5.1 लो शू ग्रिड — क्या है और कैसे बनाएं

Chinese calligraphy aur ink stone - Lo Shu Grid ka parichay

अगर सिर्फ अपनी जन्मतिथि के अंकों से एक 3×3 का चौकोर बनाकर आप अपने मानसिक, भावनात्मक और व्यावहारिक स्वभाव को पढ़ सकें, तो क्या आप यह जानना चाहेंगे कि यह चौकोर कैसे बनता है? यही लो शू ग्रिड है — चीनी अंकशास्त्र की सबसे प्राचीन और सबसे शक्तिशाली पद्धतियों में से एक। अब तक हमने मूलांक और भाग्यांक (मॉड्यूल 3) तथा नामांक (मॉड्यूल 4) सीखे — ये दोनों पश्चिमी अंकशास्त्र की नींव हैं। अब मॉड्यूल 5 में हम एक बिलकुल अलग, प्राचीन चीनी प्रणाली में प्रवेश कर रहे हैं, जो जन्मतिथि के अंकों को एक निश्चित ग्रिड में बिठाकर व्यक्ति के जीवन के हर पहलू — बुद्धि, भावना, कर्म, धन, रिश्ते — का सम्पूर्ण चित्र खींचती है। इस अध्याय में हम सीखेंगे कि लो शू ग्रिड क्या है, इसका इतिहास क्या है, और सबसे ज़रूरी — इसे अपनी जन्मतिथि से खुद कैसे बनाएं, कदम-दर-कदम, कई उदाहरणों के साथ।

लो शू ग्रिड क्या है — परिचय और प्राचीन इतिहास

लो शू ग्रिड एक 3×3 का जादुई चौकोर है, जिसमें 1 से 9 तक के अंक इस तरह बिठाए गए हैं कि हर पंक्ति, हर स्तंभ और दोनों विकर्ण — सबका योग हमेशा 15 आता है। यह विश्व की सबसे पुरानी दर्ज मैजिक-स्क्वायर संरचनाओं में से एक मानी जाती है, जिसकी जड़ें लगभग 4,000 साल पुरानी चीनी सभ्यता में हैं।

प्राचीन चीनी कथा के अनुसार, लगभग 2000 ईसा पूर्व, सम्राट यू के समय में हुआंग नदी की एक सहायक नदी लुओ नदी में भयंकर बाढ़ आई थी। लोग नदी को शांत करने के उपाय खोज रहे थे, तभी नदी से एक दिव्य कछुआ निकला, जिसकी पीठ के खोल पर बिंदुओं का एक विचित्र पैटर्न बना हुआ था। जब इन बिंदुओं को गिना गया, तो पता चला कि यह पैटर्न 1 से 9 तक के अंकों को एक विशेष क्रम में दर्शाता है — जिसमें हर दिशा से जोड़ने पर योग 15 आता था। इसी पैटर्न को “लो शू” (लुओ नदी का लेख) नाम दिया गया, और आगे चलकर यह चीनी दर्शन, फेंग शुई, आई चिंग और चीनी अंकशास्त्र की नींव बना।

आधुनिक समय में, लो शू ग्रिड को व्यक्तिगत अंकशास्त्र में ढाला गया है — यानी अब यह किसी नदी या फेंग शुई की दिशा तक सीमित नहीं, बल्कि हर व्यक्ति अपनी जन्मतिथि के अंकों से अपना निजी लो शू ग्रिड बना सकता है। यह ग्रिड बताता है कि आपके व्यक्तित्व में कौन-से गुण प्रबल हैं, कौन-से गुण अनुपस्थित हैं, और कौन-से गुण बार-बार दोहराए जाकर अत्यधिक तीव्र हो गए हैं। मूलांक और भाग्यांक जहाँ एक अकेले अंक पर केंद्रित थे, वहीं लो शू ग्रिड पूरी जन्मतिथि के सभी अंकों को एक साथ, एक चित्र के रूप में दिखाता है — इसलिए इसे व्यक्तित्व-विश्लेषण की एक बहुत गहरी पद्धति माना जाता है।

निश्चित ग्रिड संरचना — हर अंक की अपनी जगह

लो शू ग्रिड की सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझनी है कि यह ग्रिड फिक्स्ड (निश्चित) होता है — यानी 1 से 9 तक हर अंक की ग्रिड में जगह हमेशा एक ही रहती है, चाहे किसी की भी जन्मतिथि हो। सिर्फ यह बदलता है कि किस जगह पर अंक कितनी बार आया (या बिलकुल नहीं आया)। मूल संरचना यह है:

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इस 3×3 ग्रिड में हर घर एक निश्चित अंक और एक निश्चित जीवन-क्षेत्र को दर्शाता है। ऊपर की पंक्ति (4, 9, 2) मानसिक तल कहलाती है — यह बुद्धि, विचार और योजना-शक्ति से जुड़ी है। बीच की पंक्ति (3, 5, 7) भावनात्मक तल है — यह भावनाओं, संवेदनशीलता और आंतरिक संतुलन से जुड़ी है। नीचे की पंक्ति (8, 1, 6) व्यावहारिक तल है — यह कर्म, मेहनत और सांसारिक सफलता से जुड़ी है। इसी तरह स्तंभों और विकर्णों के भी अपने-अपने अर्थ हैं, जिन्हें हम मॉड्यूल 5 के अंतिम अध्याय (5.4) में विस्तार से सीखेंगे। अभी के लिए यह याद रखना ज़रूरी है: हर अंक की जगह हमेशा एक जैसी रहती है — बदलता सिर्फ यह है कि उस जगह पर कितनी बार गिनती आती है।

लो शू ग्रिड कैसे बनाएं — पूरी विधि, कदम-दर-कदम

अपना निजी लो शू ग्रिड बनाना बेहद सरल है। इसके लिए सिर्फ आपकी पूरी जन्मतिथि (दिन-महीना-साल) चाहिए। नीचे दी गई चार-चरण विधि को ध्यान से समझें:

  1. चरण 1 — पूरी जन्मतिथि लिखें: दिन, महीना और साल — सबको अंकों में, बिना काटे, पूरा लिखें। उदाहरण के लिए 15 अगस्त 1990 को दिन-महीना-साल के क्रम में अंकों में लिखेंगे: 15-08-1990, यानी अंक बनेंगे — 1, 5, 0, 8, 1, 9, 9, 0.
  2. चरण 2 — शून्य (0) हटा दें: लो शू ग्रिड में शून्य की कोई जगह नहीं है, क्योंकि ग्रिड सिर्फ 1 से 9 तक के अंकों से बनता है। ऊपर के उदाहरण में दो शून्य थे, इसलिए बचे अंक होंगे — 1, 5, 8, 1, 9, 9.
  3. चरण 3 — हर अंक की गिनती निकालें: अब देखें कि 1 से 9 तक हर अंक कितनी बार आया। ऊपर के उदाहरण में: 1 → 2 बार, 5 → 1 बार, 8 → 1 बार, 9 → 2 बार। बाकी अंक (2, 3, 4, 6, 7) एक बार भी नहीं आए — इन्हें “मिसिंग नंबर” कहते हैं, जिन्हें हम अगले अध्याय (5.2) में विस्तार से समझेंगे।
  4. चरण 4 — हर अंक को उसकी निश्चित जगह पर बिठाएं: ऊपर बताई गई फिक्स्ड ग्रिड संरचना (4-9-2 / 3-5-7 / 8-1-6) में हर अंक की गिनती उसकी अपनी जगह पर लिख दें। जिस जगह अंक बिलकुल नहीं आया, वह जगह खाली छोड़ दें (या डैश — लगा दें)।
Hath se grid paper par calligraphy - lo shu grid banane ki vidhi
जन्मतिथि के अंकों को निश्चित ग्रिड-स्थान पर बिठाने की प्रक्रिया

वर्कड उदाहरण 1 — 15 अगस्त 1990 का लो शू ग्रिड

चलिए ऊपर की विधि को पूरा करके देखते हैं। जन्मतिथि: 15-08-1990.

  • अंक (शून्य हटाकर): 1, 5, 8, 1, 9, 9
  • गिनती: 1→2 बार, 5→1 बार, 8→1 बार, 9→2 बार
  • बाकी सब (2, 3, 4, 6, 7) मिसिंग
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5
811

इस ग्रिड में अंक 1 और 9 दो-दो बार आए हैं (रिपीटिंग नंबर), जबकि 5 और 8 एक-एक बार आए हैं। अंक 2, 3, 4, 6, 7 पूरी तरह अनुपस्थित हैं। ऐसे व्यक्ति में व्यावहारिक तल (8, 1, 6 — नीचे की पंक्ति) में 8 और 1 मौजूद हैं, इसलिए मेहनत करने और डटे रहने की प्रवृत्ति मजबूत होगी, लेकिन 6 गायब होने से घरेलू सुख-सुविधा और भावनात्मक संतुलन में कमी महसूस हो सकती है। इसी तरह हर अंक की गिनती और स्थिति व्यक्ति के स्वभाव की एक-एक परत खोलती है — इसका पूरा विश्लेषण हम अध्याय 5.2, 5.3 और 5.4 में सीखेंगे।

वर्कड उदाहरण 2 — 23 नवंबर 1985 का लो शू ग्रिड

अब एक और जन्मतिथि लेते हैं: 23-11-1985.

  • अंक (कोई शून्य नहीं): 2, 3, 1, 1, 1, 9, 8, 5
  • गिनती: 1→3 बार, 2→1 बार, 3→1 बार, 5→1 बार, 8→1 बार, 9→1 बार
  • बाकी (4, 6, 7) मिसिंग
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8111

यहाँ सबसे ध्यान देने वाली बात है अंक 1 का तीन बार आना — इसे ट्रिपल रिपीटिंग नंबर कहते हैं, जो किसी भी गुण को बेहद तीव्र बना देता है। अंक 1 चंद्रमा से जुड़ा माना जाता है और आत्मविश्वास, नेतृत्व-क्षमता तथा स्वतंत्र सोच का प्रतीक है — तीन बार आने से यह गुण इतना प्रबल हो जाता है कि व्यक्ति स्वभाव से बेहद जिद्दी और आत्मकेंद्रित भी हो सकता है। दूसरी ओर 4, 6, 7 का पूरी तरह गायब होना बताता है कि स्थिरता, पारिवारिक सुख और आत्मिक शांति जैसे क्षेत्रों में सजग प्रयास की ज़रूरत रहेगी।

वर्कड उदाहरण 3 — 7 मार्च 2000 का लो शू ग्रिड (एक असामान्य केस)

तीसरा उदाहरण जानबूझकर एक ऐसी जन्मतिथि से लिया गया है जिसमें शून्य की भरमार है, ताकि यह समझा जा सके कि शून्य हटाने के बाद ग्रिड कितना खाली रह सकता है। जन्मतिथि: 07-03-2000.

  • पूरे अंक: 0, 7, 0, 3, 2, 0, 0, 0
  • शून्य हटाने के बाद: 7, 3, 2
  • गिनती: 2→1 बार, 3→1 बार, 7→1 बार
  • बाकी (1, 4, 5, 6, 8, 9) सब मिसिंग
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यह उदाहरण दिखाता है कि किसी-किसी जन्मतिथि में सिर्फ 3-4 अंक ही ग्रिड में भरते हैं, बाकी सब मिसिंग रह जाते हैं। ऐसी स्थिति सामान्य है और चिंता की बात नहीं — यह सिर्फ यह दर्शाती है कि व्यक्ति को जीवन में कुछ गुण जन्मजात रूप से नहीं मिले, इसलिए उन्हें सचेत रूप से विकसित करना होगा। जितने ज़्यादा अंक मिसिंग होते हैं, उतना ही ज़्यादा महत्व उपायों और जागरूक प्रयास का हो जाता है — इस विषय पर पूरा अध्याय 5.2 में समर्पित है।

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मैजिक स्क्वायर का रहस्य — हर तरफ से योग 15 क्यों

लो शू ग्रिड को “मैजिक स्क्वायर” (जादुई चौकोर) इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी मूल संरचना (4-9-2 / 3-5-7 / 8-1-6) में एक अद्भुत गणितीय गुण छिपा है — इसकी हर पंक्ति, हर स्तंभ और दोनों विकर्णों का योग बिलकुल 15 आता है। खुद जांच लीजिए:

  • पहली पंक्ति: 4 + 9 + 2 = 15
  • दूसरी पंक्ति: 3 + 5 + 7 = 15
  • तीसरी पंक्ति: 8 + 1 + 6 = 15
  • पहला स्तंभ: 4 + 3 + 8 = 15
  • दूसरा स्तंभ: 9 + 5 + 1 = 15
  • तीसरा स्तंभ: 2 + 7 + 6 = 15
  • विकर्ण 1: 4 + 5 + 6 = 15
  • विकर्ण 2: 2 + 5 + 8 = 15

प्राचीन चीनी मान्यता में संख्या 15 को विशेष महत्व दिया गया है — यह चंद्र मास में पूर्णिमा तक पहुँचने के दिनों (15 दिन) से भी जोड़ी जाती है, यानी पूर्णता और संतुलन का प्रतीक। यही कारण है कि इस ग्रिड को सिर्फ एक गणितीय संयोग नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय संतुलन का प्रतिबिंब माना जाता है। जब हम किसी व्यक्ति की जन्मतिथि से यह ग्रिड बनाते हैं, तो देखते हैं कि उसके जीवन में यह संतुलन कहाँ पूरा है और कहाँ अधूरा — यानी कौन-से अंक भरपूर हैं और कौन-से अनुपस्थित।

Go board par stones strategic sthiti mein - anko ki sthiti ka pratik
जिस तरह हर मोहरे की स्थिति मायने रखती है, वैसे ही ग्रिड में हर अंक की स्थिति का अपना अर्थ है

ग्रिड में अंकों की स्थिति का महत्व — आगे क्या सीखेंगे

अब जब आप जानते हैं कि लो शू ग्रिड कैसे बनता है, अगला कदम है इसे “पढ़ना” सीखना। ग्रिड में तीन तरह की जानकारी छिपी होती है, जिन्हें हम मॉड्यूल 5 के बाकी अध्यायों में विस्तार से सीखेंगे:

  1. मिसिंग नंबर: जो अंक ग्रिड में बिलकुल नहीं आते, वे बताते हैं कि जीवन के किन क्षेत्रों में जन्मजात कमी है और वहाँ किन उपायों से संतुलन लाया जा सकता है। यह अगला अध्याय (5.2) है।
  2. रिपीटिंग नंबर: जो अंक बार-बार (दो, तीन, चार या इससे ज़्यादा बार) आते हैं, वे बताते हैं कि कौन-सा गुण असाधारण रूप से तीव्र है — और यह तीव्रता सकारात्मक (शक्ति) भी हो सकती है और नकारात्मक (अति) भी। यह अध्याय 5.3 में है।
  3. प्लेन्स और एरो: जब ग्रिड की किसी पूरी पंक्ति, स्तंभ या विकर्ण के तीनों अंक मौजूद होते हैं, तो वह एक “शक्ति एरो” बनता है; जब तीनों अंक गायब होते हैं, तो वह एक “कमज़ोरी एरो” बनता है। यह मॉड्यूल 5 का सबसे गहन और समापन अध्याय (5.4) है।

इन तीनों हिस्सों को मिलाकर पढ़ने पर ही लो शू ग्रिड का पूरा चित्र बनता है — इसलिए इस अध्याय की नींव (ग्रिड बनाने की सही विधि) को अच्छी तरह समझ लेना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि आगे के सभी अध्याय इसी नींव पर बने हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या लो शू ग्रिड बनाने के लिए जन्म-समय भी चाहिए?
नहीं। लो शू ग्रिड सिर्फ जन्मतिथि (दिन-महीना-साल) से बनता है, जन्म-समय या जन्म-स्थान की ज़रूरत नहीं होती — यह इसे मूलांक-भाग्यांक जितना ही सरल बनाता है।

2. अगर जन्मतिथि में शून्य बिलकुल न हो, तो क्या करें?
कुछ खास नहीं — बस सीधे बचे हुए अंकों की गिनती करके ग्रिड में बिठा दें। शून्य सिर्फ तभी हटाया जाता है जब वह मौजूद हो, बाकी प्रक्रिया वैसी ही रहती है।

3. क्या महीने को भी अंकों में तोड़ना है, या सीधे नंबर लिखना है?
महीने को हमेशा उसके अंक-रूप में लिखें — जैसे अगस्त यानी 08वां महीना है, तो 0 और 8 दोनों अलग अंक गिने जाएंगे, “अगस्त” शब्द नहीं।

4. अगर कोई अंक चार या पाँच बार भी आ जाए, तो क्या ग्रिड में गलत तरीका है?
नहीं, यह बिलकुल सामान्य है। कुछ जन्मतिथियों में एक ही अंक चार-पाँच बार तक दोहराया जा सकता है, और यह सिर्फ यह दर्शाता है कि वह गुण अत्यंत तीव्र है — इसका पूरा विश्लेषण अध्याय 5.3 में मिलेगा।

5. क्या लो शू ग्रिड मूलांक-भाग्यांक से ज़्यादा सटीक है?
दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग कोण से व्यक्तित्व को देखती हैं — मूलांक-भाग्यांक एक अकेले अंक पर गहराई से केंद्रित होते हैं, जबकि लो शू ग्रिड पूरी जन्मतिथि के सभी अंकों का समग्र चित्र देता है। सबसे संपूर्ण विश्लेषण तब मिलता है जब दोनों पद्धतियों को साथ में पढ़ा जाए — यह किसी एक के दूसरे से बेहतर होने का सवाल नहीं है, बल्कि पूरक पद्धतियों का है।

पिछले अध्याय में हमने मॉड्यूल 4 का समापन — बेबी नेमिंग और नामांक सारांश पढ़ा था, जहाँ हमने नामांक की पूरी यात्रा समेटी। अब मॉड्यूल 5 की शुरुआत के साथ हम एक नई पद्धति में हैं। अगले अध्याय 5.2 — मिसिंग नंबर्स का मतलब और उपाय में हम विस्तार से सीखेंगे कि जब कोई अंक ग्रिड में बिलकुल नहीं आता, तो इसका क्या अर्थ है और कैसे इसे संतुलित किया जा सकता है — 1 से 9 तक हर अंक के मिसिंग होने का अलग-अलग गहन विश्लेषण अगले अध्याय में मिलेगा। पूरे कोर्स की संरचना देखने के लिए कोर्स इंडेक्स पेज पर जाएं।

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