
पंडित जी से मुहूर्त पूछने से पहले भी आप खुद अंकों की भाषा में एक शुरुआती जांच कर सकते हैं — क्या यह तारीख वाकई आपके लिए ऊर्जावान है? अब तक हमने मोबाइल, वाहन और घर के नंबर देखे। अब बारी है समय की — क्योंकि हर शुभ कार्य सिर्फ किस दिशा में या किस वस्तु के साथ हो, यह ही नहीं, बल्कि किस तारीख को हो, यह भी उतना ही मायने रखता है। अंक ज्योतिष में हर तारीख का भी अपना एक कंपन (अंक) होता है, और यह कंपन आपके मूलांक-भाग्यांक से मेल खाकर उस दिन को खास बना सकता है।
तारीख का अंक कैसे निकालें
तारीख की गणना विधि भी वही परिचित तरीका है जो हमने अब तक हर जगह इस्तेमाल किया है — पूरी तारीख (दिनांक+महीना+वर्ष) के सभी अंकों को जोड़कर एक अंक तक घटाना।
उदाहरण से समझें — मान लीजिए संभावित तारीख है 26 जनवरी 2027। दिन 26, महीना 01, वर्ष 2027। जोड़: 2+6+0+1+2+0+2+7=20, फिर 2+0=2। इस तारीख का अंक 2 हुआ। इसी तरह कोई भी तारीख जांची जा सकती है, चाहे वह विवाह की हो, गृह प्रवेश की हो, व्यवसाय शुरू करने की हो या यात्रा आरंभ करने की।
एक ज़रूरी बात ध्यान रखें — यह विधि केवल “तारीख का अंक” देती है, यानी दिन-महीने-वर्ष का सामूहिक कंपन। इसके अतिरिक्त सिर्फ “दिन” (जैसे 26) का भी अपना एक स्वतंत्र अंक होता है (2+6=8), जिसे कुछ परंपराओं में अधिक महत्व दिया जाता है क्योंकि यह उस दिन विशेष की ऊर्जा को दर्शाता है। संपूर्ण विश्लेषण के लिए दोनों को साथ में देखना बेहतर रहता है।
मूलांक 1 से 9 तक — तारीख पर प्रभाव
हर तारीख अंक अपनी अलग ऊर्जा लेकर आता है, जो अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग रूप से फलदायी होती है।
- तारीख अंक 1 (स्वामी सूर्य): नई शुरुआत, नेतृत्व और आत्मविश्वास का दिन। व्यवसाय शुभारंभ, नई नौकरी जॉइन करने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए उत्तम।
- तारीख अंक 2 (स्वामी चंद्रमा): भावनात्मक जुड़ाव और सहयोग का दिन। सगाई, पारिवारिक समारोह और साझेदारी की शुरुआत के लिए अनुकूल।
- तारीख अंक 3 (स्वामी गुरु): ज्ञान, विस्तार और सौभाग्य का दिन। विवाह, शिक्षा आरंभ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
- तारीख अंक 4 (स्वामी राहु): अस्थिरता का दिन। महत्वपूर्ण शुभ कार्यों के लिए सामान्यतः टाला जाता है, विशेषकर विवाह और गृह प्रवेश जैसे स्थायी निर्णयों के लिए।
- तारीख अंक 5 (स्वामी बुध): गति और संचार का दिन। यात्रा आरंभ, व्यापारिक सौदे और संचार से जुड़े कार्यों के लिए अनुकूल।
- तारीख अंक 6 (स्वामी शुक्र): सुख, सौंदर्य और प्रेम का दिन। विवाह के लिए परंपरागत रूप से सबसे शुभ तारीखों में गिना जाता है, साथ ही गृह प्रवेश के लिए भी उत्तम।
- तारीख अंक 7 (स्वामी केतु): आध्यात्मिकता और चिंतन का दिन। पूजा-पाठ, तीर्थ यात्रा और आत्मनिरीक्षण से जुड़े कार्यों के लिए उपयुक्त, लेकिन सामाजिक उत्सवों के लिए आदर्श नहीं माना जाता।
- तारीख अंक 8 (स्वामी शनि): मेहनत और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का दिन। मिश्रित परिणाम देने वाला माना जाता है — गंभीर, दीर्घकालिक प्रतिबद्धता वाले कार्यों (जैसे बड़ा निवेश) के लिए ठीक, पर उत्सव और उल्लास वाले कार्यों के लिए कम उपयुक्त।
- तारीख अंक 9 (स्वामी मंगल): साहस और समापन का दिन। किसी चरण के समापन, बड़े साहसिक निर्णय और शक्ति-प्रदर्शन वाले कार्यों के लिए अनुकूल, लेकिन नई शुरुआत के लिए मिश्रित फल देने वाला माना जाता है क्योंकि यह अंक अंत और पूर्णता का प्रतीक है।

तारीख के अंक को अपने मूलांक-भाग्यांक से मिलाना
अकेले तारीख का अंक देखना काफी नहीं है — असली उपयोगिता तब सामने आती है जब उसे कार्य से जुड़े मुख्य व्यक्ति (जैसे विवाह में दूल्हा-दुल्हन दोनों, व्यवसाय में मालिक) के मूलांक-भाग्यांक से मिलाया जाए। मॉड्यूल 7 और 8 में इस्तेमाल की गई वही ग्रह-मैत्री तालिका यहां भी काम आती है।
| मूलांक | स्वामी ग्रह | मित्र अंक | सम (उदासीन) अंक | शत्रु अंक |
|---|---|---|---|---|
| 1 | सूर्य | 2, 3, 9 | 5 | 6, 8 |
| 2 | चंद्रमा | 1, 5 | 3, 6, 8, 9 | कोई नहीं |
| 3 | गुरु | 1, 2, 9 | 8 | 5, 6 |
| 4 | राहु | 5, 6, 8 | 3 | 1, 2, 9 |
| 5 | बुध | 1, 6 | 3, 8, 9 | 2 |
| 6 | शुक्र | 5, 8 | 3, 9 | 1, 2 |
| 7 | केतु | 1, 2, 3 | 6, 8 | 5 |
| 8 | शनि | 5, 6 | 3 | 1, 2, 9 |
| 9 | मंगल | 1, 2, 3 | 6, 8 | 5 |
विवाह के लिए मिलान नियम: जब दो लोगों की तारीख चुननी हो, तो तारीख का अंक दोनों वर-वधू के मूलांक और भाग्यांक — चारों में से किसी के भी शत्रु न होना चाहिए। जितने अधिक मित्र भाव बनें, तारीख उतनी ही शुभ मानी जाती है।
उदाहरण से समझें — मान लीजिए विवाह के लिए दो तारीखें विचाराधीन हैं — 15 फरवरी 2027 और 21 फरवरी 2027। वर का मूलांक 3 और भाग्यांक 6 है, वधू का मूलांक 1 और भाग्यांक 9 है। पहली तारीख का अंक: 1+5+0+2+2+0+2+7=19, फिर 1+9=10, फिर 1+0=1। दूसरी तारीख का अंक: 2+1+0+2+2+0+2+7=16, फिर 1+6=7। अब तालिका देखें — अंक 1, वर के मूलांक 3 का मित्र है, वर के भाग्यांक 6 का शत्रु है, वधू के मूलांक 1 से स्वाभाविक रूप से मेल खाता है, और वधू के भाग्यांक 9 का मित्र है। यानी अंक 1 केवल एक जगह शत्रु भाव दिखाता है। दूसरी ओर अंक 7 वर के मूलांक 3 का मित्र है, वर के भाग्यांक 6 का शत्रु है, वधू के मूलांक 1 का मित्र है, और वधू के भाग्यांक 9 का सम है — यहां भी एक ही शत्रु भाव है। दोनों तारीखें लगभग समान रूप से मिश्रित फल देती हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में परिवार पारंपरिक पंचांग-आधारित मुहूर्त (तिथि, नक्षत्र, वार) को निर्णायक कारक मानकर आगे बढ़ सकता है।
अलग-अलग अवसरों के लिए तारीख चयन
हर अवसर की प्रकृति अलग होती है, इसलिए तारीख चुनते समय उस अवसर के स्वभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए।
- विवाह: वर-वधू दोनों के मूलांक-भाग्यांक से मित्र या सम भाव रखने वाली तारीख देखें, और साथ ही तारीख अंक 6, 3 या 1 को प्राथमिकता दें, जो परंपरागत रूप से वैवाहिक सुख के लिए शुभ माने जाते हैं।
- गृह प्रवेश: घर के मुखिया के मूलांक-भाग्यांक से मेल खाने वाली तारीख देखें। तारीख अंक 6 (शुक्र) और 3 (गुरु) को गृह प्रवेश के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि ये सुख और समृद्धि से जुड़े हैं।
- व्यवसाय शुभारंभ: व्यवसाय के मालिक के मूलांक-भाग्यांक से मेल खाने वाली तारीख देखें। तारीख अंक 1 (नेतृत्व), 5 (व्यापार-गति) और 3 (विस्तार) व्यावसायिक शुरुआत के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
- यात्रा आरंभ: यात्रा करने वाले व्यक्ति के मूलांक से मेल खाने वाली तारीख देखें। तारीख अंक 5 (गति और स्वतंत्रता) लंबी यात्राओं के लिए विशेष रूप से अनुकूल माना जाता है।
- परीक्षा या साक्षात्कार: उम्मीदवार के मूलांक से मेल खाने वाली तारीख देखें। तारीख अंक 1 (आत्मविश्वास) और 3 (बुद्धि-विस्तार) परीक्षा और साक्षात्कार के लिए शुभ माने जाते हैं।
अंक ज्योतिष बनाम पारंपरिक पंचांग मुहूर्त
यह स्पष्ट समझना ज़रूरी है कि अंक ज्योतिष से तारीख चुनना, पारंपरिक पंचांग-आधारित मुहूर्त (तिथि, नक्षत्र, वार, योग, करण की गणना) का विकल्प नहीं है — यह उसका एक पूरक और तेज़ प्रारंभिक फिल्टर है। पंचांग मुहूर्त हज़ारों वर्षों की खगोलीय गणना पर आधारित है और इसे अंतिम निर्णय में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अंक ज्योतिष का उपयोग कई संभावित शुभ तारीखों में से व्यक्तिगत रूप से सबसे अनुकूल तारीख चुनने के लिए एक अतिरिक्त परत के रूप में किया जाना चाहिए। पारंपरिक मुहूर्त गणना की पूरी विधि हमारे वास्तु शास्त्र कोर्स के मॉड्यूल 4 में विस्तार से बताई गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: अगर अंक ज्योतिष और पंचांग मुहूर्त में टकराव हो तो किसे प्राथमिकता दें?
पंचांग-आधारित मुहूर्त को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अंक ज्योतिष का उपयोग पंचांग द्वारा सुझाई गई कई शुभ तारीखों में से व्यक्तिगत रूप से सबसे अनुकूल तारीख चुनने के लिए किया जाना चाहिए, टकराव की स्थिति में नहीं।
प्रश्न 2: क्या तारीख अंक 4 और 9 वाले दिन हमेशा अशुभ होते हैं?
नहीं, यह संदर्भ पर निर्भर करता है। अंक 4 नई शुरुआत के लिए कम अनुकूल माना जाता है, लेकिन दीर्घकालिक निर्माण कार्यों में यह स्थिरता भी दे सकता है। अंक 9 नई शुरुआत में मिश्रित फल देता है, लेकिन किसी चरण को पूर्ण करने वाले कार्यों (जैसे कर्ज़ चुकाना) के लिए बहुत उपयुक्त माना जाता है।
प्रश्न 3: क्या पूरी तारीख का अंक देखना काफी है, या दिन का अंक भी ज़रूरी है?
दोनों देखना बेहतर है। पूरी तारीख का अंक सामूहिक ऊर्जा दिखाता है, जबकि केवल दिन (जैसे 26) का अंक उस दिन विशेष का प्रभाव दिखाता है। दोनों एक जैसा या मित्र भाव दिखाएं तो तारीख अधिक भरोसेमंद मानी जाती है।
प्रश्न 4: क्या अंग्रेज़ी कैलेंडर तारीख का ही उपयोग होता है, या हिंदी पंचांग तिथि का भी?
अंक ज्योतिष की गणना सामान्यतः प्रचलित अंग्रेज़ी कैलेंडर तारीख (दिन-महीना-वर्ष) पर आधारित होती है, जबकि पंचांग मुहूर्त हिंदू तिथि, नक्षत्र और वार पर आधारित होता है — दोनों प्रणालियां अलग-अलग हैं और साथ में देखी जानी चाहिए।
प्रश्न 5: क्या तारीख अकेली ही किसी कार्य की सफलता तय करती है?
नहीं। तारीख एक सहायक कारक है। मेहनत, सही योजना, पंचांग मुहूर्त और परिस्थितियां — ये सब मिलकर किसी कार्य का परिणाम तय करते हैं। यह आस्था और परंपरा का विषय है, अकेले किसी परिणाम की गारंटी नहीं।
तारीख के अंक के बाद अब बारी है समय के एक बड़े चक्र की — हर साल आपके लिए एक अलग ऊर्जा लेकर आता है, और उसे पहले से जानना संभव है। अगले अध्याय 8.5 पर्सनल ईयर नंबर — पूरी गाइड में हम जानेंगे कि आने वाला वर्ष आपके लिए कैसा रहेगा, इसकी गणना अंक ज्योतिष से कैसे की जाए। पिछले अध्याय 8.3 घर/फ्लैट नंबर की अंक ज्योतिष में हमने घर के अंक की गणना देखी थी। पूरा पाठ्यक्रम देखने के लिए अंक शास्त्र कोर्स पेज पर जाएं।
🛠️ उपयोगी मुफ्त उपकरण

Ajit Kumar Nath — AstroVgyaan ke sansthapak aur research lead. Inka vishwas hai ki gyan ka asli uddeshya seva hai — isliye inka kaam kabhi bhi vyaktigat consultation ya paid sessions tak simit nahi raha. Vedic Jyotish (Parashari Hora Shastra, Jaimini Sutram, Bhrigu Nandi Nadi), Lal Kitab, Vastu Shastra aur Ank Jyotish (Numerology) par varshon ka swatantra adhyayan aur shodh karke, unhe saral, imandaar aur research-aadharit lekhon ke roop mein sabke liye free upalabdh karana — yahi inka jeevan-uddeshya hai. Research aur collaboration ke liye: astrovgyaan@gmail.com






