Author name: Astro Vgyaan

Jyotish Course

अध्याय ४.२ — प्रथम भाव (लग्न) | शरीर, व्यक्तित्व और लग्नेश का विस्तृत विश्लेषण | वैदिक ज्योतिष

वैदिक ज्योतिष में प्रथम भाव — लग्न भाव — कुण्डली का सबसे महत्त्वपूर्ण भाव है। पाँच वर्षों के ज्योतिष परामर्श में मैंने यह अनुभव किया है कि किसी भी कुण्डली…

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अध्याय ४.१ — बारह भावों का परिचय | केन्द्र, त्रिकोण, त्रिक और योगकारक | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम

वैदिक ज्योतिष में कुण्डली के बारह भाव — यह केवल बारह खाने नहीं हैं। ये बारह भाव मानव जीवन के समस्त अनुभवों का एक सम्पूर्ण मानचित्र हैं। जन्म से लेकर…

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अध्याय ३.१२ — मीन राशि | स्वभाव, ग्रह फल और सम्पूर्ण विश्लेषण | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम

मीन राशि — राशि चक्र की अन्तिम और सबसे गहरी राशि। मेष से आरम्भ हुई यह यात्रा मीन पर समाप्त होती है — और इस समापन में एक गहरा अर्थ है। मेष जहाँ “मैं” का…

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