अध्याय ४.२ — प्रथम भाव (लग्न) | शरीर, व्यक्तित्व और लग्नेश का विस्तृत विश्लेषण | वैदिक ज्योतिष
वैदिक ज्योतिष में प्रथम भाव — लग्न भाव — कुण्डली का सबसे महत्त्वपूर्ण भाव है। पाँच वर्षों के ज्योतिष परामर्श में मैंने यह अनुभव किया है कि किसी भी कुण्डली…
