Jyotish Course

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अध्याय ४.७ — षष्ठ भाव
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अध्याय ४.७ — षष्ठ भाव | शत्रु, रोग, ऋण और सेवा का विस्तृत विश्लेषण | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम

षष्ठ भाव — शत्रु, रोग, ऋण और सेवा का भाव। वैदिक ज्योतिष में षष्ठ भाव को त्रिक भाव कहा जाता है — परन्तु पाँच वर्षों के परामर्श अनुभव में मैंने एक बात…

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अध्याय ४.६ — पञ्चम भाव
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अध्याय ४.६ — पञ्चम भाव | सन्तान, बुद्धि, पूर्वजन्म का पुण्य और रचनात्मकता | वैदिक ज्योतिष

पञ्चम भाव — सन्तान, बुद्धि, पूर्वजन्म का पुण्य और रचनात्मकता का भाव। वैदिक ज्योतिष में पञ्चम भाव को “पुण्य भाव” भी कहा जाता है — यह वह भाव है जहाँ पिछले…

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अध्याय ४.५ — चतुर्थ भाव
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अध्याय ४.५ — चतुर्थ भाव | माता, गृह, मन, सुख और सम्पत्ति | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम

चतुर्थ भाव — माता, गृह, मन, सुख और सम्पत्ति का भाव। पाँच वर्षों के परामर्श में मैंने एक बात बार-बार देखी है — जिन जातकों का चतुर्थ भाव बलवान होता है, उनके…

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