Jyotish Course

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अध्याय ३.३ — मिथुन राशि | स्वभाव, ग्रह फल और सम्पूर्ण विश्लेषण | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम

राशि चक्र में वृषभ की स्थिरता के बाद मिथुन राशि आती है — और मानो एक झोंका आता है। ताजी हवा, नए विचार, नई बातें, नए सम्बन्ध। पाँच वर्षों के ज्योतिष परामर्श में मिथुन राशि के जातक मुझे सबसे अधिक जिज्ञासु मिले हैं। इनके प्रश्न कभी समाप्त नहीं होते। एक बात का उत्तर मिला नहीं कि दूसरा प्रश्न तैयार है। यह जिज्ञासा ही मिथुन राशि की सबसे बड़ी शक्ति और पहचान है। शास्त्र में मिथुन राशि का स्वरूप “मिथुनं द्विस्वभावं स्यात् वायुतत्त्वं शुभं स्मृतम्। खड्गवीणाधरं युग्मं विप्रजातिः सदोदितम्॥” बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, राशि स्वभावाध्याय अर्थात् — मिथुन राशि द्विस्वभाव है, वायु तत्त्व की है, शुभ राशि है, तलवार और वीणा धारण करने वाले युगल का प्रतीक है और ब्राह्मण जाति की मानी गई है। वराहमिहिर ने बृहज्जातक में मिथुन के बारे में कहा है — “मिथुने बहुवाक् कुशलः” — मिथुन राशि में ग्रह स्थित हों तो जातक बहुत बोलने वाला और कुशल होता है। “मिथुनलग्ने जातः वाक्पटुः बहुशास्त्रज्ञः सर्वकलाकुशलः।” जातक परिजात, लग्नाध्याय जातक परिजात के अनुसार मिथुन लग्न में जन्मा जातक वाक्पटु होता है, अनेक शास्त्रों का ज्ञाता होता है और सभी कलाओं में कुशल होता है। मिथुन राशि का मूलभूत स्वरूप मिथुन राशि वायु तत्त्व की द्विस्वभाव राशि है। वायु — गति, स्वतन्त्रता और संचार का प्रतीक। द्विस्वभाव — दो स्वभावों का मिश्रण, अर्थात् एक साथ दो दिशाओं में सोचने की क्षमता। मिथुन राशि का प्रतीक एक युगल है — एक पुरुष और एक स्त्री। यह द्वैत मिथुन राशि के स्वभाव में भी दिखता है — ये जातक एक साथ दो विचार, दो भूमिकाएँ और दो दृष्टिकोण रख सकते हैं। मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं — बुद्धि, वाणी और व्यापार के कारक। बुध की स्वराशि में जन्मे जातकों में बुध के गुण — चतुरता, संचार कौशल, व्यापारिक बुद्धि और विविध ज्ञान — स्वाभाविक रूप से होते हैं। मिथुन राशि में बुध उच्च के होते हैं — कन्या में। मिथुन में बुध अपने घर में है। मिथुन राशि के जातकों का स्वभाव मिथुन राशि के जातकों की सबसे बड़ी शक्ति उनकी अनुकूलन क्षमता है। ये जातक किसी भी परिस्थिति में, किसी भी व्यक्ति के साथ घुल-मिल जाते हैं। इनकी बुद्धि तीव्र होती है और नई जानकारी ग्रहण करने की क्षमता असाधारण होती है। एक मिथुन जातक जो मेरे पास आए थे — वे एक साथ तीन भाषाएँ बोलते थे, दो व्यवसाय चलाते थे और साथ में संगीत भी सीख रहे थे। यह मिथुन की बहुमुखी प्रतिभा का उत्कृष्ट उदाहरण था। परन्तु मिथुन जातकों की कमजोरियाँ भी स्पष्ट हैं। अस्थिरता — एक काम में टिक नहीं पाते। जो काम आज उत्साह से शुरू किया, कल उससे मन भर गया। सतहीपन — बहुत कुछ जानते हैं परन्तु किसी एक विषय में गहराई कम। और सबसे बड़ी कमजोरी — निर्णय नहीं ले पाते। दोनों पक्ष देखते-देखते अवसर निकल जाता है। मिथुन राशि में सभी ग्रह मिथुन में सूर्य: सूर्य यहाँ शत्रु राशि में है। नेतृत्व में कुछ अनिश्चितता। परन्तु संचार और बुद्धि से पद प्राप्त करते हैं। शिक्षा और मीडिया में आत्मविश्वास से आगे बढ़ते हैं। मिथुन में चन्द्र: चन्द्र यहाँ मित्र राशि में है। मन में विविध विचार और जिज्ञासा। भावनाएँ तेज बदलती हैं — एक क्षण प्रसन्न, दूसरे क्षण उदास। सामाजिकता और लोकप्रियता अधिक होती है। मिथुन में मंगल: मंगल यहाँ शत्रु राशि में है परन्तु बुद्धि से साहस काम आता है। तर्क और वाद-विवाद में तीव्र। वकालत और पत्रकारिता में मंगल की ऊर्जा अच्छी काम आती है। मिथुन में बुध: स्वगृह। वाणी, बुद्धि और व्यापार — सब अपने उत्कृष्ट रूप में। लेखक, वक्ता, व्यापारी — इनके लिए सर्वोत्तम। बहुभाषी होने की क्षमता। मिथुन में गुरु: गुरु यहाँ मित्र राशि में हैं। ज्ञान में विविधता और विस्तार। अनेक शास्त्रों का ज्ञान। शिक्षक और दार्शनिक के रूप में सफलता। सन्तान बुद्धिमान। मिथुन में शुक्र: शुक्र यहाँ मित्र राशि में है। कला और सौन्दर्य में रुचि। प्रेम सम्बन्ध अनेक और विविध। संगीत और साहित्य में विशेष प्रतिभा। मिथुन में शनि: शनि यहाँ मित्र राशि में है। धैर्य और बुद्धि का संयोग। व्यापार में दीर्घकालिक सोच। लेखन और शोध में स्थायित्व। मिथुन में राहु: राहु यहाँ अत्यन्त सक्रिय होता है। नई तकनीक, मीडिया और संचार में असाधारण सफलता। परन्तु मन में भ्रम और अनिश्चितता। मिथुन में केतु: केतु यहाँ पूर्वजन्म के ज्ञान का संकेत देता है। रहस्यमय विद्याओं में रुचि। परन्तु संचार में कभी-कभी अस्पष्टता। मिथुन लग्न — बारह भावों का विश्लेषण प्रथम भाव — मिथुन (बुध स्वामी): मिथुन लग्न के जातक पतले, लम्बे और बुद्धिमान दिखते हैं। आँखें चंचल और अभिव्यक्तिशील। हाथ-पैर की गति से बातें करते हैं। द्वितीय भाव — कर्क (चन्द्र स्वामी): धन भाव का स्वामी चन्द्र — धन में उतार-चढ़ाव। परिवार से भावनात्मक लगाव। वाणी में मिठास। तृतीय भाव — सिंह (सूर्य स्वामी): पराक्रम भाव का स्वामी सूर्य — आत्मविश्वासी और प्रतापी पराक्रम। लेखन में अधिकारपूर्ण शैली। छोटे भाई-बहन प्रतापी। चतुर्थ भाव — कन्या (बुध स्वामी): गृह भाव का स्वामी बुध — घर में बौद्धिक वातावरण। माता विदुषी। घर में पुस्तकें और ज्ञान की सामग्री। पञ्चम भाव — तुला (शुक्र स्वामी): बुद्धि भाव का स्वामी शुक्र — कलात्मक बुद्धि। प्रेम सुखद। सन्तान कलाप्रिय। षष्ठ भाव — वृश्चिक (मंगल स्वामी): शत्रु भाव का स्वामी मंगल — शत्रु शक्तिशाली परन्तु बुद्धि से परास्त। स्वास्थ्य में फेफड़े और भुजाओं पर ध्यान। सप्तम भाव — धनु (गुरु स्वामी): विवाह भाव का स्वामी गुरु — जीवनसाथी विद्वान और धार्मिक। विवाह से भाग्य उदय। व्यापारिक साझेदारी में लाभ। अष्टम भाव — मकर (शनि स्वामी): रहस्य भाव का स्वामी शनि — दीर्घायु। शोध और अनुसन्धान में क्षमता। सम्पत्ति के विषय में सावधानी। नवम भाव — कुम्भ (शनि स्वामी): भाग्य भाव का स्वामी शनि — भाग्य परिश्रम से। सामाजिक सेवा से भाग्य उदय। विदेश यात्राएँ। दशम भाव — मीन (गुरु स्वामी): करियर भाव का स्वामी गुरु — शिक्षा, कला या आध्यात्मिक क्षेत्र में करियर। करियर में गुरु का आशीर्वाद। एकादश भाव — मेष (मंगल स्वामी): लाभ भाव का स्वामी मंगल — साहस से धन लाभ। उद्यमशीलता से आय। मित्र साहसी और ऊर्जावान। द्वादश भाव — वृषभ (शुक्र स्वामी): व्यय भाव का स्वामी शुक्र — व्यय सुख और आराम में। विदेश में सुखद जीवन। एकान्त में कला का अभ्यास। मिथुन राशि — स्वास्थ्य, व्यवसाय और उपाय मिथुन

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अध्याय ३.२ — वृषभ राशि | स्वभाव, ग्रह फल और सम्पूर्ण विश्लेषण | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम

राशि चक्र में मेष की तीव्र अग्नि के बाद वृषभ राशि एक शान्त, स्थिर और समृद्ध संसार लेकर आती है। पाँच वर्षों के ज्योतिष परामर्श में मैंने जब भी किसी वृषभ लग्न या वृषभ राशि के जातक से मिला हूँ, तो एक बात लगभग हमेशा मिली है — एक विशेष प्रकार की शान्ति और दृढ़ता जो इनके व्यक्तित्व में स्वाभाविक रूप से होती है। ये जातक घबराते नहीं, टूटते नहीं — जैसे पृथ्वी नहीं हिलती। एक वृषभ लग्न जातक का स्मरण होता है जो एक छोटे से व्यवसाय से शुरू करके बीस वर्षों में एक बड़े उद्यमी बने। जब उनसे सफलता का रहस्य पूछा तो उन्होंने कहा — “मैं कभी नहीं भागा, कभी नहीं घबराया, बस काम करता रहा।” यही वृषभ राशि का मूल स्वभाव है। शास्त्र में वृषभ राशि का स्वरूप “वृषभो वनचारी स्यात् श्वेतवर्णः कफात्मकः। स्थिरराशिः स्त्रीसंज्ञश्च वैश्यजातिः प्रकीर्तितः॥” बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, राशि स्वभावाध्याय अर्थात् — वृषभ राशि वन में विचरण करने वाली है, श्वेत वर्ण की है, कफ प्रकृति की है, स्थिर राशि है, स्त्री संज्ञा की है और वैश्य जाति की राशि मानी गई है। वराहमिहिर ने बृहज्जातक में वृषभ के विषय में कहा है — “वृषभे धनिनो भोगिनः” — वृषभ राशि में ग्रह स्थित हों तो जातक धनी और भोगी होता है। “वृषभलग्ने जातस्य धनभोगसुखं भवेत्। स्थिरबुद्धिः कलाप्रियः सौन्दर्यप्रियतामयः॥” जातक परिजात, लग्नाध्याय जातक परिजात में वृषभ लग्न के जातक के विषय में कहा गया है कि उसे धन, भोग और सुख प्राप्त होता है, उसकी बुद्धि स्थिर होती है, वह कलाप्रिय और सौन्दर्यप्रिय होता है। वृषभ राशि का मूलभूत स्वरूप वृषभ राशि पृथ्वी तत्त्व की स्थिर राशि है। पृथ्वी — स्थायित्व, दृढ़ता और पोषण का प्रतीक। स्थिर — जो एक बार निर्णय ले ले वह बदले नहीं, जो एक बार लक्ष्य तय कर ले वह उससे न हटे। यही वृषभ राशि का सार है। वृषभ राशि के स्वामी शुक्र हैं — प्रेम, सौन्दर्य और भौतिक सुखों के कारक। शुक्र की स्वामित्व वाली इस राशि में जन्मे जातकों को जीवन में सुन्दर चीजें पसन्द होती हैं — अच्छा भोजन, सुन्दर वस्त्र, आरामदायक घर। ये जातक जीवन का आनन्द लेना जानते हैं। वृषभ राशि में चन्द्रमा उच्च के होते हैं — यह अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। चन्द्रमा मन के कारक हैं और वृषभ की स्थिरता में मन को एक आधार मिलता है। इसीलिए वृषभ राशि के जातक मानसिक रूप से अपेक्षाकृत स्थिर होते हैं। वृषभ राशि का प्रतीक बैल है — जो धीरे चलता है परन्तु थकता नहीं, जो दृढ़ता से अपना काम करता रहता है। वृषभ राशि के जातकों का स्वभाव वृषभ राशि के जातकों में धैर्य उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। जहाँ मेष जातक तुरन्त कार्य करते हैं, वहाँ वृषभ जातक पहले सोचते हैं, परखते हैं और फिर कदम उठाते हैं। एक बार उठाया कदम पक्का होता है। ये जातक जल्दबाजी में कभी निर्णय नहीं लेते। इनका दूसरा प्रमुख गुण है — विश्वसनीयता। वृषभ जातक जो वचन देते हैं, वह निभाते हैं। इनकी मित्रता जीवन भर की होती है। व्यापार में इनका शब्द ही उनका अनुबन्ध होता है। परन्तु इनकी सबसे बड़ी कमजोरी है — हठ। एक बार जो मान लिया वह नहीं बदलते — चाहे परिस्थिति कुछ भी हो। यह हठ कभी-कभी अवसर खो देता है। वृषभ जातकों की दूसरी कमजोरी है — स्वामित्व की भावना। ये जो चीज अपनी मान लेते हैं — चाहे वस्तु हो, सम्बन्ध हो या विचार — उसे छोड़ना इनके लिए अत्यन्त कठिन होता है। इसीलिए इनके सम्बन्ध प्रायः लम्बे और गहरे होते हैं — परन्तु जब टूटते हैं तो बड़ा दर्द देते हैं। वृषभ राशि में सभी ग्रह वृषभ में सूर्य: सूर्य यहाँ शत्रु राशि में है परन्तु अत्यन्त दुर्बल नहीं। नेतृत्व में कुछ कमी आ सकती है परन्तु भौतिक संसाधन अच्छे मिलते हैं। व्यापार में सूर्य का अधिकार और शुक्र की सुन्दरता मिलकर सफलता देती है। वृषभ में चन्द्र: उच्च का चन्द्र — सर्वोत्तम। मन स्थिर, सुखी और भावनात्मक रूप से सम्पन्न। माता से गहरा प्रेम। सांसारिक सुखों की प्राप्ति। ऐसे जातक अत्यन्त लोकप्रिय और सामाजिक होते हैं। वृषभ में मंगल: मंगल यहाँ शत्रु राशि में है। ऊर्जा तो है परन्तु दिशाहीन हो सकती है। आर्थिक विवाद और सम्पत्ति के मामले में झगड़े हो सकते हैं। परन्तु यदि मंगल शुभ दृष्टि से युक्त हो तो परिश्रम से धन अर्जन होता है। वृषभ में बुध: बुध यहाँ मित्र राशि में है। व्यापार बुद्धि और वाणी कौशल असाधारण होता है। वित्तीय विश्लेषण में प्रतिभा। लेखन और कला दोनों में सफलता। CA, बैंकर और व्यापारी के लिए उत्तम संयोग। वृषभ में गुरु: गुरु यहाँ शत्रु राशि में हैं परन्तु भौतिक सुख और धन देते हैं। धर्म और दर्शन में रुचि होती है परन्तु आध्यात्मिकता से अधिक भौतिकता की ओर झुकाव। विवाह में विलम्ब हो सकता है। वृषभ में शुक्र: स्वगृह — शुक्र अपनी राशि में। सौन्दर्य, प्रेम, कला और भौतिक सुख — सब अपने उत्कृष्ट रूप में। विवाह सुखी। व्यापार में सफलता। ऐसे जातक जीवन में बहुत कुछ भोगते और उपभोग करते हैं। वृषभ में शनि: शनि यहाँ मित्र राशि में है और अत्यन्त शुभ फल देता है। अनुशासन और धैर्य — वृषभ की स्थिरता में शनि का धैर्य मिलकर असाधारण दीर्घकालिक सफलता देता है। सम्पत्ति, करियर और स्थायित्व — सब मिलता है। वृषभ में राहु: राहु यहाँ उच्च के माने जाते हैं एक मत के अनुसार। भौतिक महत्त्वाकांक्षा असाधारण होती है। धन और सुखों की तलाश में असाधारण प्रयास। तकनीक और वित्त में विशेष सफलता। वृषभ में केतु: केतु यहाँ पूर्वजन्म की भौतिक सम्पन्नता का संकेत देता है — परन्तु इस जन्म में भौतिक चीजों के प्रति उदासीनता। आध्यात्मिकता की ओर झुकाव। वृषभ लग्न — बारह भावों का विश्लेषण प्रथम भाव — वृषभ (शुक्र स्वामी): वृषभ लग्न के जातक शारीरिक रूप से आकर्षक, गठीले और स्वस्थ होते हैं। आँखें सुन्दर और आवाज मधुर होती है। स्वभाव में धैर्य और शान्ति। लग्नेश शुक्र की स्थिति सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित करती है। द्वितीय भाव — मिथुन (बुध स्वामी): धन भाव का स्वामी बुध — बुद्धि और व्यापार से धन। वाणी चतुर और प्रभावशाली। परिवार में बौद्धिक वातावरण। व्यापार और लेखन से आय। तृतीय भाव — कर्क (चन्द्र स्वामी): पराक्रम भाव का स्वामी चन्द्र — साहस भावनाओं से प्रेरित होता है।

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अध्याय ३.१ — मेष राशि | स्वभाव, ग्रह फल और सम्पूर्ण विश्लेषण | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम

वैदिक ज्योतिष में बारह राशियाँ — यह केवल बारह खाने नहीं हैं। ये बारह राशियाँ मनुष्य के स्वभाव, उसकी प्रकृति, उसकी शक्तियों और उसकी कमजोरियों का एक सम्पूर्ण मानचित्र हैं। पाँच वर्षों के ज्योतिष परामर्श में मैंने हजारों कुण्डलियाँ देखी हैं और एक बात निश्चित रूप से कह सकता हूँ — जब किसी जातक की राशि और उसमें स्थित ग्रहों को सम्पूर्णता से समझा जाए, तो उस व्यक्ति के जीवन का एक बड़ा रहस्य खुल जाता है। मॉड्यूल ३ में हम बारह राशियों का विस्तृत अध्ययन करेंगे। आज हम मेष राशि से आरम्भ करते हैं — बारह राशियों में प्रथम, सबसे साहसी और सबसे अग्रणी राशि। शास्त्र में मेष राशि का स्वरूप “मेषो व्याघ्रमुखः क्रूरः पित्तप्रकृतिरुच्यते। रक्तवर्णो महाकायः पूर्वभागे बलान्वितः॥” बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, राशि स्वभावाध्याय अर्थात् — मेष राशि का मुख व्याघ्र (बाघ) जैसा है, यह क्रूर स्वभाव की है, पित्त प्रकृति की है, रक्त वर्ण की है, महाकाय है और इसका बल पूर्वार्द्ध में अधिक होता है। वराहमिहिर ने बृहज्जातक में मेष के विषय में कहा है — “मेषे क्षत्रिया जातिः” — मेष राशि क्षत्रिय जाति की राशि है। इसका सीधा अर्थ है — मेष राशि के जातकों में योद्धा का स्वभाव होता है, वे नेतृत्व के लिए जन्मे होते हैं। “चरराशौ मेषे तनुभवे जातः साहसी बलवान् पराक्रमी।” जातक परिजात, राश्यध्याय जातक परिजात में स्पष्ट कहा गया है कि मेष लग्न में जन्मा जातक साहसी, बलवान और पराक्रमी होता है। यह वर्णन आज भी उतना ही सटीक है जितना हजारों वर्ष पहले था। मेष राशि का मूलभूत स्वरूप मेष राशि कालपुरुष की कुण्डली में प्रथम भाव है — अर्थात् यह राशि चक्र की आरम्भिक राशि है। जिस प्रकार किसी भी यात्रा का प्रथम कदम सबसे महत्त्वपूर्ण होता है, उसी प्रकार मेष राशि का स्थान राशि चक्र में सर्वप्रथम और सर्वाधिक मौलिक है। मेष अग्नि तत्त्व की चर राशि है। अग्नि तत्त्व — ऊर्जा, उत्साह और प्रकाश। चर — गतिशील, परिवर्तनशील और नई शुरुआत करने वाला। मेष राशि के स्वामी मंगल हैं। मंगल — पृथ्वी के पुत्र, साहस के देवता, योद्धाओं के रक्षक। मंगल की स्वामित्व वाली राशि में जन्मे जातक स्वाभाविक रूप से मंगल के गुण — साहस, ऊर्जा, प्रत्यक्षता और नेतृत्व — अपने भीतर रखते हैं। मेष राशि का प्रतीक मेढ़ा (भेड़ का नर) है — जो सिर झुकाकर लड़ता है, जो पीछे नहीं हटता। मेष राशि में सूर्य उच्च के होते हैं — यह अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। सूर्य आत्मा के कारक हैं और मेष साहस की राशि है। जब आत्मशक्ति और साहस मिलते हैं तो असाधारण नेतृत्व जन्म लेता है। मेष राशि में शनि नीच के होते हैं — शनि का धैर्य और विलम्ब मेष की तात्कालिकता के साथ नहीं चलता। मेष राशि के जातकों का स्वभाव पाँच वर्षों में मैंने जितने भी मेष लग्न या मेष राशि के जातकों से परामर्श किया है, उनमें कुछ गुण लगभग सार्वभौमिक रूप से मिले हैं। पहला और सबसे प्रमुख — साहस। मेष राशि के जातक जहाँ दूसरे सोचते रह जाते हैं, वहाँ ये कार्य कर देते हैं। इनकी सबसे बड़ी शक्ति यही है — action लेने की क्षमता। दूसरा गुण — प्रत्यक्षता। मेष राशि के जातक जो मन में होता है वही मुँह पर होता है। ये कूटनीति में कुशल नहीं होते — परन्तु इनकी स्पष्टवादिता एक अलग प्रकार का सम्मान जगाती है। तीसरा — नेतृत्व। भीड़ में भी ये जातक नेतृत्वकारी स्थिति में स्वतः आ जाते हैं। इन्हें नेता बनने की इच्छा नहीं होती — ये स्वाभाविक रूप से नेता होते हैं। परन्तु मेष राशि की कमजोरियाँ भी उतनी ही स्पष्ट हैं। क्रोध — मेष जातकों का क्रोध तीव्र होता है परन्तु शीघ्र शान्त भी हो जाता है। अधैर्य — इन्हें प्रतीक्षा पसन्द नहीं। अहंकार — अपनी बात मनवाने की प्रवृत्ति इन्हें कभी-कभी कठिनाई में डालती है। एक जातक का उदाहरण देता हूँ — वे एक बड़ी कम्पनी में manager थे, मेष लग्न। उनकी टीम उनसे डरती थी परन्तु प्रेम नहीं करती थी। जब यह समझाया गया कि मंगल की शक्ति को करुणा से मिलाना होगा, तब उनके व्यक्तित्व में एक नया आयाम जुड़ा। मेष राशि में सभी ग्रह — विस्तृत फल मेष में सूर्य: उच्च का सूर्य — सर्वोत्तम। असाधारण आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और पिता का आशीर्वाद। सरकारी सेवा और राजनीति में सफलता। ऐसे जातक जहाँ भी जाते हैं अपनी उपस्थिति जता देते हैं। हृदय और रीढ़ स्वस्थ रहती है। मेष में चन्द्र: चन्द्रमा यहाँ भावनाओं को साहस देता है। ये जातक भावुक परन्तु कार्यशील होते हैं — रोते नहीं, लड़ते हैं। परन्तु मन अस्थिर और जल्दबाज हो सकता है। माता के साथ सम्बन्ध में उतार-चढ़ाव। मेष में मंगल: स्वगृह — मंगल अपनी राशि में। असाधारण ऊर्जा, पराक्रम और साहस। ये जातक किसी भी संघर्ष से नहीं घबराते। सेना, खेल और उद्यमशीलता में विशेष सफलता। परन्तु क्रोध और आवेग पर नियन्त्रण रखना आवश्यक है। मेष में बुध: बुध यहाँ नीच के नहीं परन्तु असहज होते हैं — मेष की सीधी सोच और बुध की कूटनीतिक वाणी में टकराव होता है। ये जातक सीधे बोलते हैं, परन्तु कभी-कभी अनावश्यक विवाद हो जाता है। व्यापार में तेज परन्तु विवरण में कमजोर। मेष में गुरु: गुरु यहाँ शुभ होते हैं। ज्ञान में साहस और धर्म में उत्साह आता है। ऐसे जातक उत्साही वक्ता और प्रेरक होते हैं। धन और सन्तान का सुख मिलता है। विदेश यात्रा और उच्च शिक्षा के योग। मेष में शुक्र: शुक्र यहाँ नीच नहीं परन्तु असहज होते हैं — मेष की स्थूलता और शुक्र की सूक्ष्मता में अन्तर होता है। प्रेम में आवेग और जल्दबाजी। जीवनसाथी से मतभेद हो सकते हैं। कला में रुचि परन्तु धैर्य की कमी। मेष में शनि: नीच का शनि — कठिन स्थिति। शनि का धैर्य और मेष की तात्कालिकता परस्पर विरोधी हैं। जीवन में अनुशासन बनाए रखने में कठिनाई। परन्तु नीचभंग के संयोग — गुरु या शुक्र की युति या दृष्टि — इसे शुभ बना सकते हैं। मेष में राहु: राहु यहाँ असाधारण महत्त्वाकांक्षा देता है। ये जातक हर क्षेत्र में अग्रणी बनना चाहते हैं। तकनीक और नवीन क्षेत्रों में सफलता। परन्तु आवेग में गलत निर्णय लेने की सम्भावना। मेष में केतु: केतु यहाँ पूर्वजन्म के पराक्रम का संकेत देता है। ये जातक साहसी परन्तु एकाकी होते हैं। आध्यात्मिक

अध्याय ३.१ — मेष राशि | स्वभाव, ग्रह फल और सम्पूर्ण विश्लेषण | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम Read Post »