, जिसमें हर साल की अपनी एक खास ऊर्जा होती है — इसे पर्सनल ईयर नंबर कहा जाता है। यह जानना कि आप अभी इस चक्र के किस पड़ाव पर हैं, आपको सही समय पर सही निर्णय लेने में सबसे बड़ी मदद कर सकता है। पर्सनल ईयर नंबर कैसे निकालें गणना विधि सरल है — अपने जन्म माह, जन्म दिन और वर्तमान वर्ष, तीनों को अलग-अलग एक अंक तक घटाकर आपस में जोड़ें, फिर परिणाम को फिर से एक अंक तक घटाएं। उदाहरण से समझें — मान लीजिए जन्मतिथि है 15 मार्च। जन्म माह मार्च यानी 3। जन्म दिन 15, घटाकर 1+5=6। अब वर्तमान वर्ष 2026 को घटाएं: 2+0+2+6=10, फिर 1+0=1। अब तीनों को जोड़ें: 3+6+1=10, फिर 1+0=1। इस व्यक्ति का 2026 में पर्सनल ईयर नंबर 1 हुआ — यानी नई शुरुआत का साल। ध्यान दें कि पर्सनल ईयर की गणना में उपयोग होने वाला “वर्तमान वर्ष” अंक अकेले भी महत्वपूर्ण है — इसे यूनिवर्सल ईयर नंबर कहा जाता है, जो पूरी दुनिया के लिए एक सामूहिक ऊर्जा दर्शाता है। 2026 का यूनिवर्सल ईयर नंबर 1 है (2+0+2+6=10, फिर 1+0=1), यानी यह पूरी दुनिया के लिए भी सामूहिक रूप से नई शुरुआत का वर्ष है। जब आपका पर्सनल ईयर नंबर यूनिवर्सल ईयर नंबर से मेल खाता है, तो उस अंक का प्रभाव और भी तीव्र होकर महसूस होता है। 9 वर्षीय चक्र की तीन अवस्थाएं — खेती के रूपक से समझें पर्सनल ईयर के 9 वर्षों को समझने का सबसे सरल तरीका है इसे एक किसान के खेत की तरह देखना। हर चक्र तीन अवस्थाओं से गुज़रता है, और हर अवस्था में तीन-तीन साल आते हैं। आरंभ अवस्था (वर्ष 1-3): वर्ष 1 में खेत के लिए ज़मीन चुनी जाती है और सपना बुना जाता है। वर्ष 2 में ज़मीन तैयार की जाती है, बीज बोने से पहले की प्रतीक्षा होती है। वर्ष 3 में बीज बोए जाते हैं और रचनात्मक अभिव्यक्ति का समय आता है। सुदृढ़ीकरण अवस्था (वर्ष 4-6): वर्ष 4 में सिंचाई और निराई-गुड़ाई की कड़ी मेहनत होती है। वर्ष 5 में अंकुर फूटने लगते हैं और अप्रत्याशित बदलाव आते हैं। वर्ष 6 में फसल पकने लगती है और घर-परिवार पर ध्यान केंद्रित होता है। फसल एवं विसर्जन अवस्था (वर्ष 7-9): वर्ष 7 में किसान पीछे हटकर फसल की गुणवत्ता जांचता है — यह चिंतन और विश्राम का समय है। वर्ष 8 में फसल मंडी ले जाई जाती है और भौतिक प्राप्ति होती है। वर्ष 9 में खेत को अगली बुवाई के लिए साफ किया जाता है — यह समापन और विसर्जन का समय है, जिसके बाद फिर से वर्ष 1 का नया चक्र शुरू होता है। यह चक्र इतना नियमित है कि जो व्यक्ति इसकी लय के साथ चलता है, वह हर साल का अधिकतम लाभ उठा पाता है, जबकि जो इसके विरुद्ध जाने की कोशिश करता है — जैसे वर्ष 9 में नई बड़ी शुरुआत करना, या वर्ष 1 में आराम की उम्मीद करना — उसे अक्सर निराशा हाथ लगती है। पर्सनल ईयर 1 से 9 तक — पूरा विवरण पर्सनल ईयर 1 — आरंभ: यह चक्र का सबसे महत्वपूर्ण साल है, क्योंकि जो अभी शुरू होगा वह आने वाले 9 वर्षों की दिशा तय करेगा। नई नौकरी, नया व्यवसाय, नया रिश्ता — यह सब शुरू करने का सही समय है। ऊर्जा और आत्मविश्वास उच्च रहता है, लेकिन बहुत सारे रास्ते एक साथ न पकड़ें — सोच-समझकर चुनें कि क्या शुरू करना है। पर्सनल ईयर 2 — सहयोग: वर्ष 1 की तेज़ी के बाद यह साल धैर्य और सहयोग मांगता है। रिश्तों में गहराई आती है, साझेदारियां बनती या मज़बूत होती हैं। देरी और छोटी बाधाएं आ सकती हैं — इन्हें जबरदस्ती धकेलने की बजाय धैर्य से संभालें, क्योंकि नीचे ही नीचे तैयारी चल रही होती है। पर्सनल ईयर 3 — अभिव्यक्ति: रचनात्मकता, सामाजिकता और खुशी का साल। अपने विचारों, कला और भावनाओं को खुलकर व्यक्त करने का समय। पुराने अनसुलझे मुद्दे भावनात्मक रूप से सतह पर आ सकते हैं। सबसे बड़ा जोखिम है ऊर्जा को बहुत सारी दिशाओं में बिखेर देना। पर्सनल ईयर 4 — परिश्रम: अनुशासन, संगठन और ठोस नींव बनाने का साल। करियर, घर, स्वास्थ्य और वित्त में स्थिरता लाने के लिए मेहनत करनी होगी। यह साल भारी लग सकता है, लेकिन इसमें की गई मेहनत आगे के सभी वर्षों की बुनियाद बनती है। कोई शॉर्टकट या अचानक बड़ा बदलाव इस साल उपयुक्त नहीं। पर्सनल ईयर 5 — परिवर्तन: वर्ष 4 की कड़ी मेहनत के बाद अचानक बदलाव, यात्रा और स्वतंत्रता का साल आता है। व्यक्तिगत आज़ादी अपने चरम पर होती है। पुरानी दिनचर्या से बाहर निकलने और नए क्षेत्रों में कदम रखने का समय। ध्यान रहे कि इस साल शुरू हुई चीज़ें हमेशा स्थायी नहीं होतीं। पर्सनल ईयर 6 — समायोजन: घर, परिवार और ज़िम्मेदारी पर ध्यान केंद्रित होता है। प्रेम, सेवा और करीबी रिश्तों में तालमेल बिठाने का साल। घर खरीदने या घर को सुंदर बनाने के लिए यह ऊर्जा विशेष रूप से अनुकूल मानी जाती है। सेवाभाव रखें, पर हर किसी को अनचाही सलाह देने से बचें। पर्सनल ईयर 7 — विश्राम: ऊर्जा भीतर की ओर मुड़ती है। आराम, चिंतन, अध्ययन और आत्म-सुधार का साल। यह आंतरिक विकास के लिए उत्तम समय है, बाहरी सामाजिक या भौतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए नहीं। जो लोग निःस्वार्थ भाव से आंतरिक शांति खोजते हैं, वे इस साल गहरी संतुष्टि पाते हैं। पर्सनल ईयर 8 — फसल: भौतिक उपलब्धि के चरम का साल। शक्ति, धन और अधिकार से जुड़े परिणाम सामने आते हैं — लंबित प्रमोशन, पुरस्कार या लाभ मिल सकते हैं, पर बड़ी हानि की संभावना भी रहती है। यह कर्म और संतुलन का अंक है, इसलिए विनम्रता बनाए रखना ज़रूरी है। पर्सनल ईयर 9 — समापन: चक्र का अंतिम और समापन वर्ष। कुछ भी नया शुरू न करें — इसके बजाय अधूरे कामों को पूरा करें, जो खत्म हो

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8.4 शुभ तारीख चुनना — अंक ज्योतिष से मुहूर्त

पंडित जी से मुहूर्त पूछने से पहले भी आप खुद अंकों की भाषा में एक शुरुआती जांच कर सकते हैं — क्या यह तारीख वाकई आपके लिए ऊर्जावान है? अब तक हमने मोबाइल, वाहन और घर के नंबर देखे। अब बारी है समय की — क्योंकि हर शुभ कार्य सिर्फ किस दिशा में या किस वस्तु के साथ हो, यह ही नहीं, बल्कि किस तारीख को हो, यह भी उतना ही मायने रखता है। अंक ज्योतिष में हर तारीख का भी अपना एक कंपन (अंक) होता है, और यह कंपन आपके मूलांक-भाग्यांक से मेल खाकर उस दिन को खास बना सकता है। तारीख का अंक कैसे निकालें तारीख की गणना विधि भी वही परिचित तरीका है जो हमने अब तक हर जगह इस्तेमाल किया है — पूरी तारीख (दिनांक+महीना+वर्ष) के सभी अंकों को जोड़कर एक अंक तक घटाना। उदाहरण से समझें — मान लीजिए संभावित तारीख है 26 जनवरी 2027। दिन 26, महीना 01, वर्ष 2027। जोड़: 2+6+0+1+2+0+2+7=20, फिर 2+0=2। इस तारीख का अंक 2 हुआ। इसी तरह कोई भी तारीख जांची जा सकती है, चाहे वह विवाह की हो, गृह प्रवेश की हो, व्यवसाय शुरू करने की हो या यात्रा आरंभ करने की। एक ज़रूरी बात ध्यान रखें — यह विधि केवल “तारीख का अंक” देती है, यानी दिन-महीने-वर्ष का सामूहिक कंपन। इसके अतिरिक्त सिर्फ “दिन” (जैसे 26) का भी अपना एक स्वतंत्र अंक होता है (2+6=8), जिसे कुछ परंपराओं में अधिक महत्व दिया जाता है क्योंकि यह उस दिन विशेष की ऊर्जा को दर्शाता है। संपूर्ण विश्लेषण के लिए दोनों को साथ में देखना बेहतर रहता है। मूलांक 1 से 9 तक — तारीख पर प्रभाव हर तारीख अंक अपनी अलग ऊर्जा लेकर आता है, जो अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग रूप से फलदायी होती है। तारीख अंक 1 (स्वामी सूर्य): नई शुरुआत, नेतृत्व और आत्मविश्वास का दिन। व्यवसाय शुभारंभ, नई नौकरी जॉइन करने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए उत्तम। तारीख अंक 2 (स्वामी चंद्रमा): भावनात्मक जुड़ाव और सहयोग का दिन। सगाई, पारिवारिक समारोह और साझेदारी की शुरुआत के लिए अनुकूल। तारीख अंक 3 (स्वामी गुरु): ज्ञान, विस्तार और सौभाग्य का दिन। विवाह, शिक्षा आरंभ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। तारीख अंक 4 (स्वामी राहु): अस्थिरता का दिन। महत्वपूर्ण शुभ कार्यों के लिए सामान्यतः टाला जाता है, विशेषकर विवाह और गृह प्रवेश जैसे स्थायी निर्णयों के लिए। तारीख अंक 5 (स्वामी बुध): गति और संचार का दिन। यात्रा आरंभ, व्यापारिक सौदे और संचार से जुड़े कार्यों के लिए अनुकूल। तारीख अंक 6 (स्वामी शुक्र): सुख, सौंदर्य और प्रेम का दिन। विवाह के लिए परंपरागत रूप से सबसे शुभ तारीखों में गिना जाता है, साथ ही गृह प्रवेश के लिए भी उत्तम। तारीख अंक 7 (स्वामी केतु): आध्यात्मिकता और चिंतन का दिन। पूजा-पाठ, तीर्थ यात्रा और आत्मनिरीक्षण से जुड़े कार्यों के लिए उपयुक्त, लेकिन सामाजिक उत्सवों के लिए आदर्श नहीं माना जाता। तारीख अंक 8 (स्वामी शनि): मेहनत और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का दिन। मिश्रित परिणाम देने वाला माना जाता है — गंभीर, दीर्घकालिक प्रतिबद्धता वाले कार्यों (जैसे बड़ा निवेश) के लिए ठीक, पर उत्सव और उल्लास वाले कार्यों के लिए कम उपयुक्त। तारीख अंक 9 (स्वामी मंगल): साहस और समापन का दिन। किसी चरण के समापन, बड़े साहसिक निर्णय और शक्ति-प्रदर्शन वाले कार्यों के लिए अनुकूल, लेकिन नई शुरुआत के लिए मिश्रित फल देने वाला माना जाता है क्योंकि यह अंक अंत और पूर्णता का प्रतीक है। तारीख के अंक को अपने मूलांक-भाग्यांक से मिलाना अकेले तारीख का अंक देखना काफी नहीं है — असली उपयोगिता तब सामने आती है जब उसे कार्य से जुड़े मुख्य व्यक्ति (जैसे विवाह में दूल्हा-दुल्हन दोनों, व्यवसाय में मालिक) के मूलांक-भाग्यांक से मिलाया जाए। मॉड्यूल 7 और 8 में इस्तेमाल की गई वही ग्रह-मैत्री तालिका यहां भी काम आती है। मूलांक स्वामी ग्रह मित्र अंक सम (उदासीन) अंक शत्रु अंक 1 सूर्य 2, 3, 9 5 6, 8 2 चंद्रमा 1, 5 3, 6, 8, 9 कोई नहीं 3 गुरु 1, 2, 9 8 5, 6 4 राहु 5, 6, 8 3 1, 2, 9 5 बुध 1, 6 3, 8, 9 2 6 शुक्र 5, 8 3, 9 1, 2 7 केतु 1, 2, 3 6, 8 5 8 शनि 5, 6 3 1, 2, 9 9 मंगल 1, 2, 3 6, 8 5 विवाह के लिए मिलान नियम: जब दो लोगों की तारीख चुननी हो, तो तारीख का अंक दोनों वर-वधू के मूलांक और भाग्यांक — चारों में से किसी के भी शत्रु न होना चाहिए। जितने अधिक मित्र भाव बनें, तारीख उतनी ही शुभ मानी जाती है। उदाहरण से समझें — मान लीजिए विवाह के लिए दो तारीखें विचाराधीन हैं — 15 फरवरी 2027 और 21 फरवरी 2027। वर का मूलांक 3 और भाग्यांक 6 है, वधू का मूलांक 1 और भाग्यांक 9 है। पहली तारीख का अंक: 1+5+0+2+2+0+2+7=19, फिर 1+9=10, फिर 1+0=1। दूसरी तारीख का अंक: 2+1+0+2+2+0+2+7=16, फिर 1+6=7। अब तालिका देखें — अंक 1, वर के मूलांक 3 का मित्र है, वर के भाग्यांक 6 का शत्रु है, वधू के मूलांक 1 से स्वाभाविक रूप से मेल खाता है, और वधू के भाग्यांक 9 का मित्र है। यानी अंक 1 केवल एक जगह शत्रु भाव दिखाता है। दूसरी ओर अंक 7 वर के मूलांक 3 का मित्र है, वर के भाग्यांक 6 का शत्रु है, वधू के मूलांक 1 का मित्र है, और वधू के भाग्यांक 9 का सम है — यहां भी एक ही शत्रु भाव है। दोनों तारीखें लगभग समान रूप से मिश्रित फल देती हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में परिवार पारंपरिक पंचांग-आधारित मुहूर्त (तिथि, नक्षत्र, वार) को निर्णायक कारक मानकर आगे बढ़ सकता है। अलग-अलग अवसरों के लिए तारीख चयन हर अवसर की प्रकृति अलग होती है, इसलिए तारीख चुनते समय उस अवसर के स्वभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए। विवाह: वर-वधू दोनों के मूलांक-भाग्यांक से मित्र या सम भाव रखने वाली तारीख देखें, और साथ ही तारीख अंक 6, 3 या 1 को प्राथमिकता दें, जो परंपरागत रूप से वैवाहिक सुख के लिए शुभ माने जाते हैं। गृह प्रवेश: घर के मुखिया के मूलांक-भाग्यांक से मेल खाने वाली तारीख देखें। तारीख अंक 6 (शुक्र) और 3

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💬 Jyotish Prashan Poochein
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⚠️ Rahukaal:

⭐ पाठकों के अनुभव

AstroVgyaan पाठक क्या कहते हैं

★★★★★

"Ajit ji ke articles पढ़়कर पहली बार Jyotish समष् में आयी। Shani ki Dasha का विश्लेषण इतना सरल आर सटीक था कि मुष्े अपने जीवन की घटनाएं समष् में आइं।"

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Rahul Sharma
📍 Delhi
★★★★★

"Vedic Jyotish ke baare mein itni gehri jaankari Hindi mein kahin nahi mili. Kundali ke 12 bhaavon ka explanation bahut clear tha."

P
Priya Gupta
📍 Lucknow
★★★★★

"Graha Dasha calculator bahut upyogi hai. Mujhe pata chala ki agle 3 saal mein kaun si Dasha chal rahi hai aur uska prabhav kya hoga."

A
Amit Tiwari
📍 Varanasi
★★★★★

"Ajit ji ka 6 saal ka anubhav saaf dikhta hai unke articles mein. Shani Mahadasha ke baare mein jo unhone likha, wo mere jeevan se bilkul match karta tha."

S
Sunita Devi
📍 Patna
★★★★★

"Nakshatra aur unke fal ke baare mein jo series hai wo adbhut hai. Mere Nakshatra Rohini ke baare mein jo likha, wo 100% sahi tha."

M
Manish Verma
📍 Jaipur
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