अध्याय ४.५ — चतुर्थ भाव | माता, गृह, मन, सुख और सम्पत्ति | वैदिक ज्योतिष पाठ्यक्रम
चतुर्थ भाव — माता, गृह, मन, सुख और सम्पत्ति का भाव। पाँच वर्षों के परामर्श में मैंने एक बात बार-बार देखी है — जिन जातकों का चतुर्थ भाव बलवान होता है, उनके…
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