अध्याय ४.१२ — एकादश भाव | लाभ, आय, इच्छापूर्ति और बड़े भाई-बहन | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम

Ekadash Bhava Labh — sikkon ka baksa

एकादश भाव — लाभ, आय, इच्छापूर्ति और बड़े भाई-बहनों का भाव। पाँच वर्षों के परामर्श में मैंने देखा है कि एकादश भाव वह भाव है जहाँ जीवन की इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। जिस जातक का एकादश भाव बलवान होता है, उसकी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं — चाहे धन की हो, प्रतिष्ठा की हो या सम्बन्धों की। इसीलिए एकादश भाव को “इच्छा भाव” या “काम भाव” भी कहा जाता है।

शास्त्र में एकादश भाव

“आयः सर्वार्थसिद्धिश्च ज्येष्ठभ्राता तथैव च। चतुष्पात् लाभमेकादशाद् विनिर्दिशेत् विचक्षणः॥”

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय ११

महर्षि पाराशर कहते हैं — आय, सभी कार्यों की सिद्धि, बड़ा भाई, चतुष्पाद (चार पैर वाले पशु) और लाभ — ये एकादश भाव से जानने चाहिए। एकादश भाव उपचय भाव भी है — यहाँ सब ग्रह अपेक्षाकृत शुभ होते हैं।

एकादश भाव के विस्तृत कारकत्व

लाभ और आय: एकादश भाव आय का प्रमुख भाव है। द्वितीय भाव संचित धन है तो एकादश भाव आय का प्रवाह है। एकादशेश और गुरु (एकादश के नैसर्गिक कारक) की स्थिति से आय का विचार होता है।

इच्छापूर्ति: एकादश भाव से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। इसीलिए एकादश भाव को “सर्वार्थसिद्धि भाव” कहा गया है।

बड़े भाई-बहन: जन्म से पहले (बड़े) भाई-बहनों का विचार एकादश से होता है।

मित्र और सामाजिक मण्डल: जातक के मित्र, सामाजिक सम्पर्क और बड़े समूह एकादश से देखे जाते हैं।

एकादश भाव में सभी ग्रहों के फल

एकादश में सूर्य: सूर्य एकादश में — सरकार और नेतृत्व से आय। उच्च पद वाले मित्र। बड़े भाई से लाभ। इच्छाएँ पूर्ण होती हैं परन्तु अहंकार के कारण कुछ मित्र खो जाते हैं।

एकादश में चन्द्र: चन्द्र एकादश में — जनसम्पर्क और भावनात्मक सम्बन्धों से आय। मित्र विशाल और विविध। आय में उतार-चढ़ाव — शुक्ल पक्ष में वृद्धि।

एकादश में मंगल: मंगल एकादश में — साहस और उद्यमशीलता से असाधारण आय। मित्र साहसी और ऊर्जावान। बड़े भाई से लाभ। प्रतिस्पर्धा में विजय से आय।

एकादश में बुध: बुध एकादश में — व्यापार और बुद्धि से असाधारण लाभ। मित्र बुद्धिमान। विविध आय स्रोत। इच्छाएँ बौद्धिक प्रयास से पूर्ण।

एकादश में गुरु: गुरु एकादश में — यह अत्यन्त शुभ। असाधारण लाभ और इच्छापूर्ति। मित्र विद्वान और उच्च पद वाले। बड़े भाई से लाभ। जीवन में सब इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।

एकादश में शुक्र: शुक्र एकादश में — कला और सौन्दर्य से असाधारण लाभ। सुखद मित्र। प्रेम सम्बन्धों से भी लाभ। भौतिक इच्छाएँ पूर्ण।

एकादश में शनि: शनि एकादश में — यह उत्तम स्थान है। परिश्रम से दीर्घकालिक और स्थायी आय। मित्र कम परन्तु विश्वसनीय। इच्छाएँ देरी से परन्तु निश्चित रूप से पूर्ण।

एकादश में राहु: राहु एकादश में — असाधारण और अपरम्परागत तरीकों से लाभ। तकनीक और मीडिया से आय। मित्र विविध। इच्छाएँ नाटकीय तरीके से पूर्ण।

एकादश में केतु: केतु एकादश में — लाभ में उतार-चढ़ाव। आध्यात्मिक इच्छाएँ पूर्ण। सांसारिक इच्छाओं के प्रति उदासीनता।

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अगले अध्याय की ओर

अगले और अन्तिम अध्याय में हम द्वादश भाव का अध्ययन करेंगे — व्यय, हानि, विदेश, एकान्त और मोक्ष का वह भाव जो बारह भावों की यात्रा का समापन करता है।

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