अध्याय ४.६ — पञ्चम भाव | सन्तान, बुद्धि, पूर्वजन्म का पुण्य और रचनात्मकता | वैदिक ज्योतिष
पञ्चम भाव — सन्तान, बुद्धि, पूर्वजन्म का पुण्य और रचनात्मकता का भाव। वैदिक ज्योतिष में पञ्चम भाव को “पुण्य भाव” भी कहा जाता है — यह वह भाव है जहाँ पिछले…
पञ्चम भाव — सन्तान, बुद्धि, पूर्वजन्म का पुण्य और रचनात्मकता का भाव। वैदिक ज्योतिष में पञ्चम भाव को “पुण्य भाव” भी कहा जाता है — यह वह भाव है जहाँ पिछले…
चतुर्थ भाव — माता, गृह, मन, सुख और सम्पत्ति का भाव। पाँच वर्षों के परामर्श में मैंने एक बात बार-बार देखी है — जिन जातकों का चतुर्थ भाव बलवान होता है, उनके…
अध्याय ४.५ — चतुर्थ भाव | माता, गृह, मन, सुख और सम्पत्ति | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम Read Post »
तृतीय भाव — पराक्रम, साहस, भाई-बहन, यात्रा और संचार का भाव। पाँच वर्षों के परामर्श में मैंने देखा है कि जिन जातकों का तृतीय भाव बलवान होता है वे जीवन में…
अध्याय ४.४ — तृतीय भाव | पराक्रम, भाई-बहन, संचार और साहस | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम Read Post »